पृथ्वीराज चौहान का इतिहास, कहानी, जीवन परिचय | Prithviraj Chauhan Biography Movie in Hindi

तो दोस्तों आप सभी यह तो जानते ही हैं की भारत के इतिहास में बहुत से वीर योद्धाओ थे। जिनकी गाथाये आज भी बहुत मशहूर है। आप यह होंगे की भारत को योद्धाओं की भूमि भी कहा जाता है। क्योंकि इस धरती पर बहुत से वीर योद्धाओं ने जन्म लिया है जिन्होंने अपने देश के लिए बहुत से मुग़ल शासकों के छक्के छुड़ा दिए थे। ऐसे ही एक योद्धा थे जिनका नाम था पृथ्वीराज चौहान। इनको पिथौरा के नाम से भी जाना जाता था। यह एक बहुत ही महान व वीर थे। इनके बारे में भारत के इतिहास में भी बताया है। पृथ्वीराज चौहान एक राजपूत घराने से थे। यह भी भारत के सबसे महान व वीर योद्धाओं में से ही एक है। इन्होने बहुत से शाशको की हालत खराब कर दी थी और उनको बहुत बार युद्ध में भी हराया है। माना यह भी जाता है की इन्होने अफगानी लुटेरा और शासक शिहाबुद्दीन मोहम्मद गौरी को युद्ध में 17 बार हराया था।

पृथ्वीराज चौहान का इतिहास, कहानी, जीवन परिचय
Prithviraj Chauhan Biography

तो दोस्तों क्या आप पृथ्वीराज चौहान के जीवन के बारे में जानते है। अगर नहीं तो आपको चिंता करने की कोई भी आवश्यकता नहीं है क्योंकि आज हम आप सभी को इस लेख के माध्यम से पृथ्वीराज चौहान के इतिहास, उनकी कहानी व उनका जीवन परिचय आदि जैसी जानकारी इस लेख में बताने वाले है। तो दोस्तों अगर आप भी इनके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो उसके लिए आपको हमारे इस लेख को अंत तक ध्यानपूर्वक पढ़ना होगा तब ही आप इनके बारे में जान सकोगे।

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पृथ्वीराज चौहान का जीवन परिचय | Biography of Prithviraj Chauhan

पृथ्वीराज चौहान का जन्म 1 जून, 1163 को हुआ था। इनका जन्म भारत के गुजरात राज्य के पाटण में हुआ था। पृथ्वीराज चौहान को पिथौरा नाम से भी जाना जाता था। इनके पिता का नाम राजा सोमेश्वर चौहान था और इनकी माता का नाम रानी कर्पूरादेवी था यह अपने माता पिता की पहली संतान थे। इनका जन्म उनके माता पिता के विवाह के करीब 12 वर्ष बाद हुआ था। पृथ्वीराज सिंह चौहान जी की 13 रनिया थी। जिनका नाम (रानी संयोगिता, जंभावती, पड़िहारी, पंवारी, इच्छनी, दाहिया, जालंधरी, गुजरी, बड़गुजरी, यादवी, यादवी, पद्मावती, शशिव्रता, पुड़ीरानी) था। इनके पुत्र का नाम गोविन्द राजा था। पिथौरा के छोटे भाई का नाम हरिराज था और इनकी छोटी बहन का नाम पृथा था।

जिस समय पृथ्वीराज सिंह चौहान जी का जन्म हुआ उसके पश्चात ही कई लोगो ने इनकी मृत्यु करने के लिए बहुत से षड़यंत्र रचे थे परन्तु कोई इनका कुछ न बिगाड़ सका। जिस समय पिथौरा 11 वर्ष के थे उस समय इनके पिता की मृत्यु हो गयी थी। अपने पिता की मृत्यु के बाद इन्होने केवल 11 वर्ष में ही इन्होने अपने पिता का राज काज संभाला। पिता की मित्यु के पश्चात इन्हे उत्तराधिकारी के रूप में अजमेर की राज गद्दी पर बिठाया गया था। इन्होने एक राजा होने का दायित्व बहुत ही बेहतर तरीके से निभाया। जब यह राजा बने तब इन्होने देश के बहुत से राजाओं को हराया और अपना साम्राज्य बड़ा किया।

