उपसर्ग, प्रत्यय एवं समास किसे कहते हैं परिभाषा, भेद व उदाहरण – Upsarg Pratyay aur Samas in Hindi

संस्कृत के तत्सम शब्दों से तद्भव शब्दों से हिन्दी की शब्द सम्पदा में वृद्धि हुई। इसी प्रकार जन साधारण के भाषिक व्यवहार यानि बोलचाल की भाषा में भी अनेक देशज शब्द हिन्दी भाषा की सम्पत्ति बने। अनेक विदेशी भाषाओं के शब्द भी हिन्दी में घुलमिल गए। यद्यपि इनका व्यवहार सामान्य बोलचाल की भाषा तक सीमित है। हिन्दी भाषा की समृद्धि के लिए उसे आधुनिक प्रौद्योगिकी तथा तकनीकी युग के लिए अधिक से अधिक सक्षम बनाने के लिए नए-नए पारिभाषिक शब्दों की आवश्यकता पड़ती है। संविधान में हिन्दी के राजभाषा बनने के बाद नए शब्दों की रचना अपरिहार्य हो गयी है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन तकनीकी शब्दावली आयोग ने मानक हिन्दी की शब्द सम्पदा में हजारों नए शब्दों की रचना करके महत्वपूर्ण समृद्धि की है। शब्द-रचना के तत्व और उनके द्वारा शब्द-रचना पद्धति के बारे में हम आगे विस्तार से अध्ययन करेगें। इस लेख में हम कुछ उदाहरणों के साथ बताएंगे की उपसर्ग, प्रत्यय एवं समास किसे कहते हैं (Upsarg Pratyay samas in Hindi) क्या है

हिन्दी में निम्नलिखित तत्वों की सहायता से शब्द-रचना की जाती है।

  1. उपसर्ग
  2. प्रत्यय
  3. समास

आगे जानें उपसर्ग, प्रत्यय एवं समास किसे कहते हैं।

उपसर्ग, प्रत्यय एवं समास - Upsarg Pratyay aur Samas in Hindi
उपसर्ग, प्रत्यय एवं समास – Upsarg Pratyay aur Samas in Hindi

उपसर्ग किसे कहते हैं

उपसर्ग उस शब्दांश को कहते हैं जो किसी शब्द के पहले लगकर एक नए शब्द की रचना करता है और मूल शब्द के अर्थ को व्यक्त करता है। जैसे ‘मान’ शब्द में अभि’ उपसर्ग लगाने पर एक नया शब्द ‘अभिमान’ बना। मान रूठने के अर्थ में जबकि ‘अभिमान’ घमण्ड के अर्थ में प्रयुक्त होता है। इस तरह आपने देखा कि उपसर्ग लगाने से बने नए शब्द का अर्थ भी मूल शब्द से भिन्न हो जाता है। शब्द-रचना में उपसर्ग की उपयोगिता महत्वपूर्ण है। उपसर्ग के प्रयोग में दो बातें ध्यान देने योग्य हैं। पहली बात, उपसर्ग का स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता। वे शब्दों के साथ लगाकर ही अपने विशिष्ट अर्थ का बोध कराते हैं। दूसरी बात, उपसर्ग सदैव शब्द के पहले लगाए जाते हैं।

हिन्दी मे तीन प्रकार के उपसर्गों से शब्द-रचना होती है।

  1. तत्सम उपसर्ग
  2. तद्भव उपसर्ग
  3. विदेशी उपसर्ग

तत्सम उपसर्ग तथा उदाहरण

हिन्दी में संस्कृत तत्सम शब्दों की प्रचुरता है, अतः तत्सम उपसर्गों की संख्या भी अधिक होना स्वभाविक है।और उनकी सहायता से बने तत्सम शब्दों के कुछ उदाहरण नीचे देखे जा सकते हैं।

