मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना: फ्री में खेती का सामान सभी महिलाओं को, ऐसे करें आवेदन

हाल ही में उत्तराखंड के दौरे पर आये गृहमंत्री अमित शाह द्वारा राज्य में मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना (Mukhymantri Ghasyari Kalyan Yojana) का शुभारंभ किया गया है जिसके तहत उत्तराखंड की महिलाओं को घास के बोझ से मुक्ति दिलाने के लिए कई वायदे किये गए है. इस योजना के तहत महिलाओं को सस्ती दरों पर पशुओं का चारा उपलब्ध कराया जायेगा जिससे की उन्हें घास के लिए दूर जंगलो के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे साथ ही उन्हें खेती के सामान की किट भी फ्री में दी जाएगी. उत्तराखंड में 2022 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है ऐसे में सरकार द्वारा महिला मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए इस योजना का शुभारभ किया गया है. चलिए जानते है और

क्या है मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना

उत्तराखंड सरकार द्वारा शुरू की गयी योजना राज्य में महिलाओं को पशु चारे की समस्या को दूर करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है. प्रदेश में अधिकांश घरो की महिलाओं को पशुओं का चारा लेने के लिए घर के बहुत दूर जाना पड़ता है. साथ ही बरसात के टाइम पर बारिश होने से यह समस्या और भी बढ़ जाती है. इन्ही चीजों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना की शुरुआत की गयी है. इस योजना की ख़ास बातो पर एक नजर

  • इस योजना के तहत पशुपालको को 25 से 30 किलो पशुआहार के पैकेट दिए जायेंगे
  • महिलाओं को पशुओं के लिए चारे की समस्या से मुक्ति मिलेगी.
  • उत्तराखंड के गांवों में 7771 सहकारी केंद्रों के माध्यम से लोगो के पशुओं के लिए सस्ती दरों पर चारा उपलब्ध कराया जायेगा.
  • इसके लिए प्रदेश में चारे उत्पादन वाले केंद्र लगाए जायेंगे.
  • महिलाओ को खेती के काम के लिए सामान की किट भी दी जाएगी.

हालंकि विपक्ष ने योजना के नाम पर आपत्ति जताई है और इसे महिलाओं का अपमान करार दिया है. आपको बता दे की उत्तराखंड में घास लाने वाली महिलाओं के लिए घसियारी शब्द का यूज़ किया जाता है.

महिलाओं को दी जाएगी ये ख़ास किट

सरकार ने इस योजना के तहत महिलाओ को खेती के काम में सहायता के लिए भी आवश्यक सामान की किट देने का फैसला किया है. महिलाओ को इस किट में ये सामान दिए जायेंगे:- दो कुदाल, दो दरांती, खाने का डब्बा और पानी की बोतल. सरकार द्वारा दी जा रही इस किट की कीमत 1,500 रुपए बताई जा रही है. सरकार द्वारा इस योजना का श्रेय राज्य के सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत को दिया जा रहा है. इस योजना से महिलाओ को पशुओं के लिए चारे के लिए घर से 10-12 किलोमीटर दूर नहीं जाना पड़ेगा साथ ही खेती के कामो के लिए भी उन्हें औजार प्रदान किये जायेंगे.

योजना से है बहुत उम्मीदें

आपको बता दे की 2011 की जनगणना में राज्य में महिलाओं की आबादी 49.48 लाख है जो की राज्य की जनसँख्या की लगभग आधी है. साथ ही यहाँ गाँवो में रहने वाली 70 फीसदी आबादी में 65% महिलायें खेती-बाड़ी के काम से जुड़ी है. अक्सर उन्हें पशुओं के लिए चारा जुटाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है जिससे की उन्हें इस योजना से बहुत उम्मीदें है. साथ ही इससे पशुओं को भी पौष्टिक चारा मिलेगा जिससे की वे अधिक दूध देंगे.

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