नाम पृथ्वीराज सिंह चौहान
पिता का नाम राजा सोमेश्वर चौहान
माता का नाम रानी कर्पूरादेवी
जन्म तिथि 1 जून, 1163
जन्म स्थान भारत के गुजरात राज्य के पाटण में
पत्नी इनकी 13 पत्निया थी (रानी संयोगिता, जंभावती, पड़िहारी, पंवारी, इच्छनी, दाहिया, जालंधरी, गुजरी, बड़गुजरी, यादवी, यादवी, पद्मावती, शशिव्रता, पुड़ीरानी )
भाई व बहन इनका एक छोटा भाई जिसका नाम हरिराज था और इनकी एक छोटी बहन भी थी जिनका नाम पृथा था।
पुत्र का नाम गोविन्द राजा
वंश चौहान वंश
धर्म हिन्दू धर्म
मृत्यु तिथि 11 मार्च 1192
मृत्यु स्थान अजमेर , राजस्थान
पृथ्वीराज चौहान का जीवन परिचय

Prithviraj Chauhan के मित्र

पृथ्वीराज सिंह चौहान के बचपन के समय में उनके एक मित्र थे जिनका नाम चंदरबाई था। चनदरबाई और पृथ्वीराज दोनों ही एक दूसरे के बहुत प्रिय मित्र थे। बल्कि पृथ्वीराज तो चनदरबाई को अपने भाई के समान मानते थे। चंदरबाई तोमर वंश के थे। चंदरबाई अनंगपाल के बेटी के पुत्र थे। अआप्को यह भी बता दे की अनंगपाल भी एक शाशक ही थे। उसके बाद चनदरबाई दिल्ली के शाशक बन गए थे। उसके बाद पृथ्वीराज और चंदरबाई ने मिलकर एक जगह का निर्माण किया और उन्होंने उस जगह को पिथौरागढ़ नाम दिया। इनके द्वारा बनाया गया यह पिथौरागढ़ आज भी दिल्ली में है इसको आज के समय में इस जगह को पुराने किले के नाम से जाना जाता है।

पृथ्वीराज चौहान का दिल्ली पर उत्तराधिकार | Succession of Prithviraj Chauhan to Delhi

तो दोस्तों आप सभी को हम अब यह बताने वाले है की पृथ्वीराज सिंह चौहान दिल्ली के उत्तराधिकारी कैसे बने। पृथ्वीराज सिंह चौहान की माता जिनका नाम कर्पूरादेवी था। उनके पिता का नाम अंगपाल था। और रानी कर्पूरादेवी अपने पिता अंगपाल की एकलौती संतान थी। इसलिए वह यह सोचते थे की उनके राज्य का उत्तराधिकारी कौन होगा। फिर उसके बाद जब कर्पूरादेवी की शादी के बाद जब पृथ्वीराज सिंह का जन्म हुआ तब कर्पूरादेवी के पिता यानि के अंगपाल ने अपनी बेटी के बेटे को यानि के अपने दोहित्र को अपनी मृत्यु के बाद अपना उत्तराधिकारी बनाने के लिए कहा इस बात के लिए कर्पूरादेवी और उनके पति सोमेश्वर सिंह दोनों ने हामी भरदी।

फिर उसके बाद राजा अंगपाल ने पृथ्वीराज चौहान को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। उसके बाद सन 1166 में कर्पूरादेवी के पिता यानि के राजा अंगपाल की मृत्यु हो गयी। उनकी मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारी यानि के पृथ्वीराज चौहान का राज्य अभिषेक किया गया और उनको दिल्ली की राजगद्दी को सौंप दी गयी। इसी प्रकार से पृथ्वीराज चौहान का दिल्ली पर उत्तराधिकार बना था।

पृथ्वीराज सिंह चौहान और रानी संयोगिता की कहानी | Story of Prithviraj Singh Chauhan and Rani Sanyogita

आज के समय में भी पृथ्वीराज चौहान और रानी संयोगिता की प्रेम कहानी आज भी राजस्थान मे बहुत मशहूर है। माना यह भी जाता है की यह दोनों एक दूसरे की तस्वीर देखने मात्रा से ही इन दोनों को एक दूसरे से प्रेम करने लगे थे। आज भी इन दोनों के प्रेम की गाथा राजस्थान के इतिहास में दर्ज है। इन दोनों की कहानी बहुत अलग थी यह दोनों एक दूसरे से कभी मिले भी नहीं थे इन्होने केवल एक दूसरे की तस्वीरें देखि थी इनको उसी से ही प्रेम हो गया था। संयोगिता के पिता का नाम जयचंद्र था। जयचंद्र पृथ्वीराज को बिलकुल भी पसंद नहीं करते थे, अपनी पुत्री का विवाह पृथ्वीराज के साथ करवाने के बारे में तो वह सोच भी नहीं सकते थे।

