भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की क्रान्ति | 1857 Revolution Reason, Causes of failure in Hindi

भारत का स्वतंत्रता संग्राम दुनिया द्वारा आदर्श स्वतंत्रता संग्राम के रूप में देखा जाता है। भारतीयों द्वारा औपनिवेशिक शासन से मुक्ति पाने के लिए सर्वप्रथम वर्ष 1857 में वृहद् स्तर पर क्रांति की गयी थी जिसे की भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रूप में जाना जाता है। अंग्रेजों के अत्याचारी शासन के विरुद्ध वर्ष 1857 की क्रान्ति को भारत की स्वतंत्रता में मील का पत्थर माना जाता है जिसके कारण अंतत देश के अन्य स्वतंत्रता आंदोलनों को दिशा प्राप्त हुयी। 1857 की क्रान्ति का वृहद् प्रभाव यह रहा की इसके माध्यम से अंग्रेजी शासन की राजसत्ता हिल गयी थी एवं देश के नागरिको में स्वतंत्रता की चेतना का विकास हुआ।

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भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
1857 Revolution

आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की क्रान्ति (1857 Revolution Reason, Causes of failure in Hindi) सम्बंधित जानकारी प्रदान करने वाले है। साथ ही इस आर्टिकल के माध्यम से आपको 1857 की क्रान्ति के कारण एवं प्रभाव के अतिरिक्त इस सम्बन्ध में भी जानकारी प्रदान की जाएगी की आखिर कैसे इतने वृहद् होने के कारण भी यह क्रांति अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में असफल हो गयी।

भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा वर्ष 1600 में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ प्रथम से पूर्व में व्यापार के लिए एकाधिकार प्राप्त किया गया। वर्ष 1608 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का सर्वप्रथम गुजरात के सूरत में आगमन हुआ। इसके पश्चात अपनी कुटिल नीतियों के कारण इसके द्वारा लगातार अपने साम्राज्य का विस्तार किया गया। कभी छल-कपट तो कभी सहायक-संधि द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा भारत के विभिन भागों पर कब्ज़ा किया जाता रहा। साथ ही अपनी कुटिलता का विस्तार करते हुए ब्रिटिशर्स द्वारा समय-समय पर व्यपगत सिद्धांत एवं अन्य कारणों से भी देश पर कब्ज़ा किया जाता रहा। आखिर इन सभी नीतियों का परिणाम यह हुआ की व्यापार करने के उद्देश्य से देश में आये फिरंगी इस देश के मालिक बन बैठे। अपने शासन के दौरान ब्रिटिशर्स द्वारा विभिन नीतियों का अनुसरण किया जाता रहा जिसके परिणामस्वरूप भारतीय नागरिको में असंतोष उभर रहा था। इसी असंतोष का परिणाम रहा की वर्ष 1857 में भारतीयों का अंग्रेजो के विरुद्ध विद्रोह फूट पड़ा जिसे की 1857 की क्रान्ति के नाम से जाना जाता है। यहाँ आपको इस क्रांति के सभी बिन्दुओ को विस्तारपूर्वक समझाया गया है।

1857 की क्रान्ति के कारण

1857 की क्रान्ति अंग्रेजो द्वारा लम्बे समय से भारतीय जनता पर किए जाने वाले विविध प्रकार के अत्याचारों का परिणाम थी। इसके परिणामस्वरूप उपजे असंतोष की परिणिति ही 1857 के विद्रोह के रूप में हुयी थी। यहाँ आपको इसके सभी प्रमुख कारणों के बारे में जानकारी प्रदान की जा रही है :-

