विश्व जनसंख्या दिवस पर निबंध 2022 | World Population Day, Speech, Slogans, Theme in Hindi

विश्व जनसंख्या दिवस : World Population Day हर साल 11 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन विश्व में बढ़ती जनसंख्या और उससे होने वाले प्रभावों को लेकर चर्चा करने से लेकर अनेक प्रोग्रामों का आयोजन किया जाता है। आज ही के दिन जनसंख्या से जुडी विभिन्न पहलुओं के बारे में जागरूकता लाने के लिए World Population Day को मनाया जाता है। जनसंख्या दिवस मनाने की शुरुआत सन 1987 में हुई थी। इस वर्ष यानी की वर्ष 2022 में 30वां विश्व जनसंख्या दिवस को आयोजित किया जाएगा। आज हम इस लेख के माध्यम से World Population Day 2022 के बारे में बात करेंगे।

विश्व जनसंख्या दिवस पर निबंध
विश्व जनसंख्या दिवस पर निबंध 2022 | World Population Day, Speech

विश्व जनसंख्या दिवस पर निबंध

World Population Day के जरिये विश्व में बढ़ रही जनसंख्या के बारे में जागरूकता लाने का प्रयास जारी है। जनसंख्या विस्फोट आज के समय में बहुत विकट समस्या है जब पूरे विश्व में जन संख्या को नियंत्रित करने के लिए कवायद शुरू है। बात करें अपने देश की तो ये समस्या हमारे लिए और भी गंभीर है। जिस प्रकार से हमारे देश में जनसंख्या बढ़ रही है, उस के हिसाब से तो जल्द ही हम सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश बन जाएंगे। बताते चलें कि वर्तमान में हमसे आगे सिर्फ चीन देश है। लेकिन अगर हमने जल्द ही इस बारे में गहन चिंतन के साथ जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए कुछ ठोस कदम नहीं उठाये तो हम देश के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश की सूची में सबसे आगे आ जाएंगे।

जनसंख्या विस्फोट क्या होता है ?

जनसंख्या का अर्थ हम ऐसे समझ सकते हैं – किसी निश्चित क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों की संख्या को ही जनसंख्या कहते हैं। यदि उसी क्षेत्र में जरुरत से अधिक लोग रहने लगे या उनकी जनसंख्या बहुत अधिक बढ़ जाए, तो उसे हम जनसंख्या विस्फोट कह सकते हैं। जनसंख्या विस्फोट को समझने के लिए आप को सिर्फ किसी क्षेत्र में इस बात पर ध्यान देना होगा कि वहां के नागरिकों को मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कहीं अधिक परेशान तो नहीं होना पड़ रहा। या वहां के युवाओं और लोगों में बेरोजगारी का सामना तो नहीं करना पड़ रहा, आदि ऐसे कई समस्याएं हैं, जिनसे आप ये समझ सकते हैं कि उस क्षेत्र में जनसंख्या जरुरत से ज्यादा है।

जनसंख्या विस्फोट का असर ये होता है कि उस क्षेत्र के लोगों को अपनी मूलभूत सुविधाओं और आवश्यकताओं के लिए सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इसके साथ ही बेरोजगारी, भुखमरी, गरीबी, निरक्षरता, लैंगिक असमानता और कम सुविधाएं आदि समस्याएं देखने को मिलती हैं।

क्यों मनाया जाता है विश्व जनसंख्या दिवस ?

World Population Day को मनाने के पीछे वजह (Objectives of World Population Day) ये है कि दुनिया में सभी देशों में खासकर उन देशों में जहाँ जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है, उन्हें जनसंख्या विस्फोट से होने वाली अनेकों परेशानियों के बारे में सजग करना हैबढ़ती जनसंख्या से विश्व जिस विकट स्थिति की ओर बढ़ रही है, उस बारे में सभी देशों को सचेत करने के उद्देश्य से ही इसकी शुरुआत की गयी थी। आज से कुछ वर्ष पूर्व सन 1987 में विश्व की जनसंख्या तकरीबन 5 अरब (11 जुलाई,1987) हुई थी , उस दिन की स्वीकृति के तौर पर 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में मनाया जाता है।

बात करें वर्तमान समय की तो इस वक्त पूरे विश्व में लगभग 7.9 बिलियन / अरब से भी अधिक लोग हैं, जो कि बहुत ही जल्द 8 बिलियन पर आने वाले हैं। जिनमे से सबसे अधिक जनसंख्या चीन और भारत में है। इन देशों में लगातार बढ़ रही जनसंख्या और उनसे संबंधित मुद्दे जैसे कि – परिवार नियोजन, लैंगिक समानता और पर्यावरणीय प्रभावों, मानवाधिकारों की चिंताओं आदि से जुड़े विभिन्न मुद्दों से संबंधित तथ्यों और जानकारियों पर इस दिन (विश्व जनसंख्या दिवस) ध्यान आकर्षित किया जाता है। साथ ही इसे नियंत्रित करने के लिए उपायों और तरीकों पर मंथन किया जाता है।