उपसर्गउपसर्ग से बने शब्द
अतिअतिरिक्त, अत्यंत अतिशय, अत्याचार, अतिक्रमण
अघिअधिकार, अध्यात्म, अध्यक्ष, अधिकरण
अनु अनुजा, अनुवाद, अनुशासन, अनुपात, अनुज, अनुकूल
अपअपवाद, अपमान, अपराध, अपभ्रंश, अपव्यय, अपहरण
अभिअभिमान, अभियंता, अभ्यास, अभिनव, अभियोग
अवअवस्था अवगत अवज्ञा, अवतार, अवसान
आकाश, आकर्षण, आदान, आचरण, आमुख
उत्/ उद्उत्तम, उत्कंठा, उद्यम, उत्थान, उत्कर्ष, उद्धत
उपउपासना, उपस्थित, उपकार, उपनिवेश, उपदेश
दुर्/दुस्दुर्दशा, दुराचार, दुर्गुण, दुष्कर्म, दुर्लभ
निनिर्देशन, निकृष्ट, निवास, नियुक्ति, निबन्ध
निर्/निस्निर्भय, निर्दोष, निश्छल, निवास, निर्मल
परापराजय, पराभव, परिधि, परिजन, परिक्रमा
प्रप्रकाश, प्रश्न प्रयास, प्रपंच, प्रसन्न प्रसिद्धि
प्रतिप्रतिक्षण, प्रतिकार, प्रतिमान, प्रत्यक्ष प्रतिवादी
विविकास, विशेष, विज्ञान, विधवा, विनाश, विभिन्न
सम्संसार, सम्मुख, संग्राम, संकल्प, संयोग, संस्कृत, संस्कार,
अपरअपराह्न
अन्यअन्यत्र, अन्योक्ति, अन्यतम
चिरचिरंजीव, चिरायु, चिरकाल
पुरापुरातत्त्व, पुरातन, पुराविद्
यथायथासम्भव, यथाशक्ति, यथासमय
बहिःबहिष्कार, बहिर्मुख, बहिर्गामी, बहिरंग
सतसत्कार, सत्कार्य, सद्गति, सज्जन
स्वस्वभाव, स्वतंत्र स्वदेश, स्वस्थ
स. सहसहयात्री, सहकारिता, सहकार, सहगामी
नास्तिक, नपुसंक, नक्षत्र
अग्रअग्रणी, अग्रज, अग्रसर, अग्रगामी

तद्भव उपसर्ग तथा उदाहरण

तद्भव उपसर्ग से बने शब्द प्रायः जनसामान्य की बोलचाल की भाषा से प्रयुक्त होते हैं। इनके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं

उपसर्गउपसर्ग से बने शब्द
आ/अनअमोल, अथाह, अनपढ़, अनमोल, अनजान
अधअधजला, अधपका, अधमरा, अधखिला
उनउन्नीस, उनचास, उजाड़, उचक्का, उजड्ड
औगुन, औघट
दुदुबला, दुकाल
निनिडर, निकम्मा, निहत्था, निखरा
बिनबिनव्याहा, बिनदेखा, बिनखाया, बिनबोया
भरभरपेट, भरसक, भरमार, भरपूर
क/कुकपूत, कुढंग, कुघड़ी
स/ सुसपूत, सरस, सुडौल, सुजान, सजग

विदेशी उपसर्ग तथा उदाहरण

हिन्दी ने अरबी-फारसी शब्दों के साथ उनके उपसर्ग भी ग्रहण किए है। इनके कुछ उदाहरण देखें.

उपसर्गउपसर्ग से बने शब्द
अलअलबत्ता
कमकमजोर, कमसिन, कमख्याली
खुशखुशदिल, खुशमिजाज, खुशबू, खुशहाल
गैरगैरहाजिर, गैरकानूनी, गैरवाजिब
दरदरकिनार, दरमियान, दरख्वास्त
नानापसन्द नाराज, नालायक, नासमझ नामुमकिन
बदबदनाम बदबू, बदमाश, बदतमीज
बरबरखास्त, बरदाश्त
बिलाबिलावजह
बेबेअदब, बेईमान, बेईज्जत, बेरहम, बेकसूर
लालाइलाज, जालवाब, लापरवाह, लापता
हमहमसफर, हमदर्दी, हमपेशा, हमउम्र, हमराह
सरसरकार, सरताज, सरपंच, सरहद, सरदार
बदौलत बनाम
अलअलबत्ता
बिलबिल्कुल
बाबाकायदा

