विमुद्रीकरण क्या है ? और इसके फायदे एवं नुकसान | Demonetisation Advantages and Disadvantages in hindi

आप सभी यह तो जानते ही हैं की हमारे देश में कुछ सालों पहले नोटबंदी हुई थी। नोटबंदी को विमुद्रीकरण भी कहा जाता हैं। नोटबंदी के बारे में हमारे देश के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा टीवी पर घोषणा की गयी थी की 500 और 1000 के पुराने नोट बंद होने वाले हैं। इस घोषणा को सुनकर भारत के निवासी सब घबरा गए थे और फिर सभी लोग जिसके पास जितने जितने 500 और 1000 के नोट थे उन्होंने उनको बैंक में जमा करवाए। हालाँकि इसकी वजह से लोगो को काफी परेशानी का सामना करना पढ़ा था। लेकिन इसकी वजह से देश को बहुत से लाभ भी हुए थे। तो दोस्तों क्या आप जानते हैं की विमुद्रीकरण क्या है और अगर आप नहीं जानते तो उसमे आपको चिंता करने की कोई भी आवश्यकता नहीं हैं।

विमुद्रीकरण क्या है और उसके फायदे एवं नुकसान | Demonetisation Advantages and Disadvantages in hindi
विमुद्रीकरण क्या है

क्योंकि आज हम आपको इस लेख के मध्यमम से विमुद्रीकरण के बारे में बहुत सी जानकारी देने वाले हैं जैसे की विमुद्रीकरण क्या है? Demonetisation क्यों आवश्यक हैं, Demonetisation का इतिहास और इससे होने वाले फायदे एवं नुकसान के बारे में भी हम आपको इस लेख में बताने वाले हैं। तो दोस्तों अगर आप भी इस प्रकार की जानकरी प्राप्त करना चाहते हो तो उसके लिए आपको हमारे इस लेख को अंत तक पढ़ना होगा तब ही आप विमुद्रीकरण के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकोगे।

इसको भी अवश्य पढ़े :- हरित क्रांति क्या है

विमुद्रीकरण क्या है | What is Demonetisation

जब देश की सरकार देश के किसी भी नोट को कानूनी तौर पर बंद करने के आदेश देती हैं उसी प्रक्रिया को विमुद्रीकरण भी कहा जाता हैं। जब देश की सरकार किसी नोट को बंद कर देती हैं लेकिन उसके बाद भी कोई व्यक्ति उस उस नोट से खरीदारी करता हैं तो उसको अपराध भी माना जाता हैं। जब सर्कार किसी नोट को बंद करती हैं उसके बाद सरकार उस नोट को बैंकों में जमा करने के लिए कुछ समय भी देती हैं ताकि जिस जिस व्यक्ति के पास वो नोट हो वह उसको बैंक में जमा करवा सकें। विमुद्रीकरण के वजह से बहुत से लोगो को बहुत परेशानी का सामना भी उठाना पढ़ा लेकिन इसकी वजह से देश को बहुत से लाभ हुए

नोटबंदी की वजह से देश में जितना भी काला धन था वह काफी हद तक कम हुआ हैं। भारत में विमुद्रीकरण 8 नवंबर, 2016 को हुआ था। इसके बारे में हमारे देश के प्रधान मंत्री जी श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा घोषणा की गयी थी उन्होंने भारतीय मुद्रा के दो नोटों को बंद किया था 500 के नोट और 1000 के नोट। मोदी जी ने यह भी बताया था की जिस जिस व्यक्ति के पास जितने भी 500 व 1000 के नोट हो उसको 30 दिसंबर तक जमा करवाना आवश्यक हैं। अगर उसके बाद कोई भी व्यक्ति उन पुराने नोटों से कुछ खरीदारी करता हैं तो उसको अपराध भी माना जाता हैं।

नोटबंदी क्यों आवश्यक हैं | Why is demonetisation necessary?