कैसे मनाया जाता है विश्व जनसंख्या दिवस (World Population Day)

विश्व जनसंख्या दिवस के दिन विश्व भर में अनेकों इवेंट (World Population Day Events) कराये जाते हैं। इन कार्यक्रमों में भाषण प्रतियोगिता, सेमिनार, वाद-विवाद प्रतियोगिता, सम्बन्धित विभिन्न कार्यशालाएं आदि उनके प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

भारत में जनसंख्या वृद्धि के कारण

हमारे देश में लगातार बढ़ती जनसंख्या के चलते बहुत से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जिसके पीछे देश की जरुरत से ज्यादा आबादी है। इस से देश का विकास भी बाधित हो रहा है। सरकार के जनसंख्या नियंत्रित करने के लिए नागरिकों को प्रेरित करने के प्रयास भी बहुत ज्यादा सफल होते नहीं दिख रहे। और आये दिन जनसंख्या में वृद्धि हो रही है। इसके पीछे देश में अन्धविश्वास और साक्षरता की कमी को जिम्मेदार मान सकते हैं। हम देश में ये मानने वाली सोच को जिम्मेदार मान सकते हैं जो कहती है कि –

  • जितने ज्यादा बच्चे होंगे उतने ही ज्यादा कमाने वाले होंगे।
  • बच्चे ईश्वर की देन हैं।
  • बेटा घर का कुलदीपक है और इसी सोच के लिए बेटे की चाह में जन्म देते रहना।

इनके अतिरक्त भी बहुत से कारण हैं जैसे की-

  • कम उम्र में शादी करवा देना।
  • परिवार नियोजन जैसे वीसहयों पर जागरूकता की कमी
  • असाक्षर होना
  • किशोरियों और महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता की कमी।

जो लोग आज भी ऐसी सोच रखते हैं उन्हें ये समझना होगा कि सिर्फ घर में बहुत ज्यादा सदस्य होने से ही घर में इनकम नहीं बढ़ेगी। बल्कि इससे सभी के लिए भरण पोषण हेतु भी समस्या उत्पन्न हो जाएगी । जनसँख्या के अनुसार हर किसी के लिए संसाधन जुटाना भी उतना ही मुश्किल है। क्यूंकि देश में उपलब्ध संसाधनों का इतनी मात्रा में होना जरुरी भी नहीं है। ऐसे में एक समय के बाद सभी के लिए इन संसाधनों में कमी होने लगेगी। इसलिये पहले ही जागरूक होना बेहतर है।

जनसंख्या विस्फोट से होने वाले नुकसान

विश्व में दिन प्रतिदिन बढ़ रही जनसंख्या में सबसे पहला नाम एशिया के देश चीन का है और फिर दूसरे नंबर पर हमारा देश भारत आता है। विकासशील देशों में जनसंख्या विस्फोट एक गहन चिंतन का विषय है। जनसंख्या में लगातार होने वाली बढ़ोतरी विकासशील देशों के विकास में घातक सिद्ध हो सकती है। आइये समझते हैं कैसे ?

  1. देश में अधिक जनसंख्या होने से संसाधन और सुविधाओं में कमी आ सकती है।
  2. बेरोजगारी की समस्या भी बढ़ेगी , हर किसी को उनकी योग्यतानुसार रोजगार मिलना मुश्किल हो जाता है। जैसे की वर्तमान में देख सकते हैं।
  3. आज विश्व में रोजाना सैकड़ों लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं और भोजन न मिलने से मृत्यु के ग्रास बन रहे हैं।
  4. वर्तमान में बढ़ती महंगाई भी जनसंख्या विस्फोट का ही एक परिणाम है। क्यूंकि संसाधनों की कमी हो रही है और इसे पाने के लिए सभी को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
  5. कई संसाधनों में जैसे कि खाद्य पदार्थों में मिलावट होना , और साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में कई चीजों की कमी होना भी बढ़ती जनसंख्या का ही असर है।
  6. देश में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर में आयी गिरावट भी अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ी हुई जनसंख्या का ही असर है , जिसे अब सरकार बेहतर बनाने के लिए हर प्रयास कर रही है।
  7. पर्यावरण पर इसका प्रत्यक्ष प्रभाव दिख रहा है। ग्लोबल वार्मिंग , असमय मौसम , प्राकृतिक आपदाएं आदि इसक प्रमाण हैं।
  8. पीने का पानी , हवा और भूमि आदि प्रदूषित हो चुके हैं। ये सब जनसंख्या विस्फोट का असर है।

कैसे नियंत्रित कर सकते हैं जनसंख्या ?