इसके अतिरिक्त हिन्दी में अंग्रेजी उपसर्ग से बने शब्द भी काफी प्रचलित हैं।

प्रत्यय किसे कहते हैं

मूल शब्द के अंत में लगने वाले शब्दांश को ‘प्रत्यय’ कहते हैं। उपसर्ग की तरह प्रत्यय भी शब्द के अंत में जुड़कर नए शब्द की रचना करते हैं। दोनों में अन्तर सिर्फ इतना है कि उपसर्ग मूल शब्द के पहले लगता है और प्रत्यय मूल शब्द के बाद में।

प्रत्यय दो प्रकार के होते हैं –

  1. कृत प्रत्यय
  2. तद्धित प्रत्यय

कृत प्रत्यय

क्रिया या धातु के अंत में लगने वाले प्रत्यय कृत प्रत्यय कहलाते हैं और इनके मेल से बने शब्द को ‘कृदन्त’ कहते हैं। जैसे- गाना (क्रिया) में ‘हार’ प्रत्यय लगाने से ‘गावनहार’ शब्द बनता है। यहाँ आपने देखा कि कृत प्रत्यय क्रिया या धातु में लगकर उसे बिल्कुल नया रूप और नया अर्थ देते हैं।

कृत प्रत्यय से हिन्दी में भाववाचक, करणवाचक, और कर्तवाचक संज्ञाएं तथा विशेषण बनते हैं। ये सभी संज्ञा विशेषण तद्भव शब्दों में होती हैं। इनके कुछ उदाहरण नीचे देखे जा सकते हैं

भाववाचक संज्ञाएं

धातुप्रत्ययसंज्ञा
भिड़/लड़ / उठअन्त/आई/आनभिड़न्त / लड़ाई/उठान
पूज/भूल/चिल्लआपा/आवा/आहटपुजापा/भुलावा/चिल्लाहट
बोल/चाटई/नीबोली/चटनी
समझ/मानऔता/औतीसमझौता/मनौती
खिंचआव खिंचाव

कारणवाचक संज्ञाएं

धातुप्रत्ययसंज्ञा
झूल/मथआ/ आनीझूला/मथानी
रेत/झाड़ई/ऊरेती/झाडू
कसऔटीकसौटी
बेल बेलन

कृर्तृवाचक विशेषण

धातुप्रत्ययसंज्ञा
टिकआऊटिकाऊ
तैर/ लड़आक/आकातैराक/लड़ाका
खेल / झगड़ाआड़ी/आलूखिलाड़ी/झगड़ालू
बढ़/ अढ़इया /इयलबढ़िया / अड़ियल
लड़ ऐतलड़ैत
हँस / भागओड़/ ओड़ाहँसोड़ / भगोड़ा
पीअक्कड़पियक्कड़
मिलसारमिलनसार
रो/रख हारा/हाररोवनहार/राखनहार

तत्सम कृत् प्रत्यय इस प्रकार हैं

धातुप्रत्ययसंज्ञा
कम्/वि/वन्दअ/आन/अनाकाम/विज्ञान/वन्दना
इष पूजा/गैआ/अकइच्छा/पूजा/गायक
तन्/ भिक्षुउ/उकतनु/भिक्षुक
त्यजत्यागी
विद्मानविद्यमान
कृतव्यकर्तव्य
दृश/पूजअनीय/उपनीयदर्शनीय / पूजनीय

विदेशी कृत् प्रत्यर्यो में फारसी के प्रचलित उदाहरणों को देखा जा सकता है –

धातुप्रत्ययकृदन्तशब्द
आमदन (आना)आमदनी
रिह (छूटना)रिहा
जी (जीना)इन्दाजिन्दा
बाश (रहना)इन्दाबाशिन्दा
चस्प (चिपकना)आँचस्पाँ

