उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल और उनकी यात्रा – Top Religious Places in Uttarakhand in Hindi

उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल:- देवभूमि के नाम से विख्यात उत्तराखंड हिंदू धर्म के अनुयायियों के मध्य प्राचीन काल से ही आस्था का केंद्र रहा है। प्रथम बार ऋग्वेद में वर्णित उत्तराखंड अपनी आध्यात्मिक एवं प्राकृतिक धरोहर के लिए भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है। देवराज हिमालय के स्वर्णिम शिखरों से लेकर गँगा-यमुना के मायके, चारधामों में शामिल भगवान “बद्रीनाथ”, भारत के सबसे ऊँचाई पर स्थित ज्योतिर्लिंग में शुमार “केदारनाथ” एवं योग नगरी “ऋषिकेश” के लेकर हरी के द्वार “हरिद्वार” जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों से विभूषित देवभूमि उत्तराखंड प्राचीन काल से हिन्दू धर्म में प्रमुख महत्व रखती है। प्रतिवर्ष आयोजित की जानी वाली “छोटा चारधाम यात्रा” के अतिरिक्त पंचबद्री, पंचकेदार एवं पंचप्रयाग यात्रा के लिए प्रसिद्ध यह भूमि सैकड़ो प्राचीन तीर्थ-स्थलों का स्रोत है। देवभूमि उत्तराखंड के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व को देखते हुए प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु इस पवित्र स्थान की यात्रा करते है।

उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल
उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल

अगर आप भी उत्तराखंड के पवित्र वातावरण में अध्यात्म एवं शान्ति के कुछ पल बिताने की सोच रहे है तो आज के इस आर्टिकल के माध्यम से उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल और उनकी यात्रा (Top Religious Places in Uttarakhand in Hindi) के बारे में जानकारी प्रदान करने वाले है। उत्तराखंड के पवित्र तीर्थों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के अतिरिक्त आप सभी तीर्थों के धार्मिक महत्व से भी भलीभाँति परिचित हो सकेंगे।

उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल एवं यात्रा

भारत के उत्तरी राज्य उत्तराखंड का सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद में किया गया है जहाँ इस भूमि को “देवभूमि” के नाम से सम्बोधित किया गया है। प्राचीन काल से ही उत्तराखंड अपने धार्मिक महत्व के लिए हिन्दू धर्म में प्रमुख स्थान रखता है यही कारण है की यहाँ हिन्दू धर्म से जुड़े हुए विभिन तीर्थ मौजूद है। यहाँ आपको देवभूमि उत्तराखंड के सभी प्रमुख तीर्थों के बारे में जानकारी प्रदान की गयी है।

बद्रीनाथ (Badrinath in Hindi)

उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल

भगवान विष्णु को समर्पित बद्रीनाथ धाम भारत के चार धामों में शामिल तीर्थ है जो की हिन्दू धर्म के अनुयायियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। वैष्णव मत से सम्बंधित बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है जो की नर एवं नारायण पर्वतों के मध्य में बसा है। प्राचीन काल से ही हिन्दू तीर्थ यात्री दुर्गम बीहड़ों को पार करते हुए इस पवित्र स्थल के दर्शन को आते रहे है। भगवान नारायण को समर्पित बद्रीनाथ धाम में प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु भगवान की एक झलक पाने के लिए लम्बी दूरी तय करके इस स्थान पर आते है। बद्रीनाथ धाम को भारत के चार धामों में स्थापित करने के श्रेय आदिगुरु शंकराचार्य को जाता है जिन्होंने नवी शताब्दी में इस मंदिर को निर्मित करवाया। आधुनिक मंदिर का निर्माण गढ़वाल के परमार वंश के शासकों ने एवं पुनर्निर्माण राजपूत शासकों ने करवाया है। शंकु शैली में निर्मित बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड के सबसे पवित्र तीर्थ स्थल में शुमार है। यह उत्तराखंड के “छोटा चारधाम यात्रा” स्थल में शुमार प्रमुख तीर्थ है।

