भारत का इतिहास | History of India in hindi (nibandh)

उत्तर में हिमालय पर्वत से घिरा, सुदूर दक्षिण में हिन्द महासागर तक फैला भारत एशिया महाद्वीप में स्थित देश है। विशिष्ठ भौगोलिक विविधताओं से भरा भारत दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में शुमार किया जाता है। अकसर हमे विभिन अवसरों पर भारत के इतिहास के बारे में निबंध लेखन करना पड़ता है ऐसे में आवश्यक है की हम भारत के इतिहास के बारे में बेहतर और प्रभावशाली निबंध की रचना कर सकें। आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको भारत के इतिहास पर निबंध (Essay on History of India in hindi) सम्बंधित जानकारी प्रदान करने वाले है

भारत के बारे में आश्चर्यजनक तथ्य

History of India in hindi (nibandh)
History of India

जिससे की आप भारत के इतिहास पर अर्थपूर्ण और प्रभावी निबंध तैयार कर सकेंगे। साथ ही Bharat ke itihash par nibandh आर्टिकल के माध्यम से आपको भारत का इतिहास निबंध पर विभिन प्रकार के सैंपल भी प्रदान किया जाएंगे जिससे की आप अपने निबंध को और भी प्रासंगिक, अर्थपूर्ण और सटीक बना पाएंगे। विभिन कक्षाओं के छात्रों के लिए यह आर्टिकल इंडियन हिस्ट्री पर निबंध की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

भारत का इतिहास, निबंध

भारत का इतिहास बहुत ही विस्तृत एवं वृहद् है ऐसे में इस विषय को कुछ ही शब्दो में कवर करना आसान नहीं है। यहाँ दिए गए आर्टिकल Bharat ke itihash par nibandh के तहत आपको भारत के इतिहास पर निबंध को इस तरह से तैयार किया गया है की यह भारतीय इतिहास के सभी बिंदुओं को संक्षिप्तता से कवर करते हुए सभी कक्षा के बच्चों के लिए उपयोगी होगा। साथ ही विभिन छात्रों की जरूरत के अनुसार इस आर्टिकल को लघु, मध्यम और दीर्घ निबंध में बाँटा गया है जिससे की छात्र आसानी से अपनी सुविधानुसार निबंध का चयन कर सके। इसके अतिरिक्त इस आर्टिकल में छात्रों के स्तर को ध्यान रखते हुए सरल भाषा, आवश्यक तथ्यों तथा निबंध की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिन्दुओ का समावेश किया गया है ताकि सभी स्तर के छात्र इस आर्टिकल के माध्यम से लाभान्वित हो।

भारत का इतिहास, लघु-निबंध

प्रस्तावना:- अनेकता में एकता, भारत की विशेषता

भारत एशिया महाद्वीप में स्थित देश है जिसे हिन्दुस्तान भी कहा जाता है। भारत विभिन धर्म और संप्रदाय को मानने वाले नागरिको का घर है। इस देश में गंगा, यमुना, गोदावरी जैसे पवित्र नदियाँ बहती है। वेदो का ज्ञान भारत के माध्यम से ही पूरे विश्व में फैला है। यह देश महापुरुषों को भूमि रही है जहाँ समय-समय पर अनेक महापुरूषो ने जन्म लेकर इस देश की धरा को पवित्र किया है। महात्मा बुद्ध से लेकर स्वामी-विवेकानद और सुभाष चंद्र बोस से लेकर भगत सिंह जैसे वीरों ने समय-समय हमे पवित्र और साहसपूर्ण जीवन जीने का सन्देश दिया है। अनेकता में एकता, भारत की विशेषता कहावत हमारे देश के इतिहास के बारे में सम्पूर्ण वर्णन करती है।

विषय- भारत दुनिया के सबसे प्राचीन देशों में से एक है। हमारे देश का नाम चक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम पर भारत पड़ा है। प्राचीन काल से ही यह देश वीरों की भूमि रही है जहाँ अनेक वीरों ने जन्म लिया है। इसी भारतवर्ष में महात्मा-बुद्ध और महावीर स्वामी द्वारा मानवता का सन्देश दिया गया है। भारत प्राचीन काल से विभिन संस्कृतियों का घर रहा है। भारत विविध संस्कृतियों के लोगो का निवास रहा है जिसमे की विभिन भाषा-बोली, खानपान, पहनावा और संप्रदाय के लोग हमेशा से ही मिलजुलकर रहते है। प्राचीन भारत में हड़प्पा सभ्यता जैसी उन्नत सभ्यता निवास करती थी। हड़प्पा सभ्यता का यूरोपियन देशों के साथ व्यापारिक सम्बन्ध रहे है।

