Female Body Parts Name in Hindi With Picture – मजेदार एवं रोचक तथ्यों के साथ

इस धरती पर सभी मनुष्यों के शरीर की रचना समान होती है। प्रकृति ने हमारे शरीर को अलग-अलग कार्यो के लिए लिए निर्मित किया है यही कारण है की मानव शरीर में विभिन प्रकार के अंग अलग-अलग कार्यों हेतु निर्मित है। आमतौर पर मनुष्य के सभी अंग एक निश्चित कार्य करते है और सभी मनुष्यो में अधिकतर अंग कॉमन होते है जैसे हृदय, लिवर, गुर्दे और फेफड़े आदि अंग। इसके बावजूद भी प्रकृति द्वारा कुछ निश्चित कार्यो के लिए स्त्री और पुरुष की शारीरिक संरचना में वृहद स्तर पर बदलाव किया गया है। प्रकृति द्वारा स्त्री और पुरुषों की प्रजनन क्षमता को ध्यान में रखते विशेष प्रकार के प्रजनन अंगो का विकास किया गया है। इसके अतिरिक्त भी अन्य स्तर पर स्त्री और पुरुषों की शारीरिक संरचना में अंतर होता है। आज के इस लेख के माध्यम से हम आपको स्त्री शरीर के अंगो के नाम चित्र के साथ (Female Body Parts Name in Hindi With Picture) सम्बंधित जानकारी प्रदान करने वाले है। लेख के माध्यम से फीमेल बॉडी पार्ट नेम इन हिंदी विद पिक्चर सम्बंधित जानकारी प्राप्त करने के अतिरिक्त आप इस सम्बन्ध में अन्य रोचक जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे।

Female Body Parts Name in Hindi With Picture

Female Body Parts Name in Hindi With Picture

मानव शरीर हमेशा से ही वैज्ञानिको के बीच आश्चर्य का विषय रहा है। मानव शरीर में विभिन प्रकार के अंग पाए जाते है जो विभिन कार्यो के लिए प्रयुक्त होते है। इस आर्टिकल के माध्यम से आपको हिंदी में फीमेल बॉडी पार्ट नेम सम्बंधित जानकारी प्रदान की गयी है ताकि आप फीमेल बॉडी पार्ट से सम्बंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकें। इसके अतिरिक्त इस आर्टिकल में फीमेल बॉडी में पाए जाने वाले प्रमुख हार्मोन्स और ग्रंथियों की जानकारी भी प्रदान की गयी है ताकि आप अपने सामान्य ज्ञान में भी वृद्धि कर सके। बायोलॉजी विषय वाले छात्रों के लिए भी यह लेख समान रूप से उपयोगी रहेगा। यहाँ आपको फीमेल बॉडी पार्ट के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्रदान की गयी है।

भौंह (Eyebrow)

आँखों के ऊपरी भाग में स्थित भौंह सभी मनुष्यो में समान रूप से पायी जाती है। यह मुख्यत बालों और मानव त्वचा द्वारा निर्मित होती है जो की आँखों के ऊपरी भाग में स्थित होते है। स्त्री की भौहों का आकार पुरुषो के भौहों के मुकाबले छोटा होता है साथ ही इनके भौहों के बाल पुरुषो के मुकाबले मुलायम भी होते है। भौंहो का मानव शरीर में बहुत उपयोग है चूँकि यह हमारी आँखों की रक्षा करने के काम आती है। इसके अतिरिक्त मनुष्य को अलग पहचान देने में भी भौंह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मानव द्वारा भौहों का सबसे अधिक उपयोग अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। अपने भौहों को स्वस्थ रखने और आकर्षक बनाने के लिए हमे नियमित रूप से विटामिन-ई का सेवन करना चाहिए।

Female Body Parts Name

कमर (Waist)

वक्ष के नीचे स्थित कमर स्त्री के शरीर का सबसे संकरा भाग होता है जो की स्त्री शरीर के महत्वपूर्ण अंगो को कवर करता है। हमारे समाज में प्रायः स्त्रियों की कमर को आकर्षण का पर्याय माना जाता है जो की समाज में लिंग-भेदभाव को बढ़ावा देता है साथ ही यह महिलाओं की शारीरिक संरचना का अपमान करना भी है। इसके अतिरिक्त कमर में वसा का जमाव भी होता है जिसके लिए नियमित रूप से व्यायाम के द्वारा वसा को घटाया जा सकता है।