तद्धत प्रत्यय

तद्धत प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम, और विशेषण शब्दों के अन्त में लगते हैं। अर्थात संज्ञा, सर्वनाम, और विशेषण के अन्त में लगने वाले शब्दांश को तद्धत प्रत्यय कहते हैं। इनके मेल से बने शब्द को ‘तद्धितान्त’ कहते हैं। जैसे

मुनि (संज्ञा) अ (प्रत्यय) = मौन

अपना (सर्वनाम) पन (प्रत्यय) = अपनापन

अच्छा (विशेषण) आई (प्रत्यय) = अच्छाई

आपने देखा कि कृत प्रत्यय और तद्धित प्रत्यय में अन्तर केवल इतना है कि कृत प्रत्यय क्रिया या धातु के अन्त में लगते हैं जबकि तद्धित प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण के अन्त में। उपसर्ग की तरह तद्धित प्रत्यय भी संस्कृत, हिन्दी और विदेशी (उर्दू) से आकर क्रमश: तत्सम, तद्भव, और विदेशी शब्द-रचना में सहायक हुए हैं। आगे आप सोदाहरण इसका अध्ययन करेगें।

संस्कृत के तद्धित प्रत्यय इनके उदाहरण इस प्रकार हैं

संज्ञा/विशेषणप्रत्ययशब्द
कुरू/मुनिकौरव/मीन
शिक्षा/रामअक/आयनशिक्षक/रामायन
वर्ष/पुष्प/रक्तइक/इत/इमवार्षिक /पुष्पित/ रक्तिम
क्षत्र/बलइय/इष्टक्षत्रिय/बलिष्ठ
कुल/पक्षईन/ईकुलीन/पक्षी
अंश/पश्चतः / त्यअंशत: / पाश्चात्य
दिति/वत्स/दयाय/ल/ लुदैत्य/वत्सल/दयालु
माया वीमायावी

इसी तरह तद्धित प्रत्यय से अनेक प्रकार की संज्ञा शब्दों और विशेषण शब्दों की रचना हम निम्नलिखित उदाहरणों से समझ सकते हैं से

  1. जातिवाचक संज्ञा से भाववाचक संज्ञा शब्द
जातिवाचक संज्ञाप्रत्ययभाववाचक संज्ञा
मित्र/शत्रु / प्रभुतामित्रता/शत्रुता /प्रभुता
गुरू / मनुष्य / पुरुषत्वगुरुत्व/ मनुष्यत्व /पुरुषत्व
पण्डितपाण्डित्य
मुनिमौन
  1. नामवाचक संज्ञा से अपत्यवाचक संज्ञा शब्द
व्यक्तिवाचक संज्ञाप्रत्ययअपत्यवाचक संज्ञा
मनु/कुरु/पाण्डु/वसुदेवमानव / कौरव/पाण्डव/वासुदेव
राधा/ कुन्तीएयराधेय/ कौन्तेय
दितिदैत्य
  1. विशेषण से भाववाचक संज्ञा शब्द
विशेषणप्रत्यय भाववाचक संज्ञा
बुद्धिमान/मूर्ख/शिष्टताबद्धिमत्ता/मूर्खता/शिष्टता
वीर/लघुत्ववीरत्व/लघुत्व
गुरु लघुगौरव / लाघव
  1. संज्ञा से विशेषण शब्द
संज्ञाप्रत्यय विशेषण
तालु/ग्रामतालव्य/ग्राम्य
मुख/लोकइकमौखिक/लौकिक
आनन्द / फलइतआनन्दित / फलित
बल/कर्मइष्ठ/निष्ठबलिष्ठ कर्मनिष्ठ
मुख / मधुमुखर/मधुर
ग्राम/राष्ट्रईन/ ईयग्रामीण/राष्ट्रीय

अब तक आपने तत्सम प्रत्यय से बने विविध प्रकार के शब्दों से परिचय प्राप्त किया। आगे हम तद्भव और विदेशी तद्धित प्रत्ययों द्वारा शब्द रचना के उदाहरण प्रस्तुत करेगें।

