सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: वसीयत किए बगैर पिता की मृत्यु होने पर भी बेटियों को संपत्ति में हक, पढ़िये पूरा मामला

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पिता की सम्पति पर बेटी के हक़ को लेकर एक अहम् फैसला दिया है. वसीयत सम्बंधित कानून पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा की अगर पिता की मृत्यु बिना वसीयत लिखे ही हो जाती है तो बेटी को भी उसकी सम्पति में बराबर का हक़ मिलेगा. इससे लम्बे समय से इस मुद्दे पर चल रही बहस पर भी विराम लग गया है की बिना वसीयत छोड़े पिता की सम्पति पर बेटियों का हक़ है या नहीं साथ ही अब बेटियों को भी पिता की सम्पति पर बराबर का हक़ मिलने का रास्ता साफ हो गया है. चलिए जानते है क्या है पूरी खबर

क्या कहा कोर्ट ने अपने फैसले में

हिंदू उत्तराधिकार कानून में सम्पति अधिकार को लेकर जस्टिस अब्दुल नजीर और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने सुनवाई करते हुये एक अहम् फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा 51 पन्नों के फैसले में कहा गया है की अगर संयुक्त परिवार का कोई व्यक्ति बिना वसीयत लिखे हुये ही मर जाता है ऐसी सिचुएशन में उसकी बेटी का भी पिता की सम्पति पर बराबर का अधिकार होगा. कोर्ट ने कहा की व्यक्ति की स्वअर्जित सम्पति और विरासत पर बेटियों को को बेटों के समान हक़ है जिसमे कोर्ट ने हिन्दू महिलाओ और त्याजक्त महिलाओं के साथ विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को भी शामिल किया है.

हिन्दू उत्तराधिकार कानून 1956 में संसोधन करते हुये कोर्ट ने कहा की पिता की सम्पति पर पिता के भाई की बेटो की अपेक्षा बेटी को प्राथमिकता दी जाएगी साथ ही सम्पति का बँटवारा भी भाई-बहन आपसी सहमति से करेंगे.

बेटियों को मिलेगा हक़

हिन्द उत्तराधिकार कानून 1956 में बेटियों को पिता की सम्पति में भाइयों द्वारा सम्पति चुनने के बाद ही सम्पति मिलने का हक़ दिया गया था हालांकि 2005 में इस फैसले में बदलाव करते हुये कोर्ट द्वारा साफ़ किया गया था की बेटियों को भी पिता की सम्पति में बराबर का हक़ होगा. इस सम्बन्ध में कोर्ट द्वारा फैसला देते हुये कहा गया था की अगर फैसला लागू होने की तारीख 9 सितम्बर 2005 तक पिता के जीवित होने की स्थिति में ही बेटी को बराबर का हक़ होगा हालांकि अगर पिता की फैसले से पहले मृत्यु हो चुकी है तो इस स्थिति में हिन्दू सम्पति उत्तराधिकार कानून 1956 ही लागू रहेगा. इस फैसले को 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया था और पिता की मृत्यु इस फैसले से पूर्व होने पर भी बेटियों को बराबर का उत्तराधिकारी माना गया था.

यह है फैसले की अहम् बातें

बता दे की सुप्रीम कोर्ट द्वारा साफ़ किया गया है की पिता से प्राप्त सम्पति पर बेटी की मृत्यु की स्थिति में सम्पति पर मायके पक्ष जबकि ससुराल से प्राप्त सम्पति पर ससुराल पक्ष वालो का अधिकार रहेगा साथ ही हिन्दू सम्पति अधिकार कानून 1956 की धारा 15(1) की व्याख्या करते हुये कोर्ट ने कहा की इसका उद्देश्य इसे मूल स्रोत को वापस करना है.

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