Waist women

वक्ष (Chest)

महिला के वक्षस्थल शिशु स्तनपान का महत्वपूर्ण अंग है। वक्ष पर स्तन और निप्पल होते है जो की स्त्री के शरीर में प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन हार्मोन की क्रियास्वरूप विकसित होते है। स्त्री के स्तन वसायुक्त ग्लैंडुलर ऊतकों से बने होते है जो की शिशु के लिए दूध उत्पादन के लिए आवश्यक होते है। इसके अतिरिक्त स्तनों में वसाऊतक भी होते है जो की स्तन के आकार को निर्धारित करते है। स्तन के छोटे-छोटे वसायुक्त भागो को लोब्स कहा जाता है जहाँ शिशु के लिए दूध का उत्पादन होता है। कनेक्टिव टिश्यू और लिगामेंट स्तनों को शेप देते है जिससे की स्तन का ढांचा निर्धारित होता है वही स्तन में पायी जाने वाली तंत्रिकाएँ इसमें उत्तेजना पैदा करती है।

वक्ष (Chest)

स्तन में कई सूक्ष्म रक्त वाहिकायें, शिराएँ और नोड्स भी पाए जाते है जो की इसके कार्यविधि को संचालित करते है। इसके अतिरिक्त स्तन में निप्पल के समीप पाए जाने वाले गहरे रंग के क्षेत्र को एरीओला कहा जाता है जो की इस क्षेत्र के आसपास की त्वचा की मांसपेशियों के कारण होता है। स्तन की पूरी क्रियाविधि को मस्तिष्क में स्थित पीयूष ग्रंथि के द्वारा संचालित किया जाता है। शिशु के पैदा होने के पश्चात स्तनों का आकार कड़ा हो जाता है जिससे की स्तनपान के दौरान शिशु को दूध पीने के लिए आवश्यक दाब मिल पाता है। नवजात शिशुओं के लिए माँ का दूध ही सर्वश्रेष्ठ माना जाता है ऐसे में आवश्यक है की प्रसव के न्यूनतम 6 माह तक शिशु को सिर्फ माँ के दूध का सेवन कराया जाए।

जांघ (Thigh)

जांघ हमारे शरीर की एक महत्वपूर्ण जटिल संरचना होती है जो की कूल्हे के नीचे स्थित होती है। जांघ में मानव शरीर की सबसे बड़ी हड्डी फीमर पायी जाती है जो की कूल्हों को घुटने से जोड़ने का कार्य करती है। जाँघ कूल्हे से सॉकेट और अन्य जटिल संरचनाओं द्वारा जुड़ा रहता है जो की मानव शरीर का भार उठाने में मदद करता है। स्त्रियों में जांघ पर गर्भावस्था के दौरान अतिरिक्त भार रहता है यही कारण है की स्त्रियों के शरीर की संरचना इसी स्थिति के अनुसार ढली रहती है ताकि वे आसानी से गर्भावस्था के दौरान स्त्री शरीर का भार वहन कर सकें।

Thigh women

स्तन (Breast)

स्त्रियों के शरीर में स्तन वक्ष (Chest) का भाग है जो की शिशु स्तनपान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। वास्तव में स्तन शिशु को प्रारंभिक आहार उपलब्ध करवाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण अंग है जहाँ शिशु के लिए दूध का उत्पादन होता है। स्तन वक्ष पर स्थित वसामय ऊतकों से बने अंग है जो की शिशु आहार के लिए दूध उत्पादन करते है। स्तन में वसामय ऊतक होते है जो की इन्हे आकार देते है इसके अतिरिक्त कनेक्टिव टिश्यू और लिगामेंट के द्वारा स्तन संरचनात्मक ढांचा प्राप्त करता है। गर्भावस्था के पश्चात फीमेल बॉडी द्वारा उत्सर्जित हार्मोन द्वारा स्त्री के स्तनों में दूध बनता है जो की शिशु के आहार पूर्ति करता है।

