वायुमंडल का अर्थ | वायुमंडल के प्रकार | वायुमंडल की संरचना, संघटन (Atmosphere)

सम्पूर्ण सौरमंडल में पृथ्वी ही एक मात्र ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन संभव है। पृथ्वी पर जीवन संभव होने का कारण पृथ्वी का वायुमंडल है जिसके कारण धरती पर जीवन के लिए अनुकूल दशाएँ उत्पन हुयी है। धरती पर होने वाली भौगोलिक क्रियाओं में वायुमंडल का प्रमुख योगदान है। धरती पर ताप संतुलन एवं विभिन जैविक क्रियाओं में वायुमंडल का प्रमुख महत्व है। आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको वायुमंडल का अर्थ, प्रकार एवं वायुमंडल की संरचना, संघटन (Atmosphere) सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी (atmosphere and its composition) प्रदान करने वाले है। इस आर्टिकल के माध्यम से आपको वायुमंडल के विभिन घटकों एवं इनके प्रभाव की विस्तृत जानकारी भी प्रदान की जाएगी।

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वायुमंडल का अर्थ
वायुमंडल की संरचना

प्रतियोगी परीक्षाओं में अकसर वायुमंडल से सम्बंधित विभिन प्रकार के प्रश्न पूछे जाते है ऐसे में यह लेख प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी रहने वाला है। साथ ही विभिन कक्षाओं के छात्रों के लिए भी यह लेख अध्ययन की दृष्टि से उपयोगी है।

वायुमंडल का अर्थ (what is atmosphere)

हमारी धरती के चारों ओर वायु का विशाल आवरण पाया जाता है जिसने सम्पूर्ण धरती को ढ़का हुआ है। वायु के इस विशाल आवरण को ही वायुमंडल (atmosphere) कहा जाता है। वास्तव में वायुमंडल धरती को चारों ओर से कंबल की भांति लपेटे हुए है जो की धरती पर जीवन के लिए विभिन स्थितियों के लिए आवश्यक है। वायुमंडल विभिन प्रकार की गैसों का मिश्रण है जो की धरती पर तापमान संतुलन, मौसमी घटनाओ, ग्रीनहाउस प्रभाव, पराबैंगनी किरणों से रक्षा एवं विभिन प्राकृतिक क्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण तत्त्व है। पृथ्वी पर वायुमंडल पृथ्वी द्वारा आरोपित गुरुत्वाकर्षण बल के कारण संलग्न होता है जिससे की वायुमंडल में विभिन गैसें स्थिर रह पाती है।

वायुमंडल का संघटन

वायुमंडल विभिन प्रकार की गैसों, जलवाष्प एवं धूलकणों का मिश्रण होता है जो की सम्मिलित रूप से वायुमंडल की संरचना करते है। यहाँ वायुमंडल के विभिन संघटनो की जानकारी प्रदान की गयी है :-