केदारनाथ (Kedarnath in Hindi)

उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल

लगभग 3500 मीटर की ऊँचाई पर स्थित केदारनाथ भगवान शिव को समर्पित भारतवर्ष का अत्यंत प्राचीन एवं पवित्र शिव मंदिर है जिसे की भारत के 12 प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों में शुमार किया गया है। भगवान शिव के निवास स्थल माने जाने वाले केदारनाथ की महत्ता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है प्रतिवर्ष अप्रैल माह से नवंबर माह तक खुलने वाले केदारनाथ मंदिर के दर्शन के लिए भक्त पूरे वर्ष इन्तजार करते रहते है। केदारनाथ मंदिर की स्थापना भी आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा 8वीं शताब्दी में की गयी है जिसका आधुनिक स्वरुप कत्यूरी राजाओं द्वारा निर्मित किया गया है। यहाँ आदिगुरु शंकराचार्य की समाधि एवं प्रसिद्ध मूर्ति भी स्थापित है। शिवधाम के रूप में प्रसिद्ध केदारनाथ उत्तराखंड के चार धामों में भी प्रमुख स्थान रखता है।

गंगोत्री (Gangotri In Hindi)

उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल

“माँ गंगा का मायका” के रूप में प्रसिद्ध गंगोत्री भारत की सबसे पवित्र नदी माँ गंगा के उदगम स्थल के रूप में जाना जाता है जहाँ गंगा माँ सर्वप्रथम धरती पर अवतरित हुयी थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए राजा भागीरथी द्वारा माँ गंगा की कठिन तपस्या की गयी थी जिसके पश्चात माँ गंगा नदी के रूप में इस धरती पर अवतरित हुयी थी। उत्तराखंड के छोटा चार धाम में शुमार गंगोत्री में माँ गंगा को समर्पित गंगोत्री माता मंदिर है जिसके निर्माण का श्रेय गोरखा शासक अमरसिंह थापा को जाता है। उत्तराखंड दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को गंगोत्री में गंगा स्नान से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है।

यमुनोत्री (Yamunotri in Hindi)

Yamunotri

“माँ यमुना का मायका” के रूप में प्रसिद्ध यमुनोत्री यमुना माता का उदगम स्थल है जहाँ यमुना नदी बन्दरपूँछ श्रेणी से शुरू होती है। यम की बहन एवं कृष्ण की पटरानी के रूप में जानी जाने वाली यमुना को, यमुना नदी के उदगम स्थल होने के कारण यहाँ यमुनोत्री मंदिर का निर्माण करवाया गया है जो की श्रद्धालुओं के मध्य आस्था के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है। 3293 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यमुनोत्री मंदिर को उत्तराखंड के छोटा चार धामों में भी शुमार किया जाता है। उत्तराखंड के चार पवित्र तीर्थों की यात्रा (छोटा चार धाम) में शुमार यमुनोत्री से ही चार धामों का दर्शन प्रारम्भ किया जाता है।

ऋषिकेश (Rishikesh in Hindi)

Rishikesh

योग नगरी के रूप में विख्यात ऋषिकेश उत्तराखंड के सबसे पवित्र तीर्थ एवं आध्यात्मिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है। प्राचीन काल से ही यह स्थल ऋषि-मुनियों का पसंदीदा स्थल रहा है जहाँ प्राचीन काल से विभिन आध्यात्मिक संतो में द्वारा ध्यान, योग-साधना एवं चिंतन मनन किया जाता रहा है। वर्तमान समय में भी यह स्थल आध्यात्मिकता एवं शान्ति के कारण लाखों देशी एवं विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। प्राचीन काल में कुब्जाम्रक के नाम से विख्यात ऋषिकेश योग के लिए प्रसिद्ध होने के कारण “योग की वैश्विक राजधानी (yoga capital of the world)” के नाम से विख्यात है। इसके अतिरिक्त यहाँ आध्यात्मिक अनुभूति एवं योग-वेदांत दर्शन के साथ-साथ साहसिक गतिविधियाँ भी की जा सकती है।