स्तन में दूध उत्पादन के लिए छोटे-छोटे 15 से 20 भाग होते है जिन्हे लोब कहा जाता है। इसके अतिरिक्त लोब भी आगे जाकर और छोटी संरचनाओं में विभक्त हो जाते है जिसे की लोब्यूल कहा जाता है। वास्तव में स्तनो में पाए जाने वाले लोब्यूल ही दूध उत्पादन के प्रारंभिक स्थान है जहाँ दूध का उत्पादन होता है। लोब्यूल में निर्मित दूध को शिशु के स्तनपान हेतु निप्पल तक पहुंचाने का कार्य स्तन में स्थित छोटी-छोटी सूक्ष्म नलिकाओं द्वारा किया जाता है जो की पूरे स्तन में फैली होती है। लोब्यूल द्वारा उत्पादित दूध को इन सूक्ष्म नलिकाओं द्वारा ही निप्पल तक पहुंचाया जाता है जहाँ से शिशु द्वारा चूषण प्रभाव के माध्यम से इसे ग्रहण किया जाता है। स्तनों द्वारा उत्पादित दूध की मात्रा कई कारकों पर निर्भर करती है जिसमे गर्भवती का आहार और शिशु को दूध पिलाने की आदतें प्रमुख है। इसके अतिरिक्त यह महिला के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी निर्भर करता है।

नाभि (Navel)

महिला की नाभि वक्ष के नीचे और कूल्हे के ऊपर पेट के मध्य भाग में स्थित एक छोटा का खरोज होता है। नाभि का विकास भ्रूण के विकास के दौरान होता है जो की माँ के शरीर से एक नली के द्वारा जुड़ा हुआ रहता है। भ्रूण की वृद्धि के लिए आवश्यक तत्वों की पूर्ति नाभि के द्वारा ही पूरी की जाती है ऐसे में नाभि किसी भी व्यक्ति के शरीर का महत्वपूर्ण अंग होता है। भ्रूण के विकास और आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आवश्यक पोषण नाभि द्वारा जुड़ी नली के द्वारा की जाती है साथ ही अन्य आवश्यकताएँ भी इसके माध्यम से ही पूरी की जाती है। हालांकि प्रसव के बाद डॉक्टर्स द्वारा इस नली की काट दिया जाता है इसलिए यहाँ हमे गोल आकार की गड्ढेनुमा आकृति दिखाई देती है। अलग-अलग लोगो के शरीर की नाभि का आकार और साइज अलग-अलग होता है। नाभि मानव शरीर का संतुलन बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

नाभि (Navel)

कूल्हा (Hip)

कमर के नीचे स्थित मादा कूल्हे की संरचना वास्तव में अत्यंत जटिल होती है। यहाँ स्त्री शरीर के प्रजनन अंग मौजूद होते है इसके अतिरिक्त यह शारीरिक गतिविधियों के लिए भी आवश्यक है। कूल्हा जिसे की हिप भी कहा जाता है जटिल संरचना से युक्त मानव संरचना होती है जहाँ जांघ की सबसे बड़ी हड्डी फीमर भी रहती है। यहाँ पाए जाने वाले जोड़ो को बॉल एवं सॉकेट जोड़ कहा जाता है जो की शरीर की संचालनात्मक गतिविधियों के लिए आवश्यक होता है। स्त्री का कूल्हा पुरुष के कूल्हे से बड़ा होता है क्यूंकि स्त्रियों का शरीर चाइल्ड बर्थ के अनुकूल होता है। स्त्रियों के कूल्हे की संरचना इस प्रकार से होती है की वह गर्भावस्था के अनुकूल होता है और बच्चे के जन्म के अनुसार पर्याप्त लचीला भी होता है। यहाँ कई प्रकार की जटिल ग्रंथियां पायी जाती है जो की कूल्हे को आकार देते है।कूल्हे में श्रोणि मेखला में स्थित संरचनाएँ मानव शरीर की सबसे जटिल संरचनाओं में से एक है जो की बॉडी के अपर और लोअर पार्ट के मध्य स्थित होती है। यहाँ आपको कई प्रकार के जोड़ मिलते है जो की महिला शरीर को संरचनात्मक मजबूती प्रदान करते है।

कूल्हा (Hip)