तो दोस्तों अगर किसी भी देश में विमुद्रीकरण किया जाता हैं तो उसके लिए कई कारण होते तब ही demonitisation किया जाता हैं। क्योंकि किसी भी नोट को बंद करने के लिए बहुत से कारन होते हैं। जब भी किसी भी देश में विमुद्रीकरण होता हैं और उसमे काफी सम्भावना यह होती हैं की किसी भी देश में बड़े नोटों को बंद किया जाए। इसी प्रकार भारत में उस समय सबसे बड़े नोटों यानि के 500 और 1000 के नोटों को बंद किया गया था क्योंकि समय में भारत में सबसे बड़े नोट 500 व 1000 के ही थे। जैसा की हमने आपको बताया हैं की विमुद्रीकरण करें के बहुत से कारण होते हैं। जिनमे से मुख्य कारण हैं देश में बढ़ता काला धन व देश की अर्थव्यवस्था।

काला धन (black money) उससे कहते है जब किसी भी धन पे कर नहीं दिया जाता हैं उसी को काला धन कहते हैं। काले धन को कम करने के लिए भी कई देशों में विमुद्रीकरण किया जाता हैं ताकि जिन लोगो के पास भी काला धन है वह बहार आ सकें। देश में काला धन होने के बहुत से नुक्सान होते हैं जिसकी वजह से देश को बहुत सी परेशानियों से गुजरना पड़ता हैं जैसे की – देश में नगदी की कमी और इसकी वजह से किसी भी देश की आर्थिक व्यवस्था को बहुत असर पढता हैं। इसलिए कई बार सरकार को इस प्रकार के कदम उठाने पढ़ते हैं। ताकि देश की अर्थव्यवस्था सुधर सकें और देश में जो काला धन हैं वह भी बाहर आ सकें

विमुद्रीकरण के कई सफल परिणाम भी भारत सरकार क प्राप्त हुए। ऐसे कई लोग थे जिनके पास काला धन था और वह पकडे भी गए। बताया यह भी जाता हैं की जो पैसे बैंक में जमा हुए थे उनमे से 500 और 1000 के नोट करीब 86 फीसदी थे लेकिन रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ बाजार में केवल 24 फीसदी नोट ही 500 व 1000 के थे यानि के बाकी का धन काला धन था जिनको कई लोगो द्वारा छुपाया गया था और उस धन को काले धन के रूप में परिवर्तित कर दिया गया था। यानि के भारत सरकार का विमुद्रीकरण करने के नतीजे का परिणाम बिलकुल सही निकला था जिसकी वजह से उनको लाभ भी हुआ था।

Demonetisation history

तो दोस्त आज हम आपको यहाँ पर नोटबंदी के इतिहास के बारे में बताने वाले हैं तो कृपया करके इसको पूरा पढ़े ताकि आप यह जानकारी प्राप्त कर सकें

भारत में विमुद्रीकरण 2016 में ही नहीं उससे पहले भी भारत में नोटबंदी हुई थी। आपको यह भी बता दें की भारत में 1946 के समय में किया गया था। उस समय में भारत में 500,1000 और 10000 का नोट भी चलता था और जिस समय में भारत में विमुद्रीकरण हुआ उसी समय में भारत सरकार के द्वारा 500 के नोट,1000 के नोट व 10000 के नोट को नोटबंदी के समय में बंद कर दिया गया था। उस समय में भी विमुद्रीकरण का एक ही ही कारण था वो भी यह ही था की काले धन को बाहर लाना। उसके बाद सन 1970 में भारत सरकार के द्वारा डायरेक्ट टैक्स के की जांच के लिए भारत सरकार ने Wanchoo Committee का गठन किया था।

