National Energy Conservation Day 2022: जानें क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस, क्या है इसका इतिहास

आधुनिक समय में ऊर्जा का हमारे जीवन में अत्यंत महत्व है। हमारे प्रतिदिन के जीवन में घरो में उपयोग की जाने वाली विद्युत् से लेकर विशाल फैक्ट्रीज एवं ऑटोमोबाइल से लेकर वृहद् प्रोजेक्ट के लिए ऊर्जा का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। हम प्रतिदिन के जीवन में विभिन रूपों में ऊर्जा का उपयोग करते है अतः भविष्य में ऊर्जा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसका संरक्षण आवश्यक है। भारत सरकार द्वारा भी देश को नागरिको को ऊर्जा संरक्षण के बारे में जागरूक करने के लिए प्रतिवर्ष ऊर्जा संरक्षण दिवस मनाया जाता है जिससे की देश के नागरिक भी ऊर्जा संरक्षण में सक्रिय योगदान दे सके। आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस (National Energy Conservation Day 2022), इसका इतिहास, ऊर्जा संरक्षण का महत्व एवं इसे मनाने के कारणों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करने वाले है। साथ ही इस आर्टिकल के माध्यम से आपको देश में ऊर्जा संरक्षण के प्रयासों के बारे में भी सम्पूर्ण जानकारी प्रदान की जाएगी।

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राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस
राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस

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राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस

प्रतिदिन के जीवन में विभिन कार्यो के संचालन के लिए ऊर्जा अत्यंत महत्वपूर्ण साधन है। वर्तमान समय में दुनिया की अर्थव्यवस्था को संचालित करने के लिए ऊर्जा सबसे प्रमुख साधन है जिसके माध्यम से विभिन उद्योगों, ऑटोमोबाइल, फैक्ट्रीज, गैजेट, मशीने, घरेलू उपयोग की वस्तुएँ एवं विभिन प्रोजेक्ट का संचालन किया जाता है। दुनिया की अर्थव्यवस्था में वृद्धि के साथ-साथ प्रतिवर्ष ऊर्जा की माँग भी बढ़ती जा रही है ऐसे में ऊर्जा संरक्षण आवश्यक है।

साथ ही भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भी ऊर्जा का संरक्षण आवश्यक है। भारत सरकार द्वारा देश में ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने एवं देश के नागरिको को ऊर्जा संरक्षण में सक्रिय भूमिका को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस मनाया जाता है।

ऊर्जा संरक्षण से तात्पर्य विभिन उपायों के माध्यम से ऊर्जा का संरक्षण करना है जिसमे ऊर्जा का इस प्रकार से उपभोग किया जाता है ताकि ऊर्जा का विवेकपूर्ण तरीके से संरक्षण किया जा सके। ऊर्जा संरक्षण के अंतर्गत विभिन कार्यो के माध्यम से ऊर्जा का उपयोग इस प्रकार किया जाता है जिससे की वर्तमान आवश्यता की पूर्ति के साथ भविष्य की जरूरतें भी पूरी हो सकें।

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राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस कब मनाया जाता है ?

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस (National Energy Conservation Day) का आयोजन प्रतिवर्ष 14 दिसंबर को किया जाता है। राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस को भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत एक संवैधानिक निकाय ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) के अंतर्गत संचालित किया जाता है जिसका उद्देश्य ऊर्जा संरक्षण के कार्यक्रमों के साथ भारत सरकार द्वारा ऊर्जा संरक्षण हेतु योजनाओ एवं देश की उपलब्धियों को प्रस्तुत करना है। राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस को ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001 के पश्चात प्रतिवर्ष 14 दिसंबर को मनाया जाता है।

ऊर्जा संरक्षण क्या है ?