  • राजनैतिक कारण (Political Cause)– अपनी विस्तारवाद की नीति के कारण अंग्रेजो के द्वारा लगातार अपने साम्राज्य का विस्तार किया जा रहा था जिसके लिए कभी व्यपगत सिद्धांत तो कभी शासको के कुप्रबंधन का हवाला देकर विभिन राज्यों को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला दिया गया। इससे अन्य रजवाड़े एवं रियासतें भी अपनी सत्ता को लेकर चिंतित हो गयी। इसमें मुख्य घटनाएँ इस प्रकार थी :-
    • अंग्रेजो द्वारा रानी लक्ष्मीबाई के दत्तक पुत्र को मान्यता ना देना
    • व्यपगत सिद्धांत के अंतर्गत सतारा, झाँसी एवं नागपुर का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय
    • नाना साहब की पेंशन को बंद करना
    • अवध के नवाब वाजिद अली शाह को कुशासन के आरोप में पदच्युत करना
  • आर्थिक कारण (Economic Cause)– 1857 की क्रान्ति के प्रमुख कारणों में अंग्रेजो द्वारा देश की जनता का आर्थिक रूप से शोषण भी क्रांति के लिए जिम्मेदार था। अंग्रेजों द्वारा मनमाने कर, लगान की अत्यधिक राशि एवं कर उगाही के लिए अमानवीय तरीकों से देश की जनता में आक्रोश था। क्रांति के आर्थिक कारण के प्रमुख बिंदु इस प्रकार है :-
    • अंग्रेजो द्वारा मनमाने कर से जनता को मुश्किलें
    • ब्रिटिश नीतियों के फलस्वरूप पारम्परिक जमींदारों एवं महाजनों की जमीन का सरकार के अधीन होना
    • ब्रिटिशर्स द्वारा भारत से कच्चा माल आयात एवं निर्मित उत्पाद का निर्यात होने से स्थानीय व्यापारियों को हानि
    • विभिन नीतियों के माध्यम से नागरिको का अत्यंत आर्थिक शोषण
  • सामाजिक और धार्मिक कारण (Religious Cause)– हमारे देश में सदैव से ही धर्म को प्रमुख स्थान दिया जाता रहा है। यही कारण है की जब अंग्रेजो द्वारा ईसाई मिशनरी के माध्यम से धर्मान्तरण एवं लम्बे समय से चली आ रही सामाजिक प्रथाओं को समाप्त किया गया तो भारत के नागरिको को यह अंग्रेजो की साजिश प्रतीत हुयी। सामाजिक और धार्मिक कारण के तहत मुख्य कारण निम्न प्रकार से थे :-
    • पश्चिमी सभ्यता के प्रसार से देश के नागरिकों को खतरा महसूस होना
    • ईसाई मिशनरियों द्वारा बड़े पैमाने पर धर्मांतऱण
    • विभिन सामाजिक प्रथाओं का उन्मूलन जो को अंग्रेजों को क्रूर लगती थी (सती एवं भ्रूण हत्या आदि)
    • ईसाइयों की अन्य धर्मो की तुलना में विशेषाधिकार
    • शिक्षा, रेलवे एवं टेलीग्राफ विस्तार भी नागरिको द्वारा संदेह के रूप में देखा गया

इस प्रकार से इन कारणों के फलस्वरूप देश में 1857 की क्रान्ति की शुरुआत हुयी।

1857 की क्रान्ति, तात्कालिक कारण

1857 की क्रान्ति की आग देश में लम्बे समय से सुलग रही थी। यहाँ आपको 1857 की क्रान्ति के प्रमुख कारणों के बारे में जानकारी प्रदान की गयी है। वास्तव में देखा जाए तो देश में विभिन कारणों से क्रांति की स्थितियाँ पैदा हो चुकी थी जिसे की बस एक चिंगारी की जरूरत थी। 1857 की क्रान्ति की पटकथा पहले से ही तैयार की जा चुकी थी जिसे शुरू करने के लिए बस एक छोटी सी शुरुआत की जरूरत थी। वर्ष 1857 में ब्रिटिसर्श द्वारा भारतीय सैनिकों को पुरानी बंदूकों के स्थान पर नई ‘एनफिल्ड’ राइफल प्रदान की गयी। इस राइफल में कारतूस भरने के लिए इसे मुँह से खोलना पड़ता था।

जल्द ही सिपाहियों के मध्य यह खबर फ़ैल गयी की इन कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी मिली हुयी है। ऐसे में इन कारतूसों के माध्यम से अंग्रेजों द्वारा हिन्दुओं और मुस्लिमो का धर्म भ्रष्ट करने की अफवाहें भी जोर पकड़ने लगी। इसके परिणामस्वरूप मंगल पांडेय नामक भारतीय सिपाही द्वारा विद्रोह कर दिया गया जिन्हें अंग्रेजो द्वारा 8 अप्रैल 1857 को फांसी चढ़ा दिया गया। इन सभी तात्कालिक कारणों से 1857 की क्रान्ति की शुरुआत हुयी।