भारत में सम्राट अशोक का साम्राज्य भारत के बाहर विदेशो तक भी फैला था जिन्होंने कलिंग युद्ध के बाद युद्ध ना करने का प्रण किया था। आज भी हमे सम्राट अशोक के शिलालेख विभिन स्थानों से प्राप्त होते है। प्राचीन भारत अपने व्यापार के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध था और इसी वजह से हमारे देश को सोने की चिड़िया कहा जाता था। अपनी कला, संस्कृति और ज्ञान के कारण विदेशी यात्री समय-समय पर भारत के दर्शन को आते रहते थे।

मध्यकाल में हमारे देश पर अनेक विदेश आक्रमण हुये जिससे की देश की वृहद आर्थिक हानि उठानी पड़ी। आधुनिक काल में मसालों की खोज में यूरोपियन यात्री हमारे देश में आये और हमारे देश को अपना उपनिवेश बना लिया। अंग्रेजो के कारण हमारे देश को वृहद् पैमाने पर नुकसान हुआ और हमारे देश को 200 सालों की गुलामी झेलनी पड़ी। इस काल में महात्मा गाँधी, सुभाष चंद्र बोस, सरदार बल्लभभाई पटेल, जवाहरलाल-नेहरू, भगत सिंह और बाल-गंगाधर तिलक जैसे अनेक महापुरुषों ने अपने संघर्ष के माध्यम से इस देश को आजादी दिलाई। महात्मा गाँधी द्वारा आजादी की लड़ाई के लिए अहिंसा का नारा दिया गया था।

हमारे महापुरुषों और देश के नागरिको के संघर्ष की बदौलत 15 अगस्त को हमारा देश आजाद हुआ। आजादी के पश्चात 26 जनवरी 1950 को हमारे देश का संविधान लागू हुआ जिसमे सभी नागरिको को समान अधिकार दिये गए है। भारत का इतिहास सदैव से ही मानवता का सन्देश देता है।

उपसंहार:- भारत का इतिहास प्राचीन समय से गौरवपूर्ण रहा है। दुनिया की प्राचीन सभ्यताओं में हमारे देश की सभ्यता शुमार रही है। प्राचीन काल से हमारा देश शक्तिशाली एवं समृद्ध रहा है। हमारे देश में विभिन धर्मों के लोग प्राचीन काल से मिल जुलकर रहते आये है। हमारे देश में जब भी एकता में कमी आयी है विदेशी शासकों का द्वारा इस देश पर कब्ज़ा किया गया है। अंग्रेजों द्वारा भी हमारे समाज की कमजोरियों और एकता में कमी का फायदा उठाते हुए इस देश में 200 वर्षो तक राज किया गया। ऐसे में यह आवश्यक है की हम अपनी कमजोरियों और गलती से सबक लेकर एकता बनाये रखे और इस देश की एकता और अखंडता को सदैव बनाये रखें। अपने महापुरुषों द्वारा दी गयी सीख को अपनाकर हम अपने देश का नाम इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कर सकते है।

भारत का इतिहास, मध्यम-निबंध

प्रस्तावना:- उत्तर में खड़ा विशाल हिमालय सदियों से ही भारत का इतिहास का गवाह रहा है। जिस प्रकार अनेक उतार-चढ़ाव से गुजरते हुए हमारे देश का इतिहास गौरव की गाथा रहा है उसी प्रकार से उत्तर में स्थिति विशाल हिमालय अविचल खड़ा इस देश की गौरव गाथा का साक्षी रहा है। भारत का इतिहास जीवन के सभी पहलुओ को खुद में समेटे है जहाँ आपको ज्ञान, संघर्ष, अनुभव और साहस की गौरव गाथा देखने को मिलती है। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक भारत का इतिहास बदलावों का साक्षी रहा है जो की स्वयं में जीवन के सम्पूर्ण रहस्यों को समेटे हुए है।

हड़प्पा सभ्यता से शुरू होकर भारत का इतिहास स्वर्ण युग और विदेशी आक्रमण और औपनिवेशिक गुलामी से पुनः विश्वगुरु बनने की राह पर अग्रसर होने की कथा है। भारत की विविधता की तरह इस देश का इतिहास भी विविधता का चोगा ओढ़े हुए है जहाँ आपको परत-दर-परत नवीन रोशनी देखने को मिलती है।