  • नाइट्रोजन (NITROGEN)– नाइट्रोजन वायुमंडल में सबसे अधिक मात्रा में पायी जाने वाली गैस है। सम्पूर्ण वायुमंडल की सभी गैसों का 78 फीसदी भाग नाइट्रोजन द्वारा व्यापत है। निष्क्रिय एवं भारी गैस गैस के रूप में प्रचलित नाइट्रोजन, नाइट्रोजन चक्र एवं प्रकाश के परावर्तन हेतु महत्वपूर्ण है।
  • ऑक्सीजन (OXYGEN)-ऑक्सीजन वायुमंडल के आयतन का 21 फीसदी भाग है। सभी जीव श्वसन हेतु ऑक्सीजन गैस का उपयोग करते है। ऑक्सीजन धरती पर विभिन जीवों हेतु प्राणदायिनी गैस का कार्य करती है।
  • ओजोन (OZONE)– समतापमंडल में पायी जाने वाली ओजोन गैस वायुमंडल में अत्यंत अल्प मात्रा में उपस्थित है जो की सूर्य से आने वाली घातक पराबैगनी किरणों (UV rays) से धरती की रक्षा करती है। वास्तव में ओजोन परत पृथ्वी के रक्षा कवच की भांति कार्य करती है जो की धरती को सूर्य से आने वाले हानिकारक पराबैंगनी विकिरण से बचाती है। क्लोरो-फ्लोरो कार्बन इस परत को अत्यंत नुकसान पहुँचाती है।
  • कार्बन डाईऑक्साइड (CARBON DIOXIDE)– कार्बन डाईऑक्साइड वायुमंडल में अत्यंत अल्प-मात्रा में उपस्थित होने के बावजूद धरती पर जीवन के लिए आवश्यक गैस है। ग्रीन हाउस प्रभाव के माध्यम से धरती पर आवश्यक ताप संतुलन बनाने एवं पेड़-पौधों के खाद्य निर्माण हेतु कार्बन डाईऑक्साइड आवश्यक गैस है। हालांकि इस गैस की मानक से अधिक मात्रा धरती पर ग्लोबल वार्मिंग का प्रमुख कारण है।
  • जलवाष्प (WATER VAPOUR)– वायुमंडल के 3 से 4 फीसदी आयतन को जलवाष्प द्वारा घेरा गया है जो की धरती पर विभिन मौसमी घटनाओ के लिए आवश्यक है। जलवाष्प के कणों के कारण ही धरती पर जल-चक्र संतुलन में रह पाता है विभिन मौसमी घटनाओ से जीवन चक्र संभव हो पाता है।
  • धूल कण (DUST MITES)– धूल कणो में धूल कण, परागकण, खनिज कण एवं ज्वालामुखी राख शामिल है जिन्हे ‘ऐरोसोल’ भी कहा जाता है। वास्तव में ये धूल कण बादल निर्माण के लिए आवश्यक तत्त्व है जिनके चारों ओर जलवाष्प जमा होकर बादलों का निर्माण करते है। इसी कारण से इन्हे ‘आर्द्रताग्राही नाभिक’ की संज्ञा भी दी जाती है।

वायुमंडल में उपस्थित विभिन गैसों का आयतन

वायुमंडल विभिन प्रकार की गैसों का मिश्रण है जहाँ विभिन गैसें अलग-अलग अनुपात में पायी जाती है। वायुमंडल में सबसे अधिक आयतन नाइट्रोजन का पाया जाता है जिसके बाद ऑक्सीजन दूसरी प्रमुख गैस है। साथ ही वायुमंडल में विभिन गैसें भी जीवन के सुचारु रूप से संचालन हेतु आवश्यक है। यहाँ आपको वायुमंडल में उपस्थित विभिन गैसों के आयतन की जानकारी प्रदान की गयी है :-

गैस (Gases)आयतन (%) (प्रतिशत में)
नाइट्रोजन78.03
ऑक्सीजन20.99
आर्गन0.93
कार्बन डाईऑक्साइड0.03
हाइड्रोजन0.01
नियोन0.0018
हीलियम0.0005
क्रिप्टान0.0001
जेनान0.000005
ओजोन0.0000001
वायुमंडल का अर्थ

वायुमंडल के विभिन स्तर

पृथ्वी के वायुमंडल को कुल 5 भागो में बांटा गया है। पृथ्वी की सतह से लेकर वायुमंडल में ऊपरी स्तर तक वायुमंडल की संरचना निम्न प्रकार से विभाजित की गयी है :-

  • क्षोभमण्डल (Troposphere)
  • समतापमण्डल (Stratosphere)
  • मध्यमण्डल (Mesosphere)
  • तापमण्डल (Thermosphere)
  • बाह्यमण्डल (Exosphere)

वायुमंडल की संरचना (Structure of atmosphere)