हिन्दी तद्धित प्रत्यय – हिन्दी के सभी तद्धित प्रत्यय तद्भव रूप में है। अतः इनसे बनने वाले शब्द भी तद्भव हैं। ठीक उसी प्रकार जैसे तत्सम प्रत्यय का प्रयोग तत्सम शब्द रचना के लिए ही होता है। संज्ञा-विशेषण में तद्धित प्रत्यय लगाकर हिन्दी के भाववावचक संज्ञा शब्द बनाने के लिए निम्नलिखित उदाहरणों को ध्यान से देखें –

संज्ञा/ विशेषणप्रत्ययभाववाचक संज्ञा शब्द
चतुर/चौड़ाआईचतुराई/चौड़ाई
मीठा/छूट/ कड़वाआस/आरा//आहटमिठास /छुटकारा/कड़वाहट
रंग / कम / बापत/ती/ओतीरंगत/कमती बपौती

इसी प्रकार संज्ञा से विशेषण बनाने के लिए तद्धित प्रत्यय प्रयुक्त होते हैं

संज्ञाप्रत्ययविशेषण
भूखभूखा
देहात / रंगई/ईलादेहाती/रंगीला
चाचा/भाँग / खपराएरा/एडी/ऐलचचेरा/भँगेड़ी/खपरैल
भूत/छूत/सोनाह/हर हराभुतहा छुतहर/सुनहरा

तद्धित प्रत्यय द्वारा तद्भव शब्द रचना के अन्य उदाहरण भी देखे जा सकते हैं

संज्ञाप्रत्ययतद्भव शब्द
ससुर/नाना/सोनाआल/हाल/आरससुराल/ननिहाल/सुनार
मामा/नाकएरा/एलममेरा / नकेल
आढ़त/तेलइया/ईअदतिया / तेली
चोर/बाछाटा/ड़चौट्टा/बछड़ा

विदेशी तद्धित प्रत्यय – हिन्दी में फारसी तद्धित प्रत्ययों से बने कुछ प्रचलित शब्दों के उदाहरणों से विदेशी तद्धित प्रत्यय को भली-भाँति समझा जा सकता है।

मूल शब्दप्रत्ययतद्धितान्त शब्द
सफेद/जनआ/आनासफेदा / जनाना
ईरान/शौक /माहई/ईन / ईनाईरानी/शौकीन/महीना
पेश/मददकार/गारपेशकार/मददगार
दर्द / उम्मीदनाक/वारदर्दनाक / उम्मीदवार
बागईचबगीचा
गमगीनगमगीन
कलमदानकलमदान
घड़ी / नशासाज/बाजघड़ीसाज/नशाबाज
ईद/राहगाह/गीरईदगाह/राहगीर
दार/नारफौज / दरफौजदार/दरबार

इसी प्रकार अरबी तद्धित प्रत्यय से बने कुछ शब्दों को देखा जा सकता है जो हिन्दी में बोलचाल की भाषा में काफी प्रचलित हैं। जैसे

मूल शब्दप्रत्ययतद्धितान्त शब्द
जिस्म / रूहआनीजिस्मानी / रूहानी
इंसानइयतइंसानियत
बाबर (विश्वास)चीबावरची

आपने देखा कि उपसर्ग और प्रत्यय द्वारा कितने नए-नए शब्दों की रचना की जा सकती है। इस सन्दर्भ में यह भी ध्यान देने योग्य तथ्य है कि अनेक शब्द ऐसे हैं कि जिनकी रचना उपसर्ग और प्रत्यय दोनों की सहायता से होती है। इस प्रकार की शब्द-रचना के कुछ उदाहरण देख जा सकते हैं

उपसर्गमूल शब्दप्रत्ययशब्द रचना
अपमानइतअपमानित
लोकइकअलौकिक
अभिमानअभिमानी
उपकारउपकारक
परिपूर्णतापरिपूर्णता
दुस्साहसदुस्साहसी
बदचलनबदचलनी
निर्दयानिर्दयी
अनउदारताअनुदारता
अ+प्रतिआशाइतअप्रत्याशित

समास किसे कहते हैं

उपसर्ग और प्रत्यय की तरह समास भी शब्द-रचना में अत्यंत उपयोगी है। समास का अर्थ और उनके भेदों की जानकारी के बाद आप देखेंगे कि समास के द्वारा कैसे शब्द-रचना होती है। “समास’ शब्द दो शब्दों के मेल से बना है। सम्ऽआसा सम् का अर्थ है “संक्षिप्त और सुंदर तथा आस का अर्थ है ‘कथन’। इस प्रकार समास का अर्थ है संक्षिप्त और सुन्दर कथना दो या दो से अधिक शब्दों के बीच की विभक्ति हटाकर उन्हें मिलाकर संक्षिप्त शब्द बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं। समास से बना शब्द ‘सामासिक’ कहलाता है। जैसे- गृह में प्रवेश शब्द में ‘में’ विभक्ति हटाकर ‘गृह’ और ‘प्रवेश’ बचता है। इन दोनों को मिलाने ये ‘गृह प्रवेश’ सामासिक शब्द बना।

समास के कितने भेद हैं/समास कितने प्रकार के होते हैं?

समास के मुख्यतः चार भेद माने गए हैं- अव्ययीभाव, तत्पुरुष, बहुब्रहि और द्वन्द्व हिन्दी में कर्मधारय और द्विगु समास की गणना भी स्वतंत्र रूप में होती है। यद्यपि संस्कृत में ये दोनों समास तत्पुरुष समास के उपभेद के रूप में जाने जाते हैं।

इस प्रकार समास के छः भेद होते हैं जो निम्नलिखित इस प्रकार है–

  1. अव्ययीभाव समास
  2. तत्पुरुष समास
  3. कर्मधारय समास
  4. द्विगु समास 
  5. द्वंद समास
  6. बहुव्रीहि समास 

समास के विभिन्न भेद और उनसे होने वाली शब्द-रचना को हम विस्तार से देखेगें।

अव्ययीभाव समास :-

इस समास में संज्ञा, विशेषण अथवा अव्यय के साथ संज्ञा शब्द का प्रयोग होता है। संक्षेप में इसे निम्नलिखित रूप में समझा जा सकता है।

संज्ञा + संज्ञा = घर-घर, पल-पल, गाँव-गाँव
विशेषण + संज्ञा = हरदिन, हर दिन
अव्यय + संज्ञा = प्रतिदिन, यथाशक्ति, आजीवन

तत्पुरुष समास :-

इसमें दो शब्दों (पदों) में अन्तिम पद प्रधान होता है। जैसे – ‘राजा की कन्या’, ‘अकाल से पीड़ित’ में ‘कन्या’ और ‘पीड़ित’ पद प्रधान है क्योंकि वाक्य प्रयोग में लिंग और वचन का निर्धारण अन्तिम पद के अनुसार ही होगा। जैसे राजा की कन्या आ रही है।

जनता अकाल से पीड़ित है। ‘राजा की कन्या’ और ‘अकाल से पीड़ित’ से विभक्ति ‘की’ और “से” को हटा देने से ‘राजकन्या’ और ‘अकाल पीड़ित’ सामासिक शब्द बनते हैं।

तत्पुरुष समास से शब्द-रचना का सूत्र है

संज्ञा + विभक्ति + संज्ञा = राजा का दरबार – राजदरबार

संज्ञा + विभक्ति + विशेषण = पुरुषों में उत्तम – पुरुषोत्तम

बहुब्रहि समास :-

इस समास में दो शब्दों का योग होने पर अपने समान्य अर्थ को छोड़कर विशेष अर्थ का बोध कराते हैं। जैसे- ‘लम्बोदर’ लम्बा उदर (पेट है जिसका अर्थात गणेश)। दशानन (दस मुख हैं जिसके) अर्थात रावण। इस प्रकार दो शब्द अपने सामान्य अर्थ से विशेष अर्थ प्रकट करते हैं।

चतुर्भुज, चतुर्मुख, चक्रपाणि, पीताम्बर, जितेन्द्रिय आदि बहुब्रहि समास के शब्द हैं।