स्तन (मेमरी ग्लैंड)- {mammary gland}

गर्भावस्था के बाद महिलाओं के शरीर में विभिन प्रकार से बदलाव होते है जिसमे की शिशु के आहार के लिए स्तनपान करवाना भी शामिल है। इसके लिए महिलाओ के स्तन में स्थित मेमरी ग्लैंड का विशेष योगदान है जो की स्तनपान के लिए महिलाओ को स्तनपान हेतु आवश्यक जानकारी याद रखने में मददगार है। मेमरी ग्लैंड {mammary gland} में महिलाओं को शिशु स्तनपान से सम्बंधित सभी सूचनाएं स्टोर हो जाती है जो की महिलाओ को पुनः स्तनपान हेतु स्मरण के काम आती है। इसके अतिरिक्त यह महिलाओं को मातृत्व सम्बंधित अन्य चीजों में भी सहायता करती है जो की शिशु के बाल्यकाल के विकास के दौरान आवश्यक है।

स्तन (मेमरी ग्लैंड)- {mammary gland}

लिंग आधार पर मनुष्य का विभाजन

शारीरिक रूप से देखा जाए तो स्त्री और पुरुषो के शरीर में मौलिक रूप से कोई अंतर नहीं होता है। सभी मनुष्यों का शरीर कोशिकाओं से बना होता है जहाँ श्वसन, पाचन, उत्सर्जन, ऊर्जा संग्रहण और ऊर्जा उपयोग की प्रक्रिया समान होती है। इसके अतिरिक्त मनुष्य शरीर की अन्य प्रक्रियायें भी समान होती है। परंतु पुरुषों और महिलाओं के बीच शारीरिक संरचना में मुख्य अंतर यौन अंगो का होता है जिसके आधार पर मनुष्यों के विभाजन किया जाता है। लिंग निर्धारण के आधार पर मनुष्यों को 3 श्रेणियों में बाँटा जाता है।

  • महिला (Female)
  • पुरुष (Male)
  • किन्नर (ट्रांसजेण्डर)

अन्य सभी शारीरिक समानताएँ होने के बावजूद भी इन सभी वर्गों में गुणसूत्र के स्तर पर मूलभूत अंतर होता है। गुणसूत्र किसी भी मनुष्य का लिंग निर्धारण करता है। सभी मनुष्यों में 23 जोड़ी गुणसूत्र पाए जाते है जिनमे कुल 46 गुणसूत्र (chromosomes) होते है। इनमे 22 जोड़ी गुणसूत्र समान होते है जिन्हे ऑटोसोमस (autosomes) कहा जाता है। 23वां गुणसूत्र लिंग गुणसूत्र (sex chromosomes) कहा जाता है। इसी गुणसूत्र के आधार पर मनुष्य का लिंग निर्धारण तय किया जाता है। महिलाओं में 23वां गुणसूत्र XX रूप में पाए जाते है वही पुरुषो में यह XY रूप में पाए जाते है। XX गुणसूत्र मिलने पर लड़की जबकि XY गुणसूत्र मिलने पर लड़के का जन्म होता है। महिला और पुरुषो में पाए जाने वाले गुणसूत्रों का विवरण इस प्रकार से है :-

 गुणसूत्र

वर्ग कुल गुणसूत्र (total chromosomes) ऑटोसोम (autosomes)लिंग गुणसूत्र (sex chromosomes)
महिला 46 44 2 (XX)
पुरुष 46 44 2 (XY)

इसके अतिरिक्त किन्नर नागरिको में भी 23 जोड़ी गुणसूत्र यानी की 46 गुणसूत्र पाए जाते है। ट्रांसजेंडर लोगो का जन्म साधारण मनुष्यों की भांति ही होता है परन्तु शारीरिक और जेनेटिक कारणों से उनके यौन अंग पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाते है यही कारण है की ये लोग प्रजनन करने में सक्षम नहीं होते है। हालांकि अन्य सभी शारीरिक क्रियाओं में ये भी आम मनुष्यों की भांति होते है और मौलिक स्तर पर भी आम नागरिको और किन्नर नागरिकों में किसी प्रकार का अंतर नहीं है।