ऊँचाई, वायु-घनत्व, तापमान एवं विभिन गैसों की उपस्थित के आधार पर वायुमंडल को कुल 5 भागों में विभाजित किया गया है। वायुमंडल की संरचना के आधार पर यहाँ आपको पृथ्वी के वायुमंडल के सभी 5 स्तरों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गयी है :-

क्षोभमंडल (TROPOSPHERE)

  • क्षोभमंडल वायुमंडल की सबसे निचली परत है जिसकी औसत ऊँचाई 13 किलोमीटर होती है। ध्रुवों पर इसकी ऊँचाई 8 से 10 किमी जबकि भूमध्यरेखा पर क्षोभमंडल की ऊँचाई 18 किलोमीटर तक होती है।
  • मौसम सम्बंधित सभी घटनाएँ जैसे वर्षा, झंझावात, तूफ़ान, आँधी, चक्रवात एवं अन्य मौसमी घटनाएँ इसी मंडल में घटित होती है जिस कारण से इसे परिवर्तन मंडल भी कहा जाता है।
  • क्षोभमंडल वायुमंडल का महत्वपूर्ण स्तर है चूँकि यह समस्त वायुमंडल के द्रव्यमान का 80 फीसदी भाग कवर करता है। साथ ही क्षोभमंडल के 5.6 किमी. तक वायुमंडल का 50 फीसदी द्रव्यमान पाया जाता है जो की वायुमंडल की प्रमुख गैसों जैसे नाइट्रोजन, ऑक्सीजन एवं अन्य महत्वपूर्ण गैसों का संघटन है।
  • क्षोभमंडल के स्तर में ऋतु के अनुसार परिवर्तन होता रहता है। ग्रीष्मकाल में इसके स्तर में वृद्धि हो जाती है जबकि शीतकाल में ताप कम होने से इसके स्तर में कमी होने लगती है।
  • क्षोभमंडल में नीचे से ऊपर जाने पर तापमान में गिरावट होती है। यह गिरावट 165 मीटर पर एक डिग्री सेल्सियस या 6.50C/किमी. है।
  • जलवाष्प का सम्पूर्ण आयतन क्षोभमंडल में ही केंद्रित होता है यही कारण है की यहाँ जलवाष्प की उपस्थित से मौसमी घटनाएँ होती है।

क्षोभ सीमा (TROPOPAUSE)– क्षोभमंडल की सबसे ऊपरी सीमा को क्षोभ सीमा कहा जाता है। वास्तव में यह सीमा क्षोभमंडल एवं समतापमंडल के मध्य संक्रमण क्षेत्र है जहाँ ताप में गिरावट सम्बंधित घटनाएँ नहीं होती।

समताप मंडल (STRATOSPHERE)

  • क्षोभमंडल के पश्चात वायुमंडल की द्वितीय परत समताप मंडल है जिसका सतह से ऊँचाई 50 किमी तक है। इसकी कुल मोटाई लगभग 40 किलोमीटर तक होती है।
  • समताप मंडल में तापमान स्थिर होता है जिसके कारण यह मंडल प्रायः शांत मंडल माना जाता है। हालांकि समताप मंडल में ऊँचाई में वृद्धि के साथ तापमान में वृद्धि होने लगती है जिसका कारण इस मंडल में पराबैंगनी किरणों का अवशोषण होना है।
  • यह मंडल ध्रुवों पर सर्वाधिक घना जबकि विषुवत वृत्त में कम घना होता है।
  • यहाँ किसी भी प्रकार की मौसमी घटनाएँ नहीं पायी जाती यही कारण है की वायुयान उड़ाने के लिए यह मंडल सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है।
  • 50 डिग्री से 60 डिग्री अक्षाशों के मध्य शीतऋतु में यह मंडल सर्वाधिक तप्त रहता है।
  • समताप मंडल की ऊपरी सीमा को समताप सीमा (Stratopause) कहा जाता है जो की समताप मंडल एवं मध्यमंडल के बीच में संक्रमण क्षेत्र है।