उस समय में Wanchoo Committee ने भारत सरकार को काले धन को कम करने के लिए विमुद्रीकरण का सुझाव दिया था लेकिन भारत सरकार ने इसपर सोच विचार किया और जब तक भारत सरकार इस पर फैसला करती तब तक कही से इस बात की खबर देश में फैल चुकी थी की भारत सरकार विमुद्रीकरण करने वाली हैं जिसकी वजह से जिन जिन लोगो के पास भी काला धन था वह सभी सतर्क हो गए थे। इस खबर की वजह से सरकार ने विमुद्रीकरण का फैसला नहीं लिया और उन्होंने उस योजना को वहीँ समाप्त कर दिया था।

उसके बाद 1977 में जब चुनाव हुए थे उस समय में कांग्रेस पार्टी उस चुनाव को हार चुकी थी और उसको सत्ता को छोड़ना पढ़ा था और उस समय में भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ था जनता पार्टी पावर में आ चुकी थी। तो उस समय में भारत सरकार ने विमुद्रीकरण करण किया गया और 500 के नोट 1000 के नोट और 10000 के नोट को बंद कर दिया गया था। लेकिन उस समय में जब भारत सर्कार के द्वारा विमुद्रीकरण किया गया था तब भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर आईजी पटेल विमुद्रीकरण के पक्ष में नहीं थे और उन्होंने उस समय में इसका समर्थन नहीं किया था।

लेकिन जब 8 नवंबर 2016 को फिर से विमुद्रीकरण का फैसला भारत के प्रधानमंत्री जी श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा लिया गया था भारत सर्कार के द्वारा 500 और 1000 के नोट को बंद कर दिया था और 500 के नए नोट और 2000 के नोट को जारी किया था। उस समय में भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल जी उनके पक्ष में थे और उन्होंने भी इसका समर्थन किया था। लेकिन उस फैसले के को लेकर बहुत से लोगो ने इस फैसले को गलत बताया था और बहुत से लोगो ने इसका समर्थन भी किया था। लेकिन यह फैसला सफल साबित हुआ था और भारत सरकार को बहुत से लाभ भी हुए थे और कुछ लोगो के इससे नुकसान भी हुआ था जिसके बारे में हम आज आपको यहाँ पर बाटने वाले हैं।

विमुद्रीकरण के फायदे | Advantages of Demonitisation

विमुद्रीकरण से भारत सरकार व भारत के नागरिकों को भी बहुत से लाभ हुए हैं जिनके बारे में हम आपको आज इस लेख में बाटने वाले हैं तो अगर आप भी विमुद्रीकरण से होने वाले लाभ के बारे में जानना चाहते हो तो कृपया करके इस लेख को अंत तक पढ़े

  • विमुद्रीकरण के दौरान जब सब लोग अपने पैसे बैंक में जमा करने का रहे थे तब उन सभी की जानकारी जानकारी सरकार के पास जा रही थी और जिन लोगो के पास उनकी कमाई सेअधिक धन मिल रहा था उन लोगो के ऊपर आयकर विभाग के द्वारा जांच की जा रही थी और कई लोगो के पास से काला धन भी बरामद हुआ था।
  • विमुद्रीकरण के दौरान बैंकों में अधिक नकद था जिसके कारण बैंकों ने कम ब्याज दर पर लोन दे रही थी। जिसके कारण लोगो को लाभ भी प्राप्त हुआ था।
  • विमुद्रीकरण के कारन आतंकवाद,नक्सलवाद जैसी गति विधियों को आघात पंहुचा हैं क्योंकि काला धन ही आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी चीजों को बढ़ावा देता हैं क्योंकि काला धन सभी आतंकियों को देने के काम आता था और जब लोगो के पास धन ही नहीं था तो वह आतंकवाद को बढ़ावा नहीं दे सकते थे।
  • विमुद्रीकरण के दौरान लोगो को आर्थिक दर और पैसे की अहमियत और अपनी जिम्मेदारियों के बारे में काफी सबक मिला हैं। यह भी बहुत बड़ा लाभ है जो की देश के बहुत से लोगो को मिला हैं।
  • विमुद्रीकरण के कारण देश का अधिकतर काला धन सरकार को परैत हुआ हैं और उस काले धन का प्रयोग सरकार ने देश के विकास में लगाया है।
  • विमुद्रीकरण के कारण सभी बैंकों में सभी बैंकों में पर्याप्त मात्रा में कैश था और बैंकों का यह प्रयास था की वो अधिक से अधिक लोन प्रदान करें जिसकी वजह से कई युवाओं ने लोन लेकर अपना रोजगार शुरू किया था। जिसकी वजह से बेरोजगारी में भी गिरावट हुई है।
  • विमुद्रीकरण की वजह से टैक्स कलेक्शन में भी बढ़ोतरी हुई क्योंकि जब नोटबंदी के दौरान लोगो के पास काला धन होने के कारण सरकार ने कई जगहों पर छापे मारे थे और उसके बाद कई लोग डर गए थे और उन्होंने उतना टैक्स चुकाया जितना काला धन उनके पास था।