स्त्री शरीर के अंगो के नाम

भ्रूण के प्रारंभिक समय में स्त्री और पुरुषो के शरीर के सभी अंग समान होते है परन्तु समय के साथ इनमे परिवर्तन होने लगता है और बाद के समय में हम दोनों की शारीरिक संरचना में अंतर देख सकते है। इसका कारण पुरुष और स्त्री शरीर में पाए जाने वाले हार्मोन्स होते है जो की शारीरिक बदलावों को रेगुलेट करते है। पुरुषो का शरीर स्त्रियों के मुकाबले गठीला और माँसल होता है वही स्त्रियों का शरीर कोमल और आकर्षक होता है। आदमियों की आवाज महिलाओं की आवाज के मुकाबले अधिक भारी होती है जिसका कारण पुरुषो में गले में स्थित ऐडम एप्पल होता है जो की स्त्रियों के ऐडम एप्पल के मुकाबले अधिक बड़ा होता है। इसके अतिरिक्त पुरुषो के शरीर के बाल भी स्त्रियों के शरीर के मुकाबले कड़े होते है वही स्त्रियों के शरीर के बाल मुलायम और नरम होते है। यौन स्तर पर स्त्रियों और पुरुषो के अंग पूर्णता भिन होते है।

स्त्रियों का शरीर मानव विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है यही कारण है की स्त्रियों का शरीर शिशु के जन्म के अनुकूल होता है। स्त्रियों के कूल्हे अधिक चौड़े होते है जो की गर्भावस्था के दौरान गर्भ के फैलने हेतु अतिरिक्त लचीलापन मुहैया कराते है। इसके अतिरिक्त गर्भ के दौरान स्त्रियों के शरीर के भार को संतुलित रखने में भी अधिक चौड़े कूल्हे मददगार होते है। शिशु के प्रारंभिक आहार के लिए भी स्त्रियों का शरीर अनुकूल होता है और शिशु के जन्म के बाद स्त्री के स्तनों से दूध का उत्पादन होता है जो की नवजात के लिए सबसे महत्वपूर्ण आहार है। साथ ही प्रजनन की अन्य आवश्यकताओं के अनुकूल भी स्त्रियों के शरीर में आवश्यक हार्मोन का विकास होता है जो की शिशु के भावी विकास के लिए आवश्यक होता है।

स्त्री शरीर के यौन अंगों के नाम

स्त्री शरीर के यौन अंग पुरुषो के यौन अंगो से पूर्णता भिन्न होते है और शिशु जन्म के अनुकूल होते है। स्त्री के यौन अंगो में निम्न अंगो को शामिल किया जाता है।

  • अंडाशय (Ovary)
  • डिंबवाही नलिका (Fallopian tube)
  • गर्भाशय (Womb)
  • गर्भाशय ग्रीवा (Cervix)
  • योनि (Vagina)
  • भगोष्ठ (Labia majora)
  • छोटा या लघु भगोष्ठ (Labia minora)

यहाँ आपको स्त्री शरीर के सभी यौन अंगो के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की गयी है।

गर्भाशय (Womb)

गर्भाशय (Womb)– मूत्राशय के ऊपर और पिछले भाग की ओर स्थित गर्भाशय एक नाशपाती के आकार का अंग होता है जो की भ्रूण के विकास के लिए सभी आवश्यक दशाएँ पैदा करता है। आम बोलचाल की भाषा में इस अंग को बच्चेदानी भी कहा जाता है। इसका ऊपरी भाग डिंबवाही नलिका (Fallopian tube) से अंडाशय से जुड़ा होता है जो की भ्रूण के विकास के लिए अंडे को गर्भाशय तक लाने का कार्य करता है। प्रजनन के बाद जब युग्मनज (अंडाणु और शुक्राणु का मेल) तैयार होता है तो इसका विकास गर्भाशय में होता है। गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) के द्वारा गर्भाशय योनि से जुड़ा रहता है। गर्भ वास्तव में भ्रूण के विकास का प्राथमिक स्थान होता है जहाँ भ्रूण के विकास के लिए सभी आवश्यक दशाएं मौजूद रहती है।

गर्भाशय (Womb)

