महाभियोग (इम्पीचमेंट) क्या हैं एवं इसके नियम | What is impeachment, its Process In Hindi

आप सभी यह तो जानते ही हैं की भारत में सबसे बड़ा न्यायलय सुप्रीम कोर्ट ही है जो की दिल्ली में स्थित हैं। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट भारत का सबसे बड़ा न्यायालय है तो जो भी फैसला इसके द्वारा लिया जाता हैं वह आखरी फैसला होता है और उस फैसले का पालन सभी को करना पढता हैं और भारत के इस सबसे बड़े न्यायालय में यानि के सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश का कितना बड़ा औधा होता है। तो दोस्तों आप यह भी जानते होंगे की सुप्रीम कोर्ट के जज को भारत के राष्ट्रपति के द्वारा नियुक्त किया जाता हैं और अगर किसी कारणवश सुप्रीम कोर्ट के जज को उसके पद से हटाना पढ़े तो वह भी भारत के राष्ट्रपति के द्वारा ही किया जाता हैं लेकिन उसके लिए एक प्रक्रिया होती है और उस प्रक्रिया को महाभियोग (impeachment) कहा जाता है।

महाभियोग (इम्पीचमेंट) क्या हैं ?
What is impeachment,its Process

तो क्या आप महाभियोग के बारे में जानते हैं अगर नहीं तो आप निश्चिंत हो जाइये क्योंकि आज हम आपको इस लेख में महाभियोग से सम्बंधित बहुत सी जानकारी प्रदान करने वाले हैं जैसे की महाभियोग क्या हैं और इसके नियम क्या हैं आदि जैसी जानकारी। तो अगर आप भी इससे सम्बंधित अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो उसके लिए आपको हमारे इस लेख को अंत तक ध्यानपूर्वक पढ़ना होगा तब ही आप इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे

इसपर भी गौर करें :- सुप्रीम कोर्ट के जज की चयन प्रक्रिया |

महाभियोग क्या हैं ? What is impeachment ?

महाभियोग एक प्रकार की प्रक्रिया है जिसके चलते भारत के राष्ट्रपति को यह अधिकार होता हैं की वह भारत के सबसे बड़े न्यायलय के जज जिनको चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया भी कहते हैं उनको उस पद से हटाने का अधिकार होता हैं। केवल सुप्रीम कोर्ट के जज को ही नहीं बल्कि भारत के राष्ट्रपति को भी इस प्रक्रिया के दौरान उनके पद से हटाया जा सकता हैं और इस प्रक्रिया में राष्ट्रपति भारत के किसी भी हाई कोर्ट के जज को भी उनके पद से हटा सकते हैं। इसके बारे में भारत के संविधान में भी बताया गया हैं। इस प्रक्रिया के चलते भारत के राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट के जज को उनके कार्यकाल से पहले भी हटा सकते हैं। भारत के आर्टिकल 61 में इस प्रक्रिया का जिक्र किया गया हैं।

महाभियोग की परिभाषा – जब किसी भी सरकारी अधिकारी पर किसी प्रकार का अपराध का दोष होता हैं उसी प्रक्रिया को महाभियोग कहा जाता हैं। अगर आसान भाषा में कहे तो एक ऐसा अपराध जो की किसी व्यक्ति के महाभियोग का कारण बन सकता हैं।

केवल भारत में ही नहीं बल्कि और भी बहुत से देश ऐसे हैं जिसमे महाभियोग का जिक्र किया गया हैं और वहां पर भी इस प्रक्रिया का पालन किया जाता हैं उनमे कुछ देशो के नाम कुछ इस प्रकार हैं – आयरलैंड गणराज्य, रूस, फिलीपींस, दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका। इन सभी देशों में भी महभियोग की प्रक्रिया के चलते इन देशों के राष्ट्रपति को भी महाभियोग की प्रक्रिया का पालन करने का अधिकार हैं।

अनुच्छेद – 61 | Article – 61

महाभियोग के बारे में भारत के संविधान में भी बताया गया हैं। इसके बारे में भारत के संविधान में आर्टिकल – 61 में बताया हैं। इस आर्टिकल के चलते भारत के किसी भी उच्च अधिकारी पर अगर कोई भी अपराध का दोष होता हैं तो किसी भी उच्च अधिकारी चाहे वो भारत के चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया हो या फिर भारत के राष्ट्रपति उनको उनके पद से हटाने का अधिकार देती हैं।इस प्रक्रिया को तब लागू किया जाता हैं जब भारत के किसी भी उच्च अधिकारी के ऊपर कोई भी अपराध का दोष लगाया गया हो या फिर उनको उनके कार्य को ठीक से न करने के अपराध हो ता ही इस प्रक्रिया के चलते उनको उनके पद से हटाया जाता हैं।