हरिद्वार (Haridwar in Hindi)

Haridwar punyabhumi

हरी का द्वार, मोक्ष द्वार, गंगाद्वार, तीर्थों का द्वार, चारों धामों का द्वार, बैकुंठ एवं कुम्भ नगरी के नाम से प्रसिद्ध हरिद्वार विभिन हिन्दू पौराणिक ग्रंथो में सबसे पवित्र तीर्थ माना गया है जिसके दर्शन मात्र से ही मानव मात्र को मोक्ष को प्राप्ति हो जाती है। हरी के द्वार के नाम से प्रसिद्ध हरिद्वार हिन्दू धर्म के श्रद्धालुओं के मध्य पवित्र तीर्थ के रूप में विख्यात है जो की शैव एवं वैष्णव मत के अनुयायियों के लिए समान आस्था रखता है। शिव धाम केदारनाथ जाने वाले यात्री इसे “हरद्वार” जबकि विष्णु धाम बद्रीनाथ जाने वाले यात्री इसे “हरिद्वार” के नाम से जानते है। मोक्ष नगरी हरिद्वार में स्थित हर की पैड़ी में गंगा स्नान को सभी पापों से मुक्ति का मार्ग एवं अत्यंत कल्याणदायक बताया गया है।

त्रिजुगीनारायण (Trijuginarayan in Hindi)

Trijuginarayan

भगवान भोलेनाथ एवं माँ पार्वती के विवाह स्थल के रूप में प्रचलित त्रिजुगीनारायण उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार त्रिजुगीनारायण ही वह स्थल है जहाँ भगवान शिव एवं माता पार्वती का विवाह भगवान विष्णु की उपस्थिति में सम्पन हुआ था। जानकारी के लिए बता दे की उत्तराखंड में माँ पार्वती को नंदा के रूप में पूजा जाता है एवं इनकी विदाई के रूप में प्रति 12 वर्षो के अंतराल पर विश्व प्रसिद्ध “नंदा राजजात यात्रा” का आयोजन भी किया जाता है। त्रिजुगीनारायण धाम में आज भी यहाँ अनंत धूनी जलती रहती है जिसके बारे में माना जाता है की यह धूनी शिव-पार्वती विवाह के समय से ही निरंतर प्रज्ज्वलित हो रही है। इस धूनी का माथे पर तिलक करना एवं प्रसाद के रूप में ले जाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

पंचबद्री (Panchbadri in Hindi)

Panchbadri

पंचकेदार के अतिरिक्त देवभूमि उत्तराखंड भगवान श्री हरी को समर्पित पंचबद्री का भी प्रमुख स्थल है। पंचबद्री वे स्थल है जहाँ भगवान विष्णु के विभिन रूपों की पूजा की जाती है। उत्तराखंड घूमने आये श्रद्धालुओ के लिए सबसे अच्छी बात यह है की उन्हें पंचबद्री घूमने के लिए अलग-अलग जगहों को देखने की आवश्यकता नहीं है। पंचबद्री में शामिल सभी 5 तीर्थ स्थल उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है एवं यह सभी तीर्थ प्रथम बद्री भगवान बद्रीनाथ मंदिर के मार्ग के समीप स्थित है। उत्तराखंड के पंचबद्री का विवरण इस प्रकार से है :- बद्रीनाथ, आदिबद्री, वृद्धबद्री, योगध्यान बद्री, भविष्य बद्री। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कलयुग में जब भगवान बद्रीविशाल, बद्रीनाथ से विलुप्त हो जाएँगे तो भविष्य बद्री में पूर्ण रूप से पुनः अवतरित होंगे।

पंचकेदार (Panchkedar in Hindi)