विषय- भारत को प्राचीन-काल में आर्यव्रत, जम्बूद्वीप और हिन्दुस्तान नाम से जाना जाता रहा है। हिन्दुस्तान शब्द हिन्दू से उत्पन हुआ है। प्राचीन समय में ईरानी लोगों द्वारा उत्तर में प्रवाहित सिंधु नदी के कारण इस देश को सिंधु कहा जाता था जो की अपभ्रंश के कारण हिन्दू उच्चारित किया जाने लगा और इस देश के निवासियों के लिए यह नाम ही प्रचलित हो गया। प्राचीन समय से ही भारत में दुनिया की प्राचीन सभ्यताओं में शुमार हड़प्पा सभ्यता का निवास था। यहाँ प्राचीन काल से ही विभिन सम्राटों शासन रहा है जिन्होंने इस महाद्वीप के विस्तृत भूभाग पर शासन किया है। भारत के इतिहास में सबसे प्रसिद्ध शासक के रूप में शुमार सम्राट अशोक के द्वारा इस देश की सीमाएँ भारतीय उपमहाद्वीप की सीमाओं को स्पर्श करती थी।

कलिंग युद्ध के पश्चात सम्राट अशोक के द्वारा सम्पूर्ण दुनिया में अहिंसा का सन्देश दिया गया था। इस प्रकार से अहिंसा प्राचीन काल से ही हमारे समाज का प्रमुख अंग रही है जिसका गांधीजी द्वारा अपने जीवन में पूर्ण रूप से पालन किया गया था। भारत का प्राचीन इतिहास देश के स्वर्ण काल में शुमार किया जाता है जिसका कारण इस काल में स्थापत्य कला, कला, संस्कृति और जीवन के विभिन क्षेत्रों में नवोन्मेषण होना है। प्राचीन भारत को देश के इतिहास में आधारभूत मानक मानकर देश का वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मूल्याङ्कन किया जाता है।

भारत के मध्यकालीन इतिहास को अधिकांश इतिहासकार देश के इतिहास की दृष्टि से गौरवपूर्ण नहीं मानते है। इसका मुख्य कारण इस काल में विदेशी शासकों का देश पर बारम्बार आक्रमण और देश की अर्थव्यस्था की गिरती स्थिति को देखकर अनुमान लगाया जाता है। हालांकि मध्यकाल को सिर्फ विदेशी शासको की दृष्टि से देखना उचित नहीं है। इस काल में देश के विभिन भागों में स्वतंत्र देशी रियासतें भी शासन कर रही थी। साथ ही इस काल में हमारे देश का बाह्य दुनिया के साथ ही बेहतर सम्पर्क स्थापित हो पाया जिससे की देश में नवोन्मेषण के लिए मार्ग प्रशस्त हुआ था।

इस काल में भारत में विविध संस्कृतियों के साथ हमारे देश का संपर्क हुआ जिससे की देश में सांस्कृतिक सामंजस्य के लिए भी मार्ग खुला था। हालांकि इस काल में विदेशी शासको द्वारा भारत पर सम्पति अर्जित करने के लिए अनेक प्रयास किया गए थे जिससे की देश को विभिन प्रकार से नुकसान उठाना पड़ा था। इस काल में देश में विभिन धर्मो के आने से जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विविधता बढ़ी जिसको की हम मध्यकाल की स्थापत्य कला, खानपान, रहन-सहन, रीति-रिवाज और जीवन के प्रत्येक पहलुओ में देख सकते है। देश में हुए व्यापक सामाजिक परिवर्तन इस काल की विशेषता रहे है।

भारत ने जब आधुनिक युग में अपनी आँख खोली तो स्वयं को औपनिवेशिक गुलामी में जकड़ा हुआ पाया। भारत में मसालों और अन्य कीमती सामानों के व्यापार के सिलसिले में आये अंग्रेजो ने इस देश को ही अपना उपनिवेश बना डाला। हमारी आंतरिक कमजोरियों और आपसी लड़ाई-झगडे का फायदा उठाते हुए अंग्रेज जो की प्रारंभिक में सिर्फ व्यापार के उद्देश्य से इस देश में आये थे इस देश के मालिक बन बैठे। औपनिवेशिक काल में अंग्रेजो द्वारा इस देश के आर्थिक संसाधनों का जमकर दोहन किया गया और इस देश के संसाधनों को अपने हित की पूर्ति के लिए बड़े स्तर पर विदेश भेजा गया।

कहा जाता है की हर क्रिया की एक प्रतिक्रिया होती है इसी के परिणामस्वररूप जब देश औपनिवेशिक शासन की जंजीरो से परेशान हो गया तो इस देश में अनेक महापुरुषों ने जन्म लिया और अपने दृढ साहस और संकल्प के बल पर इस देश को गुलामी की जंजीरो से आजाद करवाया। भारत की आजादी का संग्राम पूरी दुनिया में आदर्श स्वतंत्रता आंदोलन के रूप में पढ़ाया जाता है।