प्रजनन के बाद जब युग्मनज का विकास होता है तो भ्रूण के विकास के लिए सभी आवश्यकताओं की पूर्ति गर्भाशय द्वारा ही की जाती है। यहाँ भ्रूण के सभी अंगो का विकास होता है और माँ के शरीर से सभी पोषण भ्रूण यहीं प्राप्त करता है। वास्तव में गर्भाशय की आंतरिक संरचना और भित्ति इस प्रकार निर्मित होती है की यह बहुत अधिक लचीली होती है। भ्रूण के आकार बढ़ने पर गर्भाशय की दीवारें भी फैलने लगती है और शिशु के विकास हेतु पर्याप्त स्थान उपलब्ध करवाती है। वही शिशु के पोषण एवं अनावश्यक पदार्थों के उत्सर्जन के लिए गर्भाशय में प्लेसेंटा नामक तशतरीनुमा संरचना होती है जो की गर्भाशय में धंसी होती है। यही से भ्रूण अपना पोषण प्राप्त करता है।

अंडाशय (Ovary)

अंडाशय (Ovary)- गर्भाशय के ऊपरी भाग में स्थित अंडाशय अंडे के आकार के छोटे-छोटे अंग होते है जो की डिंबवाही नलिका के माध्यम से गर्भाशय से जुड़े रहते है। स्त्री शरीर में अंडाशय की संख्या 2 होती है जो की गर्भाशय के दाएँ और बाएँ भाग में होते है। अंडाशय का मुख्य कार्य अंडो का निर्माण है जो की युग्मनज के लिए आवश्यक तत्त्व है। अंडाशय हर महीने भ्रूण विकास के लिए अंडे का उत्पादन करता है जो की गर्भ धारण के लिए आवश्यक होता है। यदि महिला का गर्भधारण नहीं होता है तो इस स्थिति में अंडा म्यूकस और रक्त के रूप में योनि से बाहर निकल जाता है जिसे की मासिक धर्म कहा जाता है।

अंडाशय मुख्यत स्त्री शरीर द्वारा उत्पन किये जाने वाले एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का उत्पादन करता है जो की स्त्री शरीर में यौन क्रियाओं के सञ्चालन में आवश्यक भूमिका निभाते है। इसके अतिरिक्त अंडाशय द्वारा उत्पादित हार्मोन स्त्रियों के मासिक चक्र को नियमित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।

डिंबवाही नलिका (Fallopian tube)

डिंबवाही नलिका– गर्भाशय से जुड़ी डिंबवाही नलिका या डिंबवाहिनी, नलिका के आकार के अंग होते है जो की दोनों तरफ से अंडाशय से जुड़े होते है। वास्तव में ये गर्भाशय और अंडाशय के मध्य मध्यस्त का कार्य करते है जो की भ्रूण निर्माण के लिए आवश्यक है। डिंबवाही नलिका को ओवीडक्ट या यूटीराईन ट्यूब भी कहा जाता है जो की 4 से 5 इंच लम्बी होती है।

डिंबवाही नलिका (Fallopian tube)

डिंबवाही नलिका भ्रूण के विकास का पहला चरण है क्यूंकि यही पर अंडाणु और शुक्राणु का मिलन होता है जो की युग्मनज का निर्माण करती है। युग्मनज अंडाणु और शुक्राणु के मिलन से उत्पन नए जीव को कहा जाता है जो की आगे चलकर भ्रूण का रूप ले लेता है। अंडाणु और शुक्राणु के मिलन को फर्टिलाइजेशन कहा जाता है जिसके बाद इसे विकास के लिए गर्भाशय में भेज दिया जाता है। इस प्रकार से डिंबवाही नलिका भ्रूण के विकास के लिए प्रारंभिक स्थान उपलब्ध करवाती है।

गर्भाशय ग्रीवा (Cervix)

गर्भाशय ग्रीवा- महिला के गर्भाशय के निचले भाग को गर्भाशय ग्रीवा या गर्भाशय गर्दन कहा जाता है जो की बेलन के आकार की मांसपेशी होती है। इसका आकार सामान्यत 2-3 सेंटीमीटर होता है जो की ऊपरी तरफ से गर्भाशय से जुड़ी रहती है। गर्भाशय ग्रीवा निचले भाग से योनि से जुड़ी रहती है जो की मासिक चक्र के दौरान रक्त को पास करने में सहायता करती है। इसके अतिरिक्त बच्चे के जन्म के दौरान गर्भाशय ग्रीवा आश्चर्यजनक रूप से फ़ैल जाती है और नवजात के जन्म के लिए आवश्यक मार्ग उपलब्ध करवाती है। गर्भाशय ग्रीवा शिशु जन्म के लिए आवश्यक रूप से लचीली होती है।

