जैसा की आप सभी जानते है की हम जिस देश में रहते है उसका नाम भारत देश है। जो की एक लोकतंत्र देश है। आप सभी को यह बतादे की भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश माना जाता है। लेकिन विश्व के सभी देश लोकतंत्र देश नहीं है। कुछ देशों में आज भी राज तंत्र और तानाशाही चलती है, लेकिन भारत में ऐसा नहीं है।
भारत में जनता के द्वारा सरकार का चयन किया जाता है। यह ही लोकतंत्र की खासियत है। जो की देश के हर नागरिक को उसकी पसंद का नेता चुनने का विकल्प देता है। दोस्तों आप सभी को यह बतादे की लोकतंत्र केवल चार स्तंभों पर चलता है। क्या आप यह जानते है की लोकतंत्र के चार स्तंभ कौन से है? अगर नहीं तो आप चिंतिन न हो आज हमने इस लेख में इसी के बारे में जानकारी साझा की हुई है।
इसलिए अगर आप भी जानना चाहते है की लोकतंत्र के चार स्तंभ कौन से है। तो उसके लिए आप सभी को हमारे इस लेख को अंत तक पढ़ना होगा। क्योंकि इस लेख में ही हमने इससे सम्बंधित जानकारी प्रदान की हुई है। इसलिए दोस्तों कृपया कर हमारे इस लेख को अंत तक पढ़े व इससे सम्बंधित जानकारी प्राप्त करें।
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लोकतंत्र के चार स्तंभ कौन से है
सबसे पहले तो आप सभी को यह बतादे की भारत के लोकतंत्र के चार स्तंभों को नियंत्रित करने के लिए कुछ कानून बनाये जाते है। फिर उन कानूनों को लागू भी किया जाता है। जब आजादी के बाद भारत में सांसद व्यवस्था को अपनाया गया उसके बाद देश में संविधान को लागू किया गया। जिसके अंतर्गत लोकतंत्र के मुख्य बनाये गए। आपको यह भी बतादे की पहले लोकतंत्र के केवल तीन मुख्य स्तम्भ थे जो कुछ इस प्रकार है – पहला विधायिका, दूसरा कार्यपालिका, तीसरा न्यायपालिका उसके कुछ समय पश्चात पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बनाया गया। आपको बतादे की इन सभी स्तम्भों में से अगर किसी एक पर कुछ होता है तो इसका सीधा असर लोकतंत्र पर पढता है। इसलिए इसके चारो स्तम्भ अवश्य होते है।
Loktantra Ke Char Stambh के नाम व कार्य
- विधायिका (Legislature) – आप सभी को यह बता दे की यह लोकतंत्र का पहला स्तम्भ होता है। इसका कार्य देश में कानून का बनाये रखना होता है। हमारे इस भारत देश में विधायिका का चुनाव हर पांच वर्षों में किया जाता है। उसके बाद यह कुछ नियम व कानूनों का निर्माण भी करते है। इनके द्वारा बनाये गए नियमो को शाशक व प्रजा दोनों पर लागू होते है।
- कार्यपालिका (Executive) – कार्यपालिका भी लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तम्भ माना जाता है। कार्यपालिका का भी महत्वपूर्ण कार्य होता है। क्योंकि कार्यपालिका ही विधायिका द्वारा बनाये गए सभी नियम व कानूनों को प्रजा तक पहुंचाने का कार्य करते है। उन सभी कानूनों को मानना व मनवाना भी इन्ही का कार्य होता है।
- न्यायपालिका (Judiciary) – जैसा की हमने आप सभी को बताया है की लोकतंत्र के सभी स्तम्भ काफी महत्वपूर्ण होते है। इसलिए यह भी काफी आवश्यक होता है। क्योंकि न्यायपालिका लोगो को कानून को समझाने का कार्य करती है। उसके साथ साथ अगर कोई व्यक्ति अगर कानूनों का उल्लंघन करता है। तो उस व्यक्ति को कानून का उल्लंघन करने की सजा भी देती है। केवल यह ही नहीं किसी भी व्यक्ति को इन्साफ यानि के न्याय दिलाने का कार्य भी न्यायपालिका का ही होता है।
- पत्रकारिता (Journalism) – बाकी स्तंभों की ही तरह यह भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि पत्रकारिता एक प्रकार से आम लोगो की आवाज के रूप से भी जानी जाती है। पत्रकारिता का कार्य यह होता है की वह देश को लोगो को यह जानकारी प्रदान करें की देश में क्या चल रहा है। पत्रकारिता को किसी भी बारे में जनता को जानकारी खबर के माध्यम से पहुंचाने का पूर्ण रूप से अधिकार होता है। समय के साथ साथ पत्रकारिता में पहले के समय के मुकाबले काफी परिवर्तन आया है। क्योंकि पहले के समय में पत्रकारिता समाचार पत्र के माध्यम से लोगो तक सही खबरे पहुंचाने का कार्य करती थी। लेकिन आज के समय में पत्रकारिता लोगो को सही खबर प्रिंट मीडिया एवं डिजिटल मीडिया के माध्यम से पहुँचाती है।
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लोकतंत्र के चार स्तंभ कौन कौन से है ?
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लोकतंत्र के चार स्तंभ के नाम कुछ इस प्रकार है –
विधायिका (Legislature)
कार्यपालिका (Executive)
न्यायपालिका (Judiciary)
पत्रकारिता (Journalism)
कार्यपालिका का क्या कार्य होता है ?
कार्यपालिका का भी महत्वपूर्ण कार्य होता है। क्योंकि कार्यपालिका ही विधायिका द्वारा बनाये गए सभी नियम व कानूनों को प्रजा तक पहुंचाने का कार्य करते है। उन सभी कानूनों को मानना व मनवाना भी इन्ही का कार्य होता है।
पहले के समय ने पत्रकारिता किस माध्यम से लोगो तक खबरे पहुंचाते थे ?
पहले के समय में पत्रकारिता द्वारा कई माध्यमों से खबरे पहुचायी जाती थी जैसे की – समाचार पत्र, रेडियो आदि।
विधायिका का कार्य क्या होता है ?
इसका कार्य देश में कानून का बनाये रखना होता है। हमारे इस भारत देश में विधायिका का चुनाव हर पांच वर्षों में किया जाता है। उसके बाद यह कुछ नियम व कानूनों का निर्माण भी करते है। इनके द्वारा बनाये गए नियमो को शाशक व प्रजा दोनों पर लागू होते है।