विमुद्रीकरण के नुकसान | Disadvantages of Demonitisation

तो दोस्तों जैसा की आप सभी जानते हैं की अगर किसी चीज के लाभ होते हैं तो हर चीज के नुकसान भी होते हैं इसलिए आज हम आपको यहाँ पर विमुद्रीकरण के कारण होने वाले लाभ के बारे में बताने वाले हैं। तो कृपया करके ध्यान से पढ़े

  • विमुद्रीकरण के कारन देश में पर्यटक स्थलों को भी काफी नुकसान हुआ हैं क्योंकि देश की स्थानीय मुद्रा न होने के कारण कई लोगो ने अपने भारत आने का प्लान कैंसिल कर दिया।
  • विमुद्रीकरण के कारन देश के आम लोगो को बहुत तकलीफ का सामना करना पढ़ा हैं उनको पूरे पूरे दिन एटीएम की लाइन में खड़े रहना पढ़ा हैं।
  • इसके कारण लोगो के पास पैसों की कमी हुई और लोग अपनी रोजाना की चीजें जैसे की – दूध,खाना के पदार्थ जैसे चीजों को खरीदने में भी काफी तकलीफ हुई हैं।
  • विमुद्रीकरण के कारन कई लोगो को बहुत नुकसान झकना पढ़ा हैं कई लोगो की तो मौत भी हो गयी क्योंकि जो लोग बीमार थे उनके पास जो नोट थे उसको अस्पताल वालों ने लेने से मन कर दिया और उस व्यक्ति का इलाज न हो पाने के कारण उसकी मौत हो गयी।
  • इसकी वजह से भारत की जीडीपी (Gross Domestic Product) में भी गिरावट हुई हैं।
  • इसके कारण किसानों को भी काफी नुक्सान हुआ क्योंकि लोगो के पास पैसा न होने के कारण उनको अपनी सब्जी व फसल को बहुत ही कम दामों में बेचना पढ़ा।

Demonistisation से सम्बंधित कुछ प्रश्न व उनके उत्तर

विमुद्रीकरण क्या होता हैं ?

जब देश की सरकार देश के किसी भी नोट को कानूनी तौर पर बंद करने के आदेश देती हैं उसी प्रक्रिया को विमुद्रीकरण भी कहा जाता हैं।

देश में विमुद्रीकरण कब हुआ था ?

देश में विमुद्रीकरण 8 नवंबर 2016 को हुआ था।

भारत में पहली बार विमुद्रीकरण कब हुआ था ?

भारत में पहली बार विमुद्रीकरण 1978 में हुई थी

हाल ही में हुए नोटबंदी किसके द्वारा की गयी थी ?

हल ही में हुई नोटबंदी देश के प्रधान मंत्री जी के द्वारा की गयी थी।

2016 में हुई नोटेबंदी के दौरान भारत सरकार द्वारा कौन कौन से नोट बंद किये गए थे

2016 में हुई नोटबंदी के दौरान भारत सरकार ने 500 व 1000 के नोट बंद किये थे।

Leave a Comment