आम आदमी पार्टी का राजनीतिक इतिहास – AAP Political History

वर्ष 2012 के दौरान भारत में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, कोल-इंडिया घोटाला और कामनवेल्थ घोटाले जैसे बड़े घोटालों ने पूरे देश के राजनैतिक गलियारों में हलचल मचा रखी थी। ऐसे में भारत की राजनीति में एक नयी राजनैतिक पार्टी आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) का उदय हुआ। वर्तमान में दिल्ली एवं पंजाब में सरकार के गठन के साथ आम आदमी पार्टी भारत में प्रमुख विपक्षी दल के रूप में उभर रही है। वर्ष 2012 तक देश की राजनीति में अस्तित्वहीन रही आम आदमी पार्टी राजधानी दिल्ली सहित पंजाब में भी सत्ता पर काबिज हो चुकी है।

अपने गठन के मात्र 10 वर्षो में ही आम आदमी पार्टी ने भारत की राजनीति में प्रमुख राष्ट्रीय पार्टी के रूप में पहचान स्थापित की है। आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको आम आदमी पार्टी का राजनीतिक इतिहास (AAP Political History) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करने वाले है। साथ ही इस आर्टिकल के माध्यम से आपको आम आदमी पार्टी से सम्बंधित अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों से भी अवगत कराया जायेगा।

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आम आदमी पार्टी का राजनीतिक इतिहास
Aam Aadmi Party

आम आदमी पार्टी का राजनीतिक इतिहास

वर्तमान समय में भारतीय राजनीति में आम आदमी पार्टी देश के प्रमुख राष्ट्रीय दल के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुकी है। आम आदमी पार्टी का राजनीतिक इतिहास वर्ष 2012 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से शुरू होता है। वर्ष 2012 में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से जन्म लेने वाली आम आदमी पार्टी एक दिन भारत की राजनीति में प्रमुख राष्ट्रीय पार्टी के रूप में स्थापित हो जाएगी इसकी कल्पना शायद आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य अरविन्द केजरीवाल ने भी नहीं की होगी।

पहले 2015 और फिर 2020 में दिल्ली की गद्दी और इसके पश्चात पंजाब की गद्दी पर काबिज होने वाली आम आदमी पार्टी भारतीय राजनीति में प्रमुख विपक्षी दल के रूप में उभर रही है। भारत की राजनीति में दिल्ली और पंजाब के अतिरिक्त गुजरात, गोवा और हिमाचल प्रदेश में भी आम आदमी पार्टी की एंट्री हो चुकी है। साथ ही देश के राजनीति में आम आदमी पार्टी वर्तमान में देश की चौथी सबसे बड़ी पार्टी है।

आम आदमी पार्टी का भारतीय राजनीति में उदय

आम आदमी पार्टी का भारतीय राजनीति में उदय वर्ष 2012 में लोकप्रिय समाजसेवी एवं भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान हुआ। वर्ष 2012 में देश में वृहद् स्तर पर कांग्रेस नीत UPA सरकार के कार्यकाल में हुए 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, कोल-इंडिया घोटाला और कामनवेल्थ घोटाले एवं शासन में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना हजारे द्वारा इण्डिया अगेंस्ट करप्शन नामक भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन शुरू किया गया था। इस आंदोलन का उद्देश्य भारत में जन लोकपाल का गठन करना था।

इसी आंदोलन के दौरान आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेता अरविंद केजरीवाल द्वारा वर्ष 2012 में आम आदमी पार्टी की स्थापना की गयी थी। इस पार्टी के स्थापना के दौरान अरविंद केजरीवाल द्वारा कहा गया था की सिस्टम को साफ़ करने के लिए हमे सिस्टम में उतरना जरुरी है। इसी उद्देश्य से अरविंद केजरीवाल द्वारा आम आदमी पार्टी की नींव रखी गयी थी।

आम आदमी पार्टी का गठन

अन्ना हजारे के जन लोकपाल आन्दोलन के समापान के मौके पर अरविंद केजरीवाल द्वारा आम आदमी पार्टी (AAP) की घोषणा की गयी थी। आम आदमी पार्टी की घोषणा पार्टी के संस्थापक सदस्य अरविन्द केजरीवाल द्वारा 2 अक्टूबर 2012 को की गयी थी। आम आदमी पार्टी को औपचारिक रूप से 26 नवंबर 2012 को लॉच किया गया था। इस पार्टी के संस्थापक सदस्यों में सबसे प्रमुख अरविन्द केजरीवाल थे जो की वर्तमान में पार्टी के प्रमुख नेता एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री है। साथ ही प्रशांत भूषण, कुमार विश्वास, योगेंद्र यादव, अजीत झा और आनंद कुमार भी पार्टी के प्रमुख संस्थापक सदस्यों में शामिल है।