क्योंकि जयचंद्र पृथ्वीराज से नफरत करते थे इसलिए वह यह सोचते रहते थे की पृथ्वीराज को किस प्रकार नीचा दिखाया जाये। उसके लिए उन्होंने अपनी पुत्री के लिए स्वयंवर का आयोजन किया और उस स्वयंवर में जयचंद्र ने सभी राज्यों के राजाओं के बुलाया था परन्तु उन्होंने जानबूझ कर पृथ्वीराज को उस स्वयंवर में नहीं बुलाया था ताकि वह पृथ्वी को नीचा दिखा सके। केवल यह ही नहीं उन्होंने पृथ्वीराज को और भी अधिक नीचा दिखने के लिए उन्होंने अपने द्वारपाल की जगह पर पृथ्वीराज की मूर्ती लगवा दी थी। परन्तु यह सब देखकर संयोगिता बिलकुल भी प्रसन्न न थी। वह पृथ्वीराज के साथ ही विवाह करना चाहती थी। इसलिए उसी स्वयंवर के दौरान पृथ्वीराज उस स्वयंवर में जा पहुंचे।

उस स्वयंवर में पृथ्वीराज ने भरी सभा के सामने संयोगिता का अपहरण कर लिया था। परन्तु कोई भी उन्हें रोक न पाया। अपहरण करने के बाद पृथ्वीराज संयोगिता को दिल्ली लेकर आ गए थे और दिल्ली में इन्होने सभी रीति रिवाज के साथ इन दोनों ने एक दूसरे के साथ विवाह कर लिया था। उन दोनों की शादी के बाद संयोगिता के पिता जयचंद्र पृथ्वीराज से और भी अधिक नफरत करने लगे और उनके बीच में और भी अधिक दुश्मनी हो गयी।

Prithviraj Chauhan’s की विशाल सेना

पृथ्वीराज सिंह चौहान ने बहुत से युद्ध जीते थे जिसके पीछे उनकी वीरता का प्रमाण और उनकी विशाल सेना थी। माना जाता है की पृत्वीराज चौहान के पास बहुत ही बड़ी सेना थी। उनकी सेना में करीब 3000 हाथी और करीब 3 लाख सैनिक और करीब 2000 घुड़सवार थे। पृथ्वीराज ने अपनी सेना की मदद से ही बहुत से युद्ध जीते थे और उसी की वजह से उनका साम्राज्य बड़ा होता गया था। माना यह भी जाता की इसी सेना के कारण पृथ्वी राज ने मोहम्मद गौरी को 17 बार युद्ध में हराया था।

पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी का प्रथम युद्ध | Prithviraj Chauhan and Mohammad Gauri first war

आपको यह बता दे की पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच हुए पहले युद्ध को तराइन युद्ध के नाम से भी जाना जाता है। यह युद्ध 1190 ईस्वी से 1191 ईस्वी तक हुआ था। इस युद्ध के दौरान मोहम्मद गौरी ने ने तबर-ए-हिन्द (आज के समय में इसको भटिंडा कहा जाता है) इस जगह पर उस समय मोहम्मद गौरी ने कब्ज़ा करने के लिए उसने यहाँ पर हमला कर दिया था। परन्तु उस समय इस जगह पर जियाउद्दीन तुल्क का राज था। उसके बाद इस आक्रमण के बारे पृथ्वीराज को खबर हो गयी जिसके बाद पृथ्वीराज और उनके पुत्र गोविंदराजा जियाउद्दीन के पास पहुंच गए और उन्होंने उस युद्ध में जियाउद्दीन की सहायता की।

इस युद्ध के दौरान पृथ्वीराज और मोहम्मद गौरी के बीच में आमना सामना भी हुआ और इन दोनों के बीच में बहुत ही खतरनाक युद्ध हुआ था। इस युद्ध के दौरान मोहम्मद गौरी मरने की हालत में था परन्तु उसके किसी सैनिक ने उसकी जान बचा ली परन्तु इस युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की ही जीत हुई थी और मोहम्मद गौरी की भयानक हर हुई थी। माना यह भी जाता है की इस युद्ध में पृथ्वीराज चौहान ने 7 करोड़ रुपये की सम्पदा अर्जित की थी और उन्होंने उस सम्पदा को अपनी सेना में बाँट दिया था।

पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी का दूसरा युद्ध | Second war of Prithviraj Chauhan and Mohammad Gauri.

