लकवे का घरेलू इलाज : Paralysis Ka Gharelu ilaaj

लकवा एक ऐसी बीमारी है जो की इंसान के पूरे शरीर या शरीर के किसी ख़ास हिस्से को सुन्न कर देती है जिससे की इंसान के उस अंग की सभी गतिविधियाँ ठप पड़ जाती है साथ ही उसके लकवाग्रस्त हिस्से की सँवेदना भी खत्म हो जाती है। इससे ना सिर्फ इंसान का शरीर और लकवाग्रस्त हिस्सा काम करना बंद कर देता है बल्कि उसके शरीर के अन्य अंगो पर भी इसका प्रभाव पड़ने लगता है। आयुर्वेद में लकवा को पक्षाघात कहकर वर्णन किया गया है जिससे की इंसान असहाय हो जाता है साथ ही उसे हर काम के लिए दूसरे लोगो पर भी निर्भर रहना पड़ता है। हालांकि आयुर्वेद में कुछ ऐसे घरेलू उपाय बताये गए है जिनका की अगर नियमित पालन किया जाये तो लकवा जैसी बीमारी को भी मात दी जा सकती है। आइये जानते है लकवे का घरेलू इलाज के बारे में।

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लकवे का घरेलू इलाज : Paralysis Ka Gharelu Ilaaj
लकवे का घरेलू इलाज : Paralysis Ka Gharelu Ilaaj

खानपान में करे बदलाव

  • चूँकि लकवा में मस्तिष्क के किसी हिस्से में अंग के प्रति संवेदना खत्म हो जाती है ऐसे में जरुरी है की रोगी का खान-पान सही रखा जाये। इससे ना सिर्फ रोगी के जल्दी होने की सम्भावना बढ़ जाती है बल्कि उसकी रिकवरी में भी तेजी आती है। जरुरी है की रोगी को घर का बना ताजा और स्वास्थ्यवर्धक खाना दिया जाए साथ ही रोगी को बाहर का तला-भुना खाना बिलकुल बंद कर किया जाए। इसके अलावा अगर रोगी के इलाज में किसी तरह की प्रगति ना दिख रही हो तो कुछ दिनों तक पका हुआ खाना देने से परहेज करना चाहिए।

लाभदायक है फलो का जूस

  • लकवा के इलाज में रोगी को अधिक से अधिक फलो का जूस पिलाना चाहिए। इसके लिए मौसमी और बाजार में उपलब्ध ताजे फल मददगार है। अंगूर,  सेब, नाशपाती और अन्य फलो का सेवन लाभदायक है। इसके अतिरिक्त नींबू पानी, नारियल पानी, आंवले का जूस, सब्जियों का रस और इनके साथ शहद का सेवन भी मददगार है। साथ ही रोगी की जितना हो सके खानपान सम्बंधित चीजों में परहेज रखे।

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ये है प्राकृतिक उपाय

  • लकवे में कुछ प्राकृतिक उपायों से इस बीमारी के जल्दी ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके लिए रोगी की रीढ़ की हड्डी की रोग गर्म या गुनगुने पानी जो की रोगी को सही लगे से सिकाई करनी चाहिए। हमारा मेरुदंड शरीर की सभी माँसपेशियों के गुजरने का प्रमुख स्थान है ऐसे में इसकी सिकाई से रक्त संचार बेहतर होता है साथ ही रोगी का लकवाग्रस्त अंग सही होने लगता है। इसके अलावा रोगी के पेट पर गीली मिटटी के लेप से और इसके बाद कटिस्नान करने से भी लकवा कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। साथ ही सूर्य के प्रकाश में अगर बोतल में पानी भरकर गर्म किया जाये तो इसके सेवन से भी रोगी जल्दी ठीक हो जाता है।

तनाव से रखें परहेज

  • आपको बता दे की लकवा मुख्यत दिमाग के तंत्रिका-तंत्र के प्रभावित होने के कारण होता है ऐसे में तनाव रोगी के तंत्रिका-तंत्र पर दबाव बढ़ाकर रोग ठीक होने में बाधा उत्पन करता है। इसलिए लकवा के रोग को सही करने के लिए जरूरी है की रोगी के आस-पास ऐसा वातावरण बनाया जाए जिससे की उसे किसी भी प्रकार का तनाव महसूस ना हो। इससे उसके जल्दी ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा ऐसी क्रियाएँ भी लाभदायक है जिससे की मस्तिष्क उत्तेजित हो। इससे मस्तिष्क में रक्त-संचार होने से रोगी जल्दी ठीक होने लगता है।

इन बातो का भी रखे ध्यान

  • लकवा मुख्यत दो प्रकार का होता है :- शारीरिक और मानसिक। शारीरिक लकवे से जहाँ शरीर की गतिविधियाँ प्रभावित होती है वही मानसिक लकवे से मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाएँ प्रभावित होती है। लकवे की स्थिति के अनुसार रोगी को गतिविधियाँ करवानी चाहिए। मानसिक लकवे की स्थिति में मानसिक गतिविधियाँ जैसे कार्ड गेम, बोर्ड गेम, अंको को जोड़ना, मानसिक क्रियाएँ लाभदायक है जबकि शारीरिक लकवे की स्थिति में शारीरिक क्रियाएँ जैसे लकवाग्रस्त अंग को एक्सरसाइज, योग, व्यायाम और अन्य शारीरिक एक्टिविटीज करवानी चाहिए।

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लकवे का घरेलू इलाज : Paralysis Ka Gharelu Ilaaj

लकवे को कैसे ठीक किया जा सकता है ?

लकवे को ठीक करने के लिए आप कुछ योगासन और प्राणायाम कर सकते हैं जैसे :- ताड़ासन, अनुलोम-विलोम, गोमुखासन आदि और जो लोग इस रोग से पीड़ित हैं उन्हें फिजियोथेरपी लेना जरूरी है।

लकवा किस विटामिन की कमी होने के कारण होता है ?

हमारे शरीर में जब विटामिन बी-12 और बी कॉम्प्लेक्स की कमी हो जाती है तो लकवा के लक्षण देखने को मिलते है। यह हमारे पूरी जीवनशैली के बदलाव डालता है। इसका मुख्य कारण हमारा खान पान हो गया है।

पैरालिसिस होने का मुख्य कारण क्या माना जाता है ?

मुखतः लकवा मरने के 2 कारण माने जाते हैं पहले ब्रेन हेमरेज (दिमाग में जाने वाली ब्लड नस का फैट जान) दूसरा दिमाग में जाने वाली ब्लड नस में किसी तरह का अवरोध आना।

लकवा में कौन से फल खाना बेहतर रहता है ?

मरीज को अपनी डाइट में सेब, पपीता, चेरी, तरबूजा, अनार, फालसा, अंगूर, हल्दी, संतरा, फालसा, अंगूर आदि का सेवन करना चाहिए तथा सब्जियों में हरी पत्तेदार सब्जी

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