1857 की क्रान्ति की प्रमुख घटनाएँ

1857 की क्रान्ति के दौरान पूरे देश में स्वतंत्रता की इच्छा अपने जोरों पर थी। इस विद्रोह की शुरुआत 10 मई 1857 को उत्तर-प्रदेश के मेरठ जिले से हुयी। यहाँ विद्रोही सैनिको ने सभी अंग्रेज अधिकारियों को मार डाला एवं दिल्ली की ओर बढ़ चले। जनता ने इस विद्रोह में सैनिको का भरपूर साथ दिया और अन्य महत्वपूर्ण नेताओ ने भी इस विद्रोह को ज्वाइन कर लिया। 11 मई 1857 को प्रातः 11 बजे विद्रोही लालकिले में पहुंचे और मुग़ल बादशाह बहादुरशाह जफ़र को क्रांति का नेतृत्व संभालने का आग्रह किया। अनिच्छुक होने के बावजूद क्रांतिकारियों के आग्रह पर बहादुरशाह जफ़र ने क्रांति का नेता बनना स्वीकार कर दिया। इसके पश्चात देश के विभिन भागो में क्रांति शुरू हो गयी। हालांकि इस क्रांति का मुख्य केंद्र उत्तर भारत ही था। इस दौरान की प्रमुख घटनाएँ इस प्रकार है :-

  • दिल्ली- दिल्ली में क्रांति का नेतृत्व मुग़ल बादशाह बहादुरशाह जफ़र ने संभाला जबकि यहाँ सैन्य नेतृत्व बख्त खाँ के हाथों में था। दिल्ली इस दौरान क्रान्ति का सञ्चालन केंद्र था।
  • अवध (लखनऊ)- अवध के नवाब वाजिद अली शाह को अंग्रेजो ने कुशासन के आरोप में गद्दी से हटा दिया था। इसके कारण अवध की जनता में व्यापक गुस्सा भरा हुआ था। 1857 की क्रान्ति के दौरान लखनऊ में क्रांति की बागडोर बेगम हजरत महल ने संभाली।
  • कानपुर- पेशवा बाजीराव द्वितीया के दत्तक पुत्र पुत्र नाना साहब को अंग्रेज गवर्नर लार्ड डलहौज़ी द्वारा पेंशन देने से इंकार कर दिया गया था। कानपुर में क्रांति का नेतृत्व नाना साहेब एवं सैन्य नेतृत्व तात्या टोपे द्वारा संभाला गया।
  • झाँसी- झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के दत्तक पुत्र को अंग्रेजो द्वारा मान्यता देने के इंकार कर दिया गया। 1857 की क्रान्ति में बुंदेलखंड का नेतृत्व करते हुए झाँसी की रानी द्वारा असाधारण वीरता का परिचय दिया गया।
  • बिहार- बिहार में क्रांति का नेतृत्व जमींदार कुंवरसिंह के द्वारा किया गया जो इस क्रांति के दौरान वीरतापूर्वक लड़ते हुए शहीद हो गए।

इस क्रांति के दौरान विभिन भागो में क्रांतिकारियों द्वारा ब्रिटिश अधिकारियों को मारा गया एवं बंदी बनाया गया साथ ही ब्रिटिश शासन के प्रतीक स्थलों पर भी हमले किए गए।

1857 की क्रान्ति की असफलता का कारण

1857 की क्रान्ति के तहत क्रांतिकारियों के द्वारा भारत को औपनिवेशिक आजादी से मुक्त कराने का लक्ष्य रखा गया था और अंग्रेजो को भारत से बाहर खदेड़ने का संकल्प लिया गया था। हालाँकि इस क्रांति के असफल होने के प्रमुख कारण निम्न है :-