Panchkedar

देवभूमि के नाम से विख्यात उत्तराखंड को भगवान शिव का पवित्र स्थल माना गया है जिसके कारण यहाँ भगवान शिव विभिन रूपों में विराजमान है। भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध धाम केदारनाथ के अतिरिक्त उत्तराखंड में चार अन्य केदार भी स्थित है जिन्हे केदारनाथ के साथ संयुक्त रूप से “पंचकेदार” के नाम से जाना जाता है। उत्तराखंड के पंचकेदार की कथा महाभारत काल से जुडी हुयी है। कहा जाता है महाभारत युद्ध के बाद पाप हत्या से मुक्ति के लिए जब पांडव भगवान शिव से मिलना चाहते थे तो भगवान शिव पांडवो को महाभारत युद्ध में स्वजन हत्या के पाप के कारण दर्शन नहीं देना चाहते थे और इसलिए भगवान शिव ने बैल रूप धारण कर लिया। इसके पश्चात बैल रूप में भगवान शिव के शरीर के भाग विभिन स्थानों पर प्रकट हुए जिन्हे पंचकेदार कहा गया। यहाँ आपको उत्तराखंड के पंचकेदार धामों का संक्षिप्त वर्णन दिया जा रहा है :-

  • केदारनाथ – प्रथम केदार के रूप में वर्णित, रुद्रप्रयाग जिले में स्थित, भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे अधिक ऊँचाई पर स्थित, भगवान शिव के कूबड़ भाग के रूप में पूजा
  • तुंगनाथ – रुद्रप्रयाग जिले में स्थित, भगवान शिव के भुजाओ की पूजा, विश्व का सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिर
  • मद्महेश्वर- रुद्रप्रयाग जिले में स्थित, भगवान शिव की नाभि भाग की पूजा
  • कल्पनाथ- चमोली जिले में स्थित, भगवान शिव के जटाओं की पूजा
  • रुद्रनाथ- चमोली जिले में स्थित, भगवान शिव के मुख की पूजा

पंचप्रयाग (Panchprayag in Hindi)

Panchprayag uttarakhand

पंचबद्री एवं पंचकेदार के अतिरिक्त पाँच पवित्र नदियों के संगम स्थल होने के कारण देवभूमि उत्तराखंड में पंचप्रयाग भी स्थित है। पंचप्रयाग में उत्तराखंड के 5 पवित्र नदी संगम स्थलों को शामिल किया गया है जिनके वर्णन पौराणिक ग्रंथो में समग्र पापनाशक एवं अत्यंत पुण्यदायक स्थलों के रूप के किया गया है। यहाँ आपको उत्तराखंड के सभी पंचप्रयागो के बारे में जानकारी प्रदान की गयी है :-

  • विष्णुप्रयाग (प्रथम प्रयाग)- पश्चिमी धौलीगंगा का अलकनंदा में संगम
  • नंदप्रयाग (द्वितीय प्रयाग)- नंदाकिनी नदी का अलकनंदा में संगम
  • कर्णप्रयाग (तृतीय प्रयाग)- पिंडर नदी का अलकनंदा में संगम
  • रूद्रप्रयाग (चतुर्थ प्रयाग)- मंदाकिनी नदी का अलकनंदा में संगम
  • देवप्रयाग (पंचम प्रयाग)- भागीरथी एवं अलकनंदा का संगम, सबसे महत्वपूर्ण प्रयाग

जागेश्वर धाम मंदिर (Jageshwar dham mandir)

Jageshwar dham mandir

“उत्तराखंड का पाँचवा धाम” के रूप में प्रसिद्ध जागेश्वर धाम मंदिर उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित है जो की अपनी प्राचीनता, भव्यता एवं आध्यात्मिक अनुभूति के कारण श्रद्धालुओं के मध्य प्रसिद्ध है। वर्तमान में यहाँ 124 मंदिरो का विशाल समूह है जिसका निर्माण कत्यूरी वंश के राजा शालिवाहन देव द्वारा निर्मित माना जाता है। 8वीं सदी में निर्मित इस मंदिर समूह में सबसे पुराना मंदिर “महामृत्यंजय मंदिर” है वही सबसे बड़ा मंदिर होने का गौरव “दिनदेशवारा मंदिर” को प्राप्त है। अगर आप उत्तराखंड घूमने आये है तो यह मंदिर समूह आपकी आध्यात्मिक यात्रा को पूर्ण करने में फलदायक है।