15 अगस्त 1947 को देश को आजादी मिली। अपने औपनिवेशिक शासन काल के दौरान अंग्रेज इस देश का वृहद् स्तर पर आर्थिक और सामाजिक शोषण कर चुके थे यही कारण रहा की हमे आजादी में मिला देश एक ऐसा सोने की चिड़िया थी जिसके परों को नोचा जा चुका था। हालांकि जैसे हमारे देश का हमेशा से ही इतिहास रहा है की जब भी इस देश पर कोई संकट आता है तो देश के संप्रदाय के लोगो ने अपनी सभी प्रकार की पहचान को भूलकर सिर्फ इस देश के निवासी के रूप में स्वयं की पहचान की और इस देश को पुनः सोने की चिड़िया बनाने के प्रयासों में जुट गए। इस देश के साहसी और दृढ इच्छाशक्ति वाले नागरिको के परिश्रम का ही नतीजा रहा की आज यह देश पुनः विश्व पटल पर अपने पुराने गौरव को प्राप्त करने की राह पर चल पड़ा है।

उपसंहार:- भारत के इतिहास में देश को विभिन प्रकार की परिस्तिथियों का सामना करना पड़ा है। जहाँ हमे प्राचीन काल में सोने की चिड़िया होने का गौरव प्राप्त था वही इतिहास के कुछ ऐसे कालखंड रहे है जहाँ भारत को विदेशी गुलामी का सामना करना पड़ा है। जब ही हम अपनी दृष्टि देश के अवनतिकाल पर डालते है तो हमे साफ़ रूप से नजर आता है की हमारे देश में एकता और परस्पर सामंजस्य की कमी के कारण ही हमे विदेशी आक्रमणों का सामना करना पड़ा है और अपनी कमजोरियों के कारण हमे इतिहास में इस प्रकार के कालखंड भी देखने पड़े है। हालांकि जब-जब हमे देश के इन कालखंडो को देखते है तो हमे यह भी साफ़-साफ़ नजर आता है की चाहे कैसी भी परिस्थितियां रही हो अपनी एकता के बल पर हमने पुनः अपने देश की बड़ी-बड़ी मुश्किलों से बाहर निकाला है और वर्तमान में भी हमारे महापुरुषों द्वारा दिखाया गया मार्ग हमे देश के इतिहास को पुनः बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है।

भारत का इतिहास, दीर्घ-निबंध

प्रस्तावना:- भारत का इतिहास प्राचीन समय से ही गौरवपूर्ण रहा है। भारत का इतिहास इस देश की विभिन गौरवशाली परम्पराओ, संस्कृति एवं रीति-रिवाजो में दृष्टिगोचर होता है। देश का इतिहास इस देश के प्राचीन गौरव से लेकर विभिन संस्कृतियों के इस देश में आगमन और इतिहास के विभिन कालखंडो में देश में इतिहास में आये व्यापक परिवर्तन की कहानी है। भारत के इतिहास में हमे विभिन समयों पर संगृहीत किये गए समृद्ध अनुभव साफ़ रूप से दिखाई पड़ते है साथ ही विभिन संस्कृतियों को स्वयं के अंदर समाहित करने की कला का भी दृष्टांत जगह-जगह दिखाई पड़ता है। भारत के इतिहास को विभिन इतिहासकारों द्वारा लेखनबद्ध किया गया है। इसमें भारत के साथ-साथ विदेशी इतिहासकारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारत के इतिहास का सबसे अधिक वर्णन हमे प्राचीन ऐतिहासिक और धार्मिक ग्रंथो से मिलता है।

विषय- प्राचीन ऐतिहासिक ग्रंथो में भारत को आर्यव्रत, जम्बूद्वीप और भारत एवं भारतवर्ष नाम से सम्बोधित किया गया है। भारत के इतिहास के बारे में अध्ययन विद्वानों के द्वारा मुख्यत ऐतिहासिक ग्रंथो, धार्मिक ग्रंथो, विदेशी लेखकों के वर्णन एवं पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है। विभिन पुरातात्विक खोजो के आधार पर इस देश के इतिहास पर नवीन वैज्ञानिक दृष्टिकोण पड़ा है वही भारत के विभिन कालखंड के बारे में विदेशी शासको के यात्रा वृतांतो के आधार पर हमे इस देश के इतिहास के बारे में विदेशी निवासियों के दृष्टिकोण का पता चलता है। आधुनिक विभाजन के आधार पर भी इस देश के इतिहास को मुख्यत 3 भागो में विभाजित किया जाता है जिसे क्रमश प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत एवं आधुनिक भारत के इतिहास के सन्दर्भ में देखा जाता है।

भारत के इतिहास को विभिन लेखकों के द्वारा विभिन दृष्टिकोण के आधार पर लिखा गया है ऐसे में हमे विभिन लेