NEET: सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण को बताया सही, सामाजिक न्याय के लिए आरक्षण जरूरी

सुप्रीम कोर्ट द्वारा NEET-UG और PG के कोर्सो में दाखिले के लिए सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 फीसदी और ईडब्ल्यूएस (EWS) को 10 फ़ीसदी आरक्षण देने के फैसले पर मुहर लगा दी गयी है. इससे सरकार द्वारा NEET-UG और PG काउंसलिंग में इन वर्गों को आरक्षण देने का रास्ता साफ़ हो गया है. इस बारे में ट्वीट करते हुये केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है और इसे सामाजिक न्याय के क्षेत्र में मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करने वाला बताया है. इस फैसले के बाद स्टेट लेवल पर भी इन वर्गों को मेडिकल की काउंसलिंग में लाभ मिलेगा.

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

NEET-UG और PG कोर्सो मे काउंसलिंग के लिए आरक्षण पर सुनवाई करते हुये सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और  न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की विशेष पीठ ने सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 फीसदी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों के 10 फ़ीसदी आरक्षण को सही ठहराते हुये इसकी संवैधानिकता को बरकरार रखा. इस मामले पर टिप्पणी करते हुये सुप्रीम कोर्ट ने कहा की मेरिट के साथ-साथ आरक्षण भी सामाजिक न्याय के लिए जरुरी है और ये एक दूसरे के विरोधी नहीं है. साथ ही कोर्ट ने EWS वर्ग के लिए 8 लाख वार्षिक आय की सीमा को भी बरक़रार रखा है. जानकरी के लिए बता दे की सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण के साथ NEET-PG काउंसलिंग की अनुमति दी जा चुकी है जिसके पहले चरण की काउंसलिंग शुरू की जा चुकी है.

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