संयोगिता के अपहरण के बाद जयचंद्र पृथ्वीराज को अपना और भी बड़ा दुश्मन मानने लगा था। उसी के कारण जयचंद्र पृथ्वीराज के खिलाफ बाकी राजपूतो को भड़काने लगा। केवल यह ही नहीं बल्कि जयचंद्र मोहम्मद गौरी के साथ भी मिल चूका था। उसके बाद मोहम्मद गौरी ने एक बार फिर से 1192 में युद्ध छेड़ दिया उसने पृथ्वीराज पर हमला कर दिया। इस युद्ध के दौरान पृथ्वीराज और उनके मित्र चंदरबाई ने बाकी राजपूतो से मदद मांगी परन्तु किसी ने भी उनकी मदद न की। तो फिर पृथ्वीराज अपनी 3 लाख लोगो की संबा को लेकर ही मोहम्मद गौरी की सेना से युद्ध करने लगे। मोहम्मद गौरी की सेना पहले के मुक़ाबले काफी अधिक व शक्तिशाली थी।

मोहम्मद गौरी की सेना ने पृथ्वीराज की सेना को चारों ओर से घेर लिया था। कई गद्दारों केकारण पृथ्वीराज चौहान इस युद्ध को हार गए थे। जब युद्ध खत्म हुआ तब उस समय मोहम्मद गोई ने पृथ्वीराज और उनके मित्र छंदरबाई कोबंदी बना लिया गया था। राजा जयचंद्र को भी मार दिया गया था। इस युद्ध के पश्चात पंजाब, दिल्ली, अजमेर और कन्नोज में मोहम्मद गौरी का राज चलता था। पृथ्वीराज चौहान के बाद कोई भी राजपूत शाशक भारत में अपना राज नहीं ला पाया।

पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु | Death of Prithviraj Chauhan

युद्ध के बाद जब चंदरबाई और पृथ्वीराज को बंदी बना लाया गया था उसके बाद मोहमद गौरी ने उन दोनों पर बहुत से जुल्म किये और उनको बहुत सी यातनाएं दी। माना यह भी जाता है की एक बार तो पृथ्वीराज चौहान की आंखो में गरम सरिया लगाया गया था जिसके कारण उनके आँखों की रौशनी चली गयी थी। उसके बाद पृथ्वीराज से उनकी अंतिम इच्छा पूछी गयी थी तब उन्होंने चंदरबाई के शब्दों पर शब्दभेदी बाण का उपयोग करने की इच्छा रखी। उसके बाद चंदरबाई द्वारा बोले गए दोहे से उन्होंने मोहम्मद गौरी की भरी सभा में हत्या कर दी थी। उसके बाद दोनों ने एक दूसरे की जीवन लीला भी समाप्त कर दी और दोनों की मृत्यु हो गयी। यह खबर जानने के बाद संयोगितां ने भी अपने प्राण त्याग दिए।

Prithviraj Chauhan Movie

हाल ही में पृथ्वीराज सिंह चौहान जी के ऊपर एक मूवी भी बनायीं गयी है जिसमे इनके बारे में बताया गया और इनकी वीरता के बारे में भी बताया गया है। इस मूवी में अक्षय कुमार ने पृथ्वीराज चौहान का किरदार निभाया है आप सभी को भी यह मूवी अवश्य देखनी चाहिए। तो दोस्तों कृपया करके इस मूवी को अवश्य देखे।

पृथ्वीराज चौहान से सम्बंधित कुछ प्रश्न व उनके उत्तर

पृथ्वीराज चौहान का जन्म कब और कहा पर हुआ था ?

पृथ्वीराज चौहान का जन्म 1 जून, 1163 को भारत के गुजरात राज्य के पाटण में हुआ था।

पृथ्वीराज चौहान के पिता का क्या नाम था ?

इनके पिता का नाम राजा सोमेश्वर चौहान था

पृथ्वीराज चौहान की कितनी पत्नियां थी ?

पृथ्वीराज चौहान की 13 पत्नियां थी जिनक नाम रानी संयोगिता, जंभावती, पड़िहारी, पंवारी, इच्छनी, दाहिया, जालंधरी, गुजरी, बड़गुजरी, यादवी, यादवी, पद्मावती, शशिव्रता, पुड़ीरानी था।

तराइन युद्ध पहली बार कब हुआ था ?

तराइन युद्ध पहली बार 1190 में हुआ था।

संयोगिता के पिता का क्या नाम है ?

संयोगिता के पिता का नाम जयचंद्र था।

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