ओजोन मंडल (OZONOSPHERE)ओजोन मंडल, समताप मंडल का ही निचला भाग होता है जिसका मुख्यत संकेन्द्रण 15 से 35 कि.मी. के मध्य होता है। ओजोन मंडल सूर्य से आने वाली हानिकारक अतिप्त पराबैगनी किरणों (UV rays) को अवशोषित कर देता है एवं पृथ्वी को हानिकारण विकिरणों से बचाता है।

मध्य मंडल (MESOPHERE)

  • मध्य मंडल वायुमंडल के मध्य भाग में पायी जाने वाली परत है जो की मताप मंडल के ऊपर स्थित होती है।
  • मध्य मंडल की ऊँचाई सतह से 80 किलोमीटर तक होती है जिसकी कुल मोटाई 30 किलोमीटर तक होती है।
  • इस मंडल में ऊँचाई के साथ तापमान में पुनः कमी होने लगती है एवं सबसे ऊपरी सीमा पर पहुँचने पर ताप −85°C पहुँच जाता है जो की इसे धरती का सबसे ठंडा स्थान बनाता है।
  • अंतरिक्ष से आने वाले विभिन ऑब्जेक्ट एवं उल्कापिंड मध्य मंडल में वायु के घर्षण में आकर जल जाते है।
  • इस मंडल की सबसे ऊपरी सीमा को मध्यसीमा कहा जाता है जो की मध्य मंडल एवं आयनमंडल का संक्रमण क्षेत्र होता है।

atmosphere layer

आयन मंडल (IONOSPHERE)

  • मध्य मंडल के ऊपर आयन मंडल स्थित है जिसे बाह्य वायुमंडल एवं तापमण्डल के नाम से भी जाना जाता है।
  • आयन मंडल की ऊँचाई 80 किलोमीटर से 400 किलोमीटर तक है जिसकी मोटाई लगभग 300 किलोमीटर तक है।
  • आयन मंडल में ऊपर जाने पर तापमान में पुनः वृद्धि होने लगती है।
  • तापमान में वृद्धि के कारण यहाँ दाब में कमी होती है जिसके फलस्वरूप सौर्यिक विकिरण, पराबैगनी फोटोंस (UV photons) तथा उच्च वेगीय कणों से यहाँ की गैसें आयनीकृत होती रहती है जिस कारण से इसे आयनमंडल कहा जाता है।
  • आयन मंडल में आयन कणो की उपस्थित के कारण यहाँ से रेडियो तरंगें परावर्तित होकर पृथ्वी पर वापस लौट जाती है एवं विभिन प्रकार के संचार को संभव बनाती है। साथ ही संचार उपग्रह भी आयन मंडल में प्रतिस्थापित किए जाते है।
  • आयन मंडल में ही वायुमंडल में होने वाली अद्धभुत खगोल घटनाएँ उत्तरी ध्रुवीय प्रकाश (aurora borealis) एवं दक्षिणी ध्रुवीय प्रकाश (aurora australis) घटित होती है। वास्तव में ये वायुमंडल में प्रकाश सम्बंधित घटनाएँ है जहाँ धरती के उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुवों से चमकीले प्रकाश का उत्सर्जन दिखाई देता है।
  • इस मंडल में मुख्यत 3 प्रकार की परते पायी जाती है जिनका विवरण इस प्रकार से है :-
    • D परत (D layer)- दीर्घ रेडियो तरंगो का परावर्तन
    • E1 एवं E2 परत(E1-E2 layer)- लघु रेडियो तरंगो का परावर्तन
    • F1 एवं F2 परत(E1-E2 layer)- लघु रेडियो तरंगो का परावर्तन

बाह्य मंडल (EXOSPHERE)