AAP की दिल्ली की गद्दी का सफर

वर्ष 2012 में पार्टी के गठन के पश्चात आम आदमी पार्टी द्वारा दिल्ली के विधानसभा चुनाव में एंट्री की गयी। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी में 70 विधानसभा सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में कुल 28 सीटों पर विजय प्राप्त की और कांग्रेस के साथ मिलकर दिल्ली में गठबंधन सरकार का गठन किया। इस गठबंधन में अल्पमत वाली आप पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बने। इसके पश्चात अरविन्द केजरीवाल ने अल्पमत होने के कारण मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और पुनः चुनाव कराने की मांग की। वर्ष 2015 में हुए विधानसभा चुनावो में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा में शानदार प्रदर्शन किया एवं 70 सीटों में से 67 सीटों पर जीत दर्ज की। वर्ष 2020 में पुनः आप (AAP) ने दिल्ली विधानसभा में 70 सीटों में 62 सीटों पर जीत दर्ज करके दिल्ली की गद्दी पर कब्ज़ा बरक़रार रखा है।

भारत की राजनीति में AAP का सफर

अपने स्थापना के मात्र 10 वर्षो में ही भारत की राजनीति में AAP का सफर बेहद दिलचस्प रहा है। दिल्ली विधानसभा से अपने राजनीतिक जीत का सफर शुरू करने वाली आम आदमी पार्टी वर्ष 2020 में पुनः दिल्ली की गद्दी पर काबिज हो चुकी है। वर्ष 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावो में आप (AAP) ने 117 सीटों में से 92 सीटों पर कब्जा जमकर पंजाब में सरकार का गठन किया है। Delhi MCD Election में भी आप ने शानदार बहुमत हासिल किया है।

हाल ही में हुए गुजरात विधानसभा चुनाव परिणामों (Gujarat Election Result 2022) में भी आम आदमी पार्टी ने 5 सीटों पर कब्जा जमाकर अपनी मजबूत उपस्थित दर्ज कराई है।

आम आदमी पार्टी सम्बंधित अकसर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

आम आदमी पार्टी का गठन कब हुआ ?

आम आदमी पार्टी के गठन की घोषणा पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष अरविन्द केजरीवाल द्वारा 2 अक्टूबर 2012 को की गयी थी। आम आदमी पार्टी (AAP) का औपचारिक रूप से गठन 26 नवंबर 2012 को हुआ।

आम आदमी पार्टी (AAP) का गठन किस उद्देश्य से किया गया है ?

आम आदमी पार्टी (AAP) का गठन देश में व्याप्त भ्रष्टाचार दूर करके सिस्टम को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से किया गया था। आप के गठन के समय पार्टी के संस्थापक अरविन्द केजरीवाल द्वारा कहा गया था की राजनीति में फैली गन्दगी को दूर करने के लिए हमे सिस्टम में उतरना जरुरी है।

आम आदमी पार्टी का राजनीतिक इतिहास सम्बंधित जानकारी प्रदान करें ?

AAP Political History के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए ऊपर दिया गया आर्टिकल पढ़े। यहाँ आपको आम आदमी पार्टी का राजनीतिक इतिहास सम्बंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गयी है।

आम आदमी पार्टी (AAP) का उदय किस आंदोलन के फलस्वरूप हुआ ?

आम आदमी पार्टी (AAP) का उदय प्रख्यात समाजसेवी एवं भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलनकर्ता अन्ना हजारे के इण्डिया अगेंस्ट करप्शन नामक भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के फलस्वरूप हुआ था। इसी आंदोलन के पश्चात अरविंद केजरीवाल द्वारा आम आदमी पार्टी (AAP) का गठन किया गया था।

आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य कौन-कौन से है ?

आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में सबसे प्रमुख अरविन्द केजरीवाल है। साथ ही प्रशांत भूषण, कुमार विश्वास, योगेंद्र यादव, मनीष सिसोदिया, अजीत झा और आनंद कुमार भी इस पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल है।

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