गर्भाशय ग्रीवा

योनि (Vagina)

योनि (Vagina)- स्त्री यौन अंगो में योनि सबसे महत्वपूर्ण यौन अंग माना जाता है चूँकि यह गर्भाशय ग्रीवा के माध्यम से गर्भाशय को बाह्य दुनिया से जोड़ने का कार्य करता है। योनि एक लचीली और मांसपेशिया ट्यूब है जिसकी आंतरिक भित्ति कोमल, लचीली और परतदार होती है। सम्भोग के दौरान यह आवश्यक हार्मोन्स का उत्पादन करती है सम्भोग को और भी आसान बनाती है। इसके अतिरिक्त यह बच्चे के जन्म हेतु मार्ग, उत्सर्जन हेतु मार्ग और मासिक चक्र के दौरान आवश्यक पदार्थो को शरीर से बाहर करने के लिए भी आवश्यक मार्ग प्रदान करती है। योनि पर पतली परत की झिल्ली को हाईमन कहा जाता है। योनि को मुख्यत 4 भागो में बांटा जाता है जिनके मुख्य विवरण इस प्रकार से है।

  • मोनस प्यूबिस (Mons Pubis)- योनि के ऊपरी भाग में स्थित मोनस प्यूबिस त्वचा को बनाने वाली एडीपोज ऊतकों से निर्मित होती है जो की सम्भोग के दौरान लिंग को कोमल अहसास प्रदान करती है। नीचे जाकर यह 2 भागों में बंट जाती है जिसे की लेबिया मेजोड़ा कहा जाता है जो की योनि का बाह्य मांसल भाग होता है।
  • लेबिया मेजोड़ा (Labia Majora) – लेबिया मेजोड़ा योनि का बाह्य मांसल भाग होता है जो की मुख्यता 2 भागों में विभाजित होता है।
  • लेबिया मिनोरा (Labia Minora)- लेबिया मिनोरा योनि का आंतरिक भाग होता है जो की बालरहित मुलायम और कोमल मांसल संरचना होती है। यह लेबिया मेजोड़ा के पास स्थित होता है जो की योनि के मुख्य भागो में शामिल होता है।
  • भगशेफ (Clitoris)- भगशेफ इरेक्टाइल टिशू से बना योनिक अंग है जो की लेबिया मिनोरा के ऊपरी भाग में एक छोटे से बिंदु की भांति स्थित होता है। भगशेफ योनि का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है चूँकि यह सेक्स उत्तेजना से सम्बंधित सभी मुख्य तंत्रिकाओं का केंद्र बिंदु है ऐसे में सम्भोग के दौरान भगशेफ की भूमिका महत्वपूर्ण है। सम्भोग के दौरान उत्तेजना के समय भगशेफ द्वारा आवश्यक रसायनो का उत्सर्जन किया जाता है जो की सम्भोग को आसान और आरामदायक बनाते है। इसी कारण से मेडिकल साइंस में भगशेफ को फॉल्स पेनिस के नाम से भी जाना जाता है।

योनि (Vagina)के मुख्य कार्य निम्न प्रकार से है :-

  • उत्सर्जन- अनावश्यक पदार्थो जैसे मूत्र का उत्सर्जन
  • संभोग- प्रजनन हेतु सम्भोग करना
  • शिशु जन्म – नवजात का जन्म
  • मासिक चक्र उत्सर्जन – मासिक चक्र के दौरान अनावश्यक पदार्थो को शरीर से बाहर निकालना

स्त्री शरीर में पाए जाने वाले आवश्यक हार्मोन

स्त्री शरीर में पाए जाने वाले मुख्य हार्मोन निम्न प्रकार से है :-

  • एस्ट्रोजन (Estrogen)- एस्ट्रोजन स्त्रियों के शरीर में पाया जाने वाला सबसे प्रमुख सेक्स हार्मोन है जो की स्त्रियों की यौन क्रियाओं को नियमित करता है। यह मुख रूप से अंडाशय द्वारा और गौण रूप से वसा ऊतक और एड्रेनल ग्रंथि द्वारा उत्पादित किया जाता है।
  • प्रोजेस्टेरोन (Progesterone)- अंडे के उत्पादन के लिए अंडाशय द्वारा प्रोजेस्टेरोन का उत्पादन किया जाता है जो की युग्मनज के निर्माण के लिए आवश्यक होता है।
  • टेस्टरोन (Testosterone)- यौन उत्तेजना और मासिक चक्र को नियमित करने के लिए महिला शरीर में टेस्टरोन हार्मोन का निर्माण होता है।

स्त्री शरीर के अंगो के नाम सम्बंधित अकसर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

स्त्री शरीर के अंग कौन-कौन से है ?