बढ़ती जनसंख्या से हुए नुकसान को अब नियंत्रित करने का बहुत ही महत्वपूर्ण समय है। यदि अभी भी लोग जागरूक नहीं हुए तो उन्हें जल्द ही इसका बहुत बड़ा खामियाजा चुकाना पड़ सकता है। जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए सभी को ये समझना होगा कि ये काम सरकार का नहीं बल्कि हर उस व्यक्ति का है जो इस देश में रह रहा है। सभी के प्रयासों और समझदारी से ही हम जनसंख्या विस्फोट से उत्पन्न होने वाली समस्या से निजात पा सकेंगे।

  • देश में परिवार नियोजन से सम्बंधित विषयों पर लोगों में जागरूकता बढ़ाना।
  • बालिकाओ को भी शिक्षित करना।
  • कम उम्र में शादी से होने वाले स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभाव के बारे में जागरूकता लाना।
  • जनसंख्या विस्फोट से होने वाली समस्याओं और उनका प्रत्येक व्यक्ति पर पड़ने वाले प्रभाव के प्रति उन्हें सचेत करना और साथ ही उन्हें समझाना कि कैसे वो अपने स्तर पर इसमें भाग ले सकते हैं और अपने लिए कुछ बेहतर कर सकते हैं।
  • बाल विवाह और कम उम्र में गर्भधारण से होने वाली स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्रदान करके भी इससे निजात पायी जा सकती है।
  • विश्व जनसंख्या दिवस के जरिये देश भर में जागरूकता फैलाई जा सकती है। इस दिन सभी लोगों को संबंधित कार्यक्रमों में शामिल होना चाहिए।

विश्व जनसंख्या दिवस की थीम (Theme For World Population Day 2022)

हर साल यूनाइटेड नेशन विश्व जनसंख्या दिवस के लिए एक थीम (Theme For World Population Day 2022) का निर्धारण करता है। इसी थीम के आधार पर विश्व भर में विश्व जनसंख्या दिवस पर अनेकों कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसका उद्देश्य आज के दिन का उपयोग करते हुए सभी लोगों का ध्यान बढ़ती जनसंख्या से होने वाले नुकसानों और इसके बुरे प्रभावों के बारे में चर्चा करना है। इसके साथ ही अन्य संबंधित मुद्दों पर भी विचार विमर्श करना और लोगों का ध्यान इस ओर खींचना है। प्रत्येक वर्ष की तरह ही इस बार भी यूनाइटेड नेशन द्वारा एक थीम दी गयी है। आगे हम अभी तक के पिछले कुछ वर्षों में मिले थीम के बारे में बताने जा रहे हैं –

  • वर्ष 2022 के विश्व जनसंख्या दिवस हेतु थीम : “8 बिलियन की दुनिया: सभी के लिए एक लचीला भविष्य की ओर – अवसरों का दोहन और सभी के लिए अधिकार और विकल्प सुनिश्चित करना” (A world of 8 billion: Towards a resilient future for all – Harnessing opportunities and ensuring rights and choices for all)
  • वर्ष 2021 के लिए : अधिकार और विकल्प जवाब हैं: चाहे बेबी बूम या बस्ट, प्रजनन दर को स्थानांतरित करने का समाधान सभी लोगों के प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों को प्राथमिकता देने में निहित है। Rights and choices are the answer: Whether baby boom or bust, the solution to shifting fertility rates lies in prioritizing the reproductive health and rights of all people .
  • वर्ष 2020 के लिए : महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और अधिकारों की रक्षा कैसे की जाए और कोविड-19 पर ब्रेक लगाया जाए।( how to safeguard the health and rights of women and girls now and putting the brakes on COVID-19)

विश्व जनसंख्या दिवस के स्लोगन

पृथ्वी पर बढ़ती आबादी का बोझ ना डालो,
इसके परिणामों से बच जाओगे यह वहम ना पालो।

जनसंख्या विस्फोट से विनाश आएगा,
और सबकुछ अपने साथ ले जाएगा।

विश्व को बढ़ती आबादी की समस्या के प्रति जगाना है,
दुनिया भर में तरक्की का यह संदेश फैलाना है।

बढ़ती आबादी एक दिन बनेगी बर्बादी का कारण,
जनसंख्या नियंत्रण करके करो इसका निवारण।

बच्चों को ईश्वर का उपहार ना बताओ,
आबादी को बढ़ाकर प्रकृति का उपहास ना उड़ाओ।

यदि हमने जनसंख्या नियंत्रण का उपाय नही किया,
तो पृथ्वी पर जीवन का विनाश होने से कोई नही रोक पायेगा।

जब जनसँख्या पर लगाम होगा,
तभी तो पुरे विश्व में भारत का नाम होगा।

सरकार द्वारा देश में जनसंख्या कम करने के लिए नागरिकों में जागरूकता फैलाने के लिए बहुत से प्रयास किये जाते हैं लेकिन वो किस हद तक सफल होते हैं ये नागरिकों पर निर्भर करता है। ये मुद्दा सिर्फ सरकार के लिए सोचने के लिए नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक को अपने स्तर पर चिंतन करने का है। जब सभी लोग इस बारे में जागरूक हो जाएंगे तब बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण करना बहुत आसान हो जाएगा।

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