इस प्रकार से इस आर्टिकल के माध्यम से आपको देवभूमि उत्तराखंड के महत्वपूर्ण तीर्थ-स्थलों सूची प्रदान की गयी है।

उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल और उनकी यात्रा सम्बंधित प्रश्न (FAQ)

उत्तराखंड क्यों प्रसिद्ध है ?

देवभूमि के नाम से विख्यात उत्तराखंड हिन्दू धर्म के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों के कारण प्रसिद्ध है। भारतवर्ष में पूजनीय देवराज हिमालय के अतिरिक्त यहाँ भगवान शिव को समर्पित केदारनाथ एवं अन्य प्राचीन शिवालय है। साथ ही वैष्णव मत के अनुयायियों के लिए भारत के चार धामों में सम्मिलित बद्रीनाथ धाम के अतिरिक्त यहाँ पंचबद्री, पंचकेदार, पंचप्रयाग जैसे पवित्र तीर्थ एवं योगनगरी ऋषिकेश एवं कुम्भनगरी हरिद्वार जैसे प्राचीन हिन्दू पौराणिक तीर्थ है।

उत्तराखंड किस प्रकार की यात्रा हेतु अनुकूल है ?

देवभूमि उत्तराखंड प्राचीन काल से ही हिन्दू धर्म में पवित्र भूमि मानी गयी है। इसका सर्वप्रथम वर्णन ऋग्वेद में किया गया है जहाँ इसे देवभूमि नाम से सम्बोधित किया गया है। उत्तराखंड धार्मिक एवं आध्यात्मिक यात्रा के लिए श्रद्धालुओं के मध्य प्रसिद्ध रहा है साथ ही साहसिक यात्रा, कैंपिंग, ट्रैकिंग, क्लाइम्बिंग, पर्वतारोहण एवं अडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए भी यह स्थल प्रसिद्ध है।

चार धाम भारत में स्थित है या उत्तराखंड में ?

चार धाम भारत एवं उत्तराखंड दोनों ही जगहों में स्थित है। भारत के चार धामो को “चार धाम” जबकि उत्तराखंड में स्थित चार धाम को “छोटा चार धाम” कहा जाता है। भारत के चार धामों में बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथपुरी एवं रामेश्वरम शामिल है जबकि उत्तराखंड में स्थित “छोटा चार धाम” में बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री एवं यमुनोत्री स्थित है।

उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों के बारे में जानकारी प्रदान करें ?

उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए ऊपर दिया गया आर्टिकल पढ़े। यहाँ आपको देवभूमि उत्तराखंड के सभी प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गयी है।

योगनगरी के रूप में उत्तराखंड का कौन सा नगर प्रसिद्ध है ?

उत्तराखंड में स्थित ऋषिकेश को योगनगरी के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त है जिसे की “योग की वैश्विक राजधानी (yoga capital of the world) के रूप में भी जाना जाता है।

उत्तराखंड के पंचकेदार में कौन-कौन से केदार शामिल है ?

उत्तराखंड के पंचकेदार में निम्न 5 केदार को शामिल किया गया है :- केदारनाथ ,तुंगनाथ, मद्महेश्वर, कल्पनाथ, रुद्रनाथ

उत्तराखंड में स्थित पंचबद्री में कौन-कौन से बद्री शामिल है ?

उत्तराखंड में स्थित पंचबद्री निम्न है :- बद्रीनाथ, आदिबद्री, वृद्धबद्री, योगध्यान बद्री, भविष्य बद्री

उत्तराखंड के पंचप्रयागों में कौन-कौन से प्रयाग शामिल है ?

उत्तराखंड के पंचप्रयागों में विष्णुप्रयाग, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग एवं देवप्रयाग शामिल है।

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