स्त्री और पुरुषों में सभी प्रकार के अंग समान होते है हालांकि इनमे मुख्य अंतर यौन अंगो के बीच ही होता है। स्त्री शरीर के मुख्य यौन अंग निम्न प्रकार से है :- गर्भाशय, अंडाशय, गर्भाशय ग्रीवा, डिंबवाहिनी और योनि।

स्त्री और पुरुषो के शरीर के अंगो में क्या अंतर है ?

स्त्री और पुरुषो के शरीर के अंगो में अधिकतर समानता होती है। हालांकि इनमे यौन अंगो में ही मुख्य अंतर होता है। मौलिक स्तर पर स्त्री और पुरुषों के शरीर में होने वाली अन्य क्रियायें जैसे श्वसन, उत्सर्जन, पाचन और अन्य क्रियाओं के लिए समान प्रकार के अंग होते है।

मनुष्य का लिंग निर्धारण कैसे होता है ?

मनुष्य का लिंग निर्धारण गुणसूत्र के आधार पर होता है। मनुष्य में पाए जाने कुल गुणसूत्रों की संख्या 46 होती है जो की 23 जोड़ी होते है। मनुष्य का 23 वां जोड़ी गुणसूत्र लिंग गुणसूत्र कहलाता है जो की मनुष्य का लिंग निर्धारण करता है। इस गुणसूत्र के मिलन के आधार पर ही तय होता है की पैदा होने वाली संतान लड़का होगा या लड़की।

स्त्रियों में लिंग गुणसूत्र क्या होता है ?

स्त्रियों में लिंग गुणसूत्र XX होता है जबकि पुरुषो के शरीर में यह XY होता है। XX गुणसूत्र मिलने पर लड़की जबकि XY गुणसूत्र मिलने पर लड़के का जन्म होता है। प्रत्येक मनुष्य में 23 जोड़ी गुणसूत्र होते है जिसमे 23वॉ गुणसूत्र लिंग गुणसूत्र कहलाता है।

गर्भाशय का क्या कार्य है ?

गर्भाशय को आम बोलचाल की भाषा में बच्चेदानी भी कहा जाता है। यह स्त्रियों के शरीर में योनि के भीतरी भाग में स्थित होता है और भ्रूण के विकास के लिए आवश्यक है। यहाँ भ्रूण का विकास होता है जिसके पोषण एवं उत्सर्जन के लिए गर्भाशय में प्लैसेंटा नाम का अंग होता है जो की भ्रूण को आवश्यक पोषण प्रदान करता है।

अंडाशय का क्या कार्य है ?

स्त्री शरीर में अंडाशय का कार्य अंडो का उत्पादन करना है जो की भ्रूण के विकास के लिये आवश्यक है। अंडे और शुक्राणु के मिलन से ही युग्मनज का निर्माण होता है।

अंडाणु और शुक्राणु का मिलन कहाँ होता है ?

अंडाणु और शुक्राणु का मिलन गर्भाशय के दोनों ओर स्थित डिंबवाही नलिका या डिंबवाहिनी में होता है। यहाँ से युग्मनज को गर्भाशय में भेज दिया जाता है जहाँ गर्भाशय का आगे का विकास होता है।

योनि को कितने भागों में बांटा जाता है ?

योनि को मुख्यत चार भागों मे बाँटा जाता है जो निम्न प्रकार से है :-मोनस प्यूबिस (Mons Pubis), लेबिया मेजोड़ा (Labia Majora), लेबिया मिनोरा (Labia Minora) एवं भगशेफ (Clitoris)

स्त्री शरीर में मुख्यता कौन-कौन से हार्मोन पाये जाते है ?

स्त्री शरीर में पाए जाने वाले हार्मोन मुख्यता निम्न प्रकार से है -एस्ट्रोजन (Estrogen), प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) एवं टेस्टरोन (Testosterone)

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