  • बाह्य मंडल वायुमंडल की सबसे ऊपरी परत होती है जिसे की प्रायः बहिर्मंडल भी कहा जाता है।
  • बहिर्मंडल आयन मंडल के ऊपर स्थित होती है जहाँ विभिन गैसें अत्यंत कम घनत्व पर पायी जाती है। यहाँ गुरुत्व बल कम होने के कारण विभिन गैसें अत्यंत विरल होती है।
  • इस मंडल में मुख्यत हाइड्रोजन एवं हीलियम गैसें पायी जाती है एवं अन्य गैसें अत्यंत अल्प मात्रा में पायी जाती है।
  • बहिर्मंडल का मुख्य अध्ययन लेमन स्पिट्जर के द्वारा किया गया है।
  • पृथ्वी की सबसे बाहरी परत के रूप में परिभाषित बाह्य मंडल अत्यंत कम वायु घनत्व के साथ अंतत अंतरिक्ष में जाकर मिल जाती है।

इस प्रकार से इस आर्टिकल के माध्यम से आपको पृथ्वी के वायुमंडल सम्बंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान की गयी है।

वायुमंडल का अर्थ सम्बंधित अकसर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

वायुमंडल किसे कहा जाता है ?

धरती के चारों ओर वायु का विशाल आवरण जो सम्पूर्ण धरती को ढ़के हुए है, को वायुमंडल कहा जाता है। वायुमंडल विभिन गैसों, जलवाष्प एवं धूलकणों का मिश्रण होता है।

वायुमंडल क्यों आवश्यक है ?

वायुमंडल धरती को चारों ओर से ढ़के हुए है जो की धरती के रक्षा कवच की भांति कार्य करता है। वायुमंडल धरती पर जीवन के लिए आवश्यक तत्त्व है। वायुमंडल की उपस्थित के कारण ही धरती पर जीवन संभव हो पाता है। वायुमंडल की उपस्थित के कारण श्वसन प्रक्रिया संभव हो पाती है। साथ ही खाद्य उत्पादन एवं विभिन जैविक क्रियाओं के लिए भी वायुमंडल की उपस्थित अनिवार्य है।

वायुमंडल के मुख्य संघटन क्या है ?

वायुमंडल के मुख्य संघटन निम्न है :- गैसें, जलवाष्प एवं धूल कण

वायुमंडल में सबसे अधिक मात्रा में कौन सी गैस पायी जाती है ?

वायुमंडल में सबसे अधिक मात्रा में नाइट्रोजन गैस पायी जाती है जो की वायुमंडल के कुल आयतन का 78 फीसदी भाग बनाती है।

वायुमंडल में ऑक्सीजन कितने प्रतिशत होती है ?

वायुमंडल के कुल आयतन का 21 फीसदी भाग ऑक्सीजन से मिलकर बना है।

वायुमंडल में जलवाष्प क्यों आवश्यक है ?

वायुमंडल में जलवाष्प 3 से 4 फीसदी आयतन को जलवाष्प द्वारा घेरा गया है जिसके माध्यम से विभिन प्रकार की मौसमी घटनाएँ संभव हो पाती है।

वायुमंडल में धूलकण किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है ?

वायुमंडल में धूलकण- धूल कण, परागकण, खनिज कण एवं ज्वालामुखी राख कणो से मिलकर बने होते है जिन्हे ‘ऐरोसोल’ भी कहा जाता है। जलवाष्प के संघनन के लिए धूलकण नाभिक की भांति कार्य करते है जिस कारण से इन्हे ‘आर्द्रताग्राही नाभिक’ भी कहा जाता है।

वायुमंडल को कुल कितने भागों बाँटा गया है ?

वायुमंडल को कुल 5 भागों में बाँटा गया है। इसकी की विस्तृत जानकारी के लिए आप ऊपर दिया गया आर्टिकल पढ़ सकते है।

वायुमंडल में ओजोन परत किस मंडल में पायी जाती है ?

वायुमंडल में ओजोन परत समतापमंडल में पायी जाती है।

वायुमंडल में रेडियो तरंगो का परावर्तन किस मंडल से होता है ?

वायुमंडल में रेडियो तरंगो का परावर्तन आयनमंडल से होता है।

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