  • समय से पूर्व क्रांति- 1857 की क्रान्ति अपने निर्धारित समय से पूर्व ही शुरू हो गयी थी जिसके कारण सभी योजनाएँ पूर्ण रूप से अमल में नहीं लायी जा सकी। इसी के परिणामस्वरूप क्रांति को अंग्रेजो के द्वारा आसानी से कुचला गया।
  • नेतृत्व का अभाव– इस क्रांति को वास्तव में कोई भी केंद्रीय नेतृत्व नहीं मिल पाया। मुग़ल बादशाह बहादुरशाह जफ़र ने इच्छा के विरुद्ध इस क्रांति में भाग लिया था। साथ ही क्रांति में सैन्य नेतृत्व का भी अभाव था जिससे क्रांति को सही तरीके से समन्वयित नहीं किया जा सका।
  • सीमित क्षेत्र– इस क्रांति का मुख्य केंद्र उत्तर-भारत ही रहा एवं देश के अन्य भागों से इसे व्यापक समर्थन नहीं मिल पाया। यही कारण रहा की क्रांति सीमित क्षेत्र में ही प्रदर्शित हुयी।
  • मध्यम वर्ग की उदासीनता– भारत के मध्य वर्ग के अंग्रेजी पढ़े लिखे नागरिको एवं अनेक रजवाड़ो और रियासतों ने इस क्रांति में अंग्रेजो का साथ दिया जिससे की इसे आसानी से दबा दिया गया।
  • सीमित साधन– 1857 की क्रान्ति में क्रांतिकारियों के पास सीमित संसाधन थे जिसके कारण इस क्रांति को क्रियान्वित करने में समस्याओं का सामना करना पड़ा। वही आधुनिक शस्त्रों से लैस अंग्रेजो के लिए इस क्रांति को दबाना आसान था।

इन सभी प्रमुख कारणों से अंग्रेज आसानी से इस क्रांति का दमन करने में सफल हुए।

1857 की क्रान्ति के परिणाम

1857 की क्रान्ति के परिणामस्वरूप अंग्रेज सरकार की राजसत्ता हिल गयी। क्रांति के पश्चात ब्रिटिश ताज द्वारा भारत का शासन ईस्ट इंडिया कंपनी से लेकर अपने हाथ में ले लिया गया एवं गवर्नर जनरल का पद समाप्त करके भारत में वायसराय की नियुक्ति की गयी। साथ ही ब्रिटिश सरकार द्वारा सेना में अधिक ब्रिटिश सैनिको की भर्ती की गयी एवं उत्तर-भारत में अवध, बिहार एवं क्रांति में भाग लेने वाले क्षेत्रों के सिपाहियों को गैर-लड़ाकू घोषित किया गया। ब्रिटिश सरकार द्वारा व्यपगत सिद्धांत की समाप्ति करके साम्राज्यवाद के विस्तार पर रोक एवं भारतीय रियासतों के आतंरिक मामलो में हस्तक्षेप की नीति को भी खत्म किया गया।

सरकार द्वारा भारत के नागरिको के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन पर हस्तक्षेप ना करके उन्हें विभिन पदों पर नियुक्ति के अधिकार प्रदान किये गये। हालांकि इस क्रांति का सबसे व्यापक प्रभाव यह रहा की देश में स्वतंत्रता की चेतना का विकास हुआ जिसके परिणामस्वरूप देश अंतत आजाद हुआ।

1857 की क्रान्ति सम्बंधित अकसर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1857 की क्रान्ति की शुरुआत कहाँ से हुयी ?

1857 की क्रान्ति की शुरुआत 10 मई 1857 को उत्तर-प्रदेश के मेरठ जिले से हुयी।

भारत की आजादी का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम कौन सा था ?

1857 की क्रान्ति को भारत की आजादी का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम माना जाता है।

1857 की क्रान्ति के क्या कारण थे ?

1857 की क्रान्ति का मुख्य कारण ब्रिटिश उपनिवेशवाद के कारण देश की जनता के मन में उपनिवेशवाद के प्रति उपजा असंतोष था। विस्तृत कारणों के लिए आप ऊपर दिया गया आर्टिकल पढ़ सकते है।

1857 की क्रान्ति का नेतृत्व कौन कर रहा था ?

1857 की क्रान्ति में विद्रोहियों द्वारा मुग़ल बादशाह बहादुरशाह जफ़र को नेतृत्व का आग्रह किया गया था जिसे उन्होंने स्वीकार किया था। इसके अतिरिक्त विभिन क्षेत्रों में विभिन क्रांतिकारी नेतृत्व की बागडोर संभाले थे।

1857 की क्रान्ति की असफलता के कारण क्या-क्या है ?

1857 की क्रान्ति की असफलता के कारण सम्बंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए ऊपर दिया गया आर्टिकल पढ़े। यहाँ आपको क्रान्ति की असफलता के कारण बिंदुवार बताये गए है।

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