द्वन्द्व समास :-

द्वन्द्व समास में दो शब्दों के बीच आने वाले और/या’ जैसे अव्यय हट जाते हैं और दोनों शब्द मिलकर एक हो जाते हैं। जैसे- भाई और बहन (भाई-बहन)। पाप या पुण्य (पाप-पुण्य)। भला-बुरा, देश-विदेश, रुपया-पैसा, खाना-पीना, नाक-कान, नर-नारी, भूखा-प्यासा आदि शब्द द्वष्द्व समास के उदाहरण हैं।

कर्मधारय समास :-

इस समास में दो शब्दों के बीच विशेषण और विशेष्य (संज्ञा) का अथवा उपमान और उपमेय का सम्बंध रहता है। जैसे –

विशेषण + विशेष्य = नीलकमल, नीलगाय
उपमेय + उपमान = चरणकाल, कमलनयन

परमेश्वर, सज्जन, महात्मा, शीतोष्ण, घनश्याम, महाकाव्य, सद्भावना, नवयुवक, महावीर आदि शब्द कर्मधारय समास के उदाहरण हैं।

द्विगु समास :-

द्विगु समास में दो शब्दों में पहला शब्द निश्चित संख्यावाचक विशेषण होता है और दूसरा शब्द संज्ञा। अर्थात संख्यावाचक विशेषण और संज्ञा से मिलकर द्विगु समास की रचना होती है। जैसे

दूसरा पहर = दोपहर

पाँच तत्वों का समूह = पंचतत्व

चौराहा = चार राहों वाला

नवरत्न, पंचपरमेश्वर, चौमासा, त्रिभुवन, तिमंजिला, सप्तक, अष्टपदी, सतसई, षडरस, नवग्रह त्रिपदी आदि द्विगु समास के उदाहरण हैं। इस प्रकार आपने देखा कि समास से किस तरह संक्षिर और सुन्दर शब्द-रचना होती है। इससे भाषा की शब्द-सम्पदा में वृद्धि होती है, साथ ही भाषा का अभिव्यक्ति सौन्दर्य भी बढ़ता है।

  1. उपसर्ग किसे कहते हैं ?

    उपसर्ग शब्द के उस अंश को कहते हैं जो किसी शब्द के पहले लगकर एक नए शब्द की रचना करता है और मूल शब्द के अर्थ को व्यक्त करता है। जैसे 'मान' शब्द में अभि’ उपसर्ग लगाने पर एक नया शब्द 'अभिमान' बना।

  2. उपसर्ग कितने प्रकार के होते हैं ?

    हिन्दी मे तीन प्रकार के उपसर्गों से शब्द-रचना होती है।
    तत्सम उपसर्ग
    तद्भव उपसर्ग
    विदेशी उपसर्ग

  3. समास किसे कहते हैं ?

    दो या दो से अधिक शब्द मिलकर जब एक नया उस से मिलता जुलता शब्द का निर्माण करते हैं वह समास कहलाता है।

  4. समास कितने प्रकार के होते हैं ?

    समास के मुख्यतः चार भेद माने गए हैं- अव्ययीभाव, तत्पुरुष, बहुब्रहि और द्वन्द्व। परन्तु हिन्दी में कर्मधारय और द्विगु समास की गणना भी स्वतंत्र रूप में होती है।

  5. प्रत्यय किसे कहते हैं ?

    मूल शब्द के अंत में लगने वाले शब्दांश को 'प्रत्यय' कहते हैं।
    प्रत्यय दो प्रकार के होते हैं –
    कृत प्रत्यय
    तद्धित प्रत्यय

  6. उपसर्ग और प्रत्यय में क्या अंतर है ?

    उपसर्ग की तरह प्रत्यय भी शब्द के अंत में जुड़कर नए शब्द की रचना करते हैं। दोनों में अन्तर सिर्फ इतना है कि उपसर्ग मूल शब्द के पहले लगता है और प्रत्यय मूल शब्द के बाद में।

Leave a Comment