ऊर्जा संरक्षण से तात्पर्य ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग है। इसका अर्थ है ऊर्जा का अनावश्यक उपयोग ना करना एवं कम से कम ऊर्जा का उपयोग करते हुए कार्य को करना। अनावश्यक बिजली का बल्ब ना जलाना, लाईट, पंखे, एसी एवं अन्य विद्युत के उपकरणों को प्रयोग ना होने पर बंद करना, छोटी दूरियों के लिए पैदल दूरी तय करना या निजी वाहन की जगह सार्वजनिक वाहन का उपयोग तथा इसी प्रकार के अन्य कार्यो के माध्यम से ऊर्जा का दुरपयोग एवं अनावश्यक प्रयोग रोकना ही ऊर्जा संरक्षण के अंतर्गत आता है।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस, इतिहास

देश में ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों एवं भविष्य की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2001 में भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) द्वारा ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001 को लागू किया गया। इस अधिनियम के अंतर्गत देश में ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए विभिन कार्यक्रमों के माध्यम से ऊर्जा संरक्षण को सुनिश्चित किया गया था। इस अधिनियम के पश्चात ही प्रतिवर्ष ऊर्जा संरक्षण हेतु 14 दिसंबर को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस का आयोजन किया जाता है। राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस अधिनियम 2001 के अंतर्गत देश में ऊर्जा संरक्षण के लिए निम्न प्रमुख बिदुओ को तय किया गया है :-

  • उपकरणों की लेबलिंग एवं मानक निर्धारण- इसके तहत विभिन ऊर्जा उपकरणों की दक्षता को सुनिश्चित करने के लिए मानक निर्धारित किए गए।
  • ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (ECBC)– वाणिज्यिक भवनों में ऊर्जा संरक्षण हेतु नियम
  • ऊर्जा गहन उद्योगों हेतु ऊर्जा खपत मानक- अधिक ऊर्जा उपयोग वाले उद्योगों हेतु ऊर्जा संरक्षण के लिए नियम

ऊर्जा संरक्षण का उद्देश्य

ऊर्जा संरक्षण दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग एवं भविष्य की जरुरतो को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा का उपयोग करना है। ऊर्जा संरक्षण दिवस के माध्यम से नागरिकों को ऊर्जा संरक्षण के बारे में जागरूक किया जाता है एवं ऊर्जा की भविष्य की आवश्यकता के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है। साथ ही इस दिवस के माध्यम से ऊर्जा संरक्षण हेतु नागरिको को विभिन उपायों की जानकारी के माध्यम से सहभागिता द्वारा ऊर्जा संरक्षण में वृहद् लक्ष्य प्राप्त करने का प्रयास भी किया जाता है।

ऊर्जा संरक्षण में हमारा योगदान

ऊर्जा संरक्षण वास्तव में देश के आम नागरिको की सहभागिता से ही संभव है। एक जागरूक नागरिक होने के नाते प्रतिदिन के जीवन में छोटे-छोटे कार्यो के माध्यम से हम ऊर्जा संरक्षण में अहम योगदान दे सकते है एवं ऊर्जा संरक्षण के आंदोलन को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभा सकते है। प्रतिदिन के जीवन में अनावश्यक जल रहे बिजली के बल्ब, ए.सी. पंखे एवं बिजली को अन्य उपकरणों को बंद करके हम ऊर्जा संरक्षण में अपनी भूमिका निभा सकते है। साथ ही निजी वाहन की जगह सार्वजनिक वाहन के उपयोग एवं उपयोग ना होने पर ट्रैफिक में गाड़ी का इंजन बंद करके हम ऊर्जा संरक्षण के माध्यम से बदलाव का वाहक बन सकते है।

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राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस सम्बंधित अकसर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

ऊर्जा संरक्षण क्या है ?

ऊर्जा संरक्षण से तात्पर्य ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग करना है जिसके तहत ऊर्जा के अनावश्यक उपयोग को हतोत्साहित किया जाता है।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस कब मनाया जाता है ?

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस को प्रतिवर्ष 14 दिसंबर को मनाया जाता है।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस को किसके माध्यम से संचालित किया जाता है ?

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस को भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) द्वारा प्रतिवर्ष 14 दिसंबर को मनाया जाता है।

ऊर्जा संरक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या है ?

ऊर्जा संरक्षण का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग एवं भविष्य को जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा का संरक्षण करना है।

ऊर्जा संरक्षण क्यों आवश्यक है ?

ऊर्जा संरक्षण के माध्यम से भविष्य में ऊर्जा की जरूरतों को सतत ऊर्जा संरक्षण के लक्ष्यों के माध्यम से पूर्ण किया जा सकेगा साथ ही यह ऊर्जा के समुचित एवं विवेकपूर्ण दोहन हेतु आवश्यक है।

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