राष्ट्रपति को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया

तो दोस्तों जैसा की हमने आपको बताया हैं की अगर भारत में कोई भी उच्च अधिकारी अगर किसी भी चीज का उल्लंघन करते हैं या फिर उनके ऊपर कोई भी अपराध का दोष हो तो भारत के राष्ट्रपति को भी उनके पद से हटाया जा सकता हैं जिसके लिए कुछ प्रक्रिया होती हैं जिसके बारे हम आपको यहाँ पर बताने वाले हैं तो कृपया इसको ध्यान से पढ़े

  • भारत के राष्ट्रपति को उनके पद से हटाने के लिए भी महाभियोग की प्रक्रिया के चलते ही हटाया जा सकता है लेकिन इस प्रक्रिया के चलते तब ही उनको उनके पद से हटाया जा सकता है अगर उन्होंने किसी भी कानून का उल्लंघन किया हो या फिर उनके ऊपर किसी चीज का आरोप का दोष हो।
  • किसी भी सदन के द्वारा महाभियोग की प्रक्रिया को राष्ट्रपति के खिलाफ शुरू की जा सकती हैं परन्तु उसके लिए उस सदन के एक चौथाई सदस्यों को एक पत्र लिखना होगा और उस पत्र में राष्ट्रपति के खिलाफ लगे सभी आरोपों को लिखित रूप में देना होगा और उसमे उन सभी सदस्यों के हस्ताक्षर भी करने होंगे और उस पत्र को करीब 14 दिन पहले सौंपना होता हैं।
  • जब राष्ट्रपति को उनके पद से हटाने के लिए पत्र को 14 दिन पहले दिया जाता है उसके बाद और जिस भी सदन के द्वारा वह आरोप लगाए गए हो उस सदन में महाभियोग की प्रक्रिय को जारी कर दिया जाता हैं और उस सदन के दो तिहाई सदस्यों के द्वारा मंजूरी दी जाती हैं तो फिर राष्ट्रपति को उनके पद से हटाने के लिए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी जाती हैं और फिर उसके बाद उस प्रस्ताव को दूसरे सदन में भेजा जाता हैं।
  • उसके बाद जब राष्ट्रपति पर आरोप लगाए जाते हैं राष्ट्रपति को भी अपने बचाव में बोलने का मुका दिया जाता हैं और वह अपने एक वकील को भी नियुक्त कर सकते हैं और उनपर जो भी इल्जाम लगे हो उसके खिलाफ बात कर सकते हैं।
  • अगर तब भी राष्ट्रपति अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत नहीं सभीत कर पाते हैं फिर उस सदन के उस सदन के बहुमड़ भी मिल जाती हैं और राष्ट्रपति को उनके पद से हटा दिया जाता हैं।
  • राष्ट्रपति का पद देश का बहुत ही महत्वपूर्ण पद होता है तो जब राष्ट्रपति को उनके पद से हटा दिया जाता हैं तोह उनकी गैर मौजूदगी में राष्ट्रपति का कार्य देश के उपराष्ट्रपति को दे दिया जाता हैं और राष्ट्रपति के पद पर उपराष्ट्रपति को दिया जाता हैं और उपराष्ट्रपति तब तक उस पद को सँभालते हैं जब नए राष्ट्रपति का चुनाव नहीं हो जाता हैं और नए राष्ट्रपति अपना कार्य सँभालते हैं।

अगर किसी कारण से जो भी आरोप राष्ट्रपति पर लगाए जाते हैं और राष्ट्रपति उन सभी आरोपों को गलत साबित करने में कामयाब होते हैं तो राष्ट्रपति को उनके पद से नहीं हटाया जाता हैं और महाभियोग की प्रक्रिया को वहीँ समाप्त कर दिया जाता हैं। भारत के इतिहास में देश के किसी राष्ट्रपति पर कोई भी आरोप नहीं लगाए गएँ है और किसी पर भी महाभियोग की प्रक्रिया को जारी नहीं किया गया हैं।

महाभियोग की प्रक्रिया से चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया

तो दोस्तों जैसा की हमने आपको बताया हैं की महाभियोग की प्रक्रिया से देश के सुप्रीम कोर्ट के जज यानि के चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया को उनके पद से हटाया जा सकता हैं लेकिन मुख्य न्यायधीश को उनके पद से हटाने का हक़ केवल देश के राष्ट्रपति को ही होता हैं और मुख्य न्यायधीश को उनके पद से हटाने के लिए आर्टिकल 124 (4) के चलते केवल राष्ट्रपति ही उनको उनके पद से हटा सकते हैं। इसकी प्रक्रिया के बारे में हम आपको यहाँ पर कुछ जानकारी देने वाले हैं तो कृपया ध्यान से पढ़े

  • आर्टिकल 124 (4) के अनुसार भारत के उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को उनके पद से हटाने का अधिकार केवल भारत के राष्ट्रपति के पास ही होता हैं।
  • भारतीय संविधान के अनुसार भारत के उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को केवल दो ही अवस्था में उनको उनके पद से हटाया जा सकता हैं पहली अवस्था हैं उनका दुर्व्यवहार और दूसरा कारण हैं अक्षमता। केवल इन दोनों अवस्था में ही उनको उनके पद से हटाया जा सकता हैं।
  • अगर किसी कारण से लोकसभा के सदस्यों के द्वारा मुख्य न्यायधीश को उनके पद से हटाने का प्रस्ताव रखा जाता हैं तो उसके लिए उनको एक पत्र लिखना होगा और उसमे लोकसभा के करीब 100 सांसदों के हस्ताक्षर की आवश्यकता होगी।
  • अगर इस प्रकार का प्रस्ताव राज्य सभा के सदस्यों के द्वारा रखा जाता हैं तो उनको भी एक पत्र लिखना होगा और उस पत्र में करीब 50 सांसदों के हस्ताक्षर की आवश्यकता होती हैं।
  • इस प्रकार का प्रस्ताव लोकसभा के सदस्यों के द्वारा लोकसभा के स्पीकर को सुंपा जाता हैं और वहीँ इस प्रकार का प्रस्ताव राज्यसभा के सदस्यों के द्वारा उनके चेयरमैन को सौंपा जाता हैं और उसके बाद स्पीकर या फिर चेयरमैन जिसके पास भी यह प्रस्ताव आता हैं तो वह इस प्रस्ताव पर अध्ययन करते हैं और अगर उनको यह प्रस्ताव सही लगता हैं तो वह इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देते हैं
  • मंजूरी मिलने के बाद एक समिति का निर्माण किया जाता हैं और मुख्य न्यायधीश पर लगे सभी इल्जाम की जांच पड़ताल की जाती हैं इस समिति में एक सुप्रीम कोर्ट के और एक हाई कोर्ट के जज को अवश्य लिया जाता हैं और प्रतिष्ठित न्यायवादी को भी इस जांच पड़ताल के लिए जिम्मेदारी दी जाती हैं।
  • उसके बाद यह सभी जांच पड़ताल करते हैं और एक रिपोर्ट तैयार करते हैं और अगर इस रिपोर्ट में मुख्य न्यायधीश को दोषी पाया जाता हैं तो उसके बाद उस रिपोर्ट को दोनों सदनों को सौंप दिया जाता हैं और उसके बाद दोनों सदनों में इस मुख्य न्यायधीश को उनके पद से हटाने के लिए वोटिंग की जाती हैं।
  • अगर वोटिंग में दो तिहाई सदस्य इस प्रस्ताव की सहमति देते हैं तो इस प्रस्ताव और रिपोर्ट को राष्ट्रपति को सौंप दिया जाता हैं जिसके बाद राष्ट्रपति के द्वारा उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को उनके पद से हटा दिया जाता हैं
  • इसी प्रक्रिया से उच्च न्यायालय के न्यायधीश को भी उनके पद से हटाया जा सकता है और इन प्रक्रिया के बारे में भारत के संविधान में बताया हैं जो की आर्टिकल 124 (4), (5), 217 और 218 में हैं।

महाभियोग से सम्बंधित कुछ प्रश्न

महाभियोग की परिभाषा क्या हैं ?

जब किसी भी सरकारी अधिकारी पर किसी प्रकार का अपराध का दोष होता हैं उसी प्रक्रिया को महाभियोग कहा जाता हैं। अगर आसान भाषा में कहे तो एक ऐसा अपराध जो की किसी व्यक्ति के महाभियोग का कारण बन सकता हैं।

क्या आज तक महाभियोग की प्रक्रिया से भारत के किसी भी राष्ट्रपति को उसके पद से हटाया गया हैं ?

जी नहीं, आज तक महाभियोग की प्रक्रिया से भारत के किसी भी राष्ट्रपति को उसके पद से हटाया नहीं गया हैं।

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को उसके पद से हटाने का अधिकार किसको होता हैं ?

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को उसके पद से हटाने का अधिकार केवल राष्ट्रपति को होता हैं।

महाभियोग के बारे कौनसे आर्टिकल में बताया गया हैं ?

महाभियोग के बारे में भारत के संविधान के Article – 61 में बताया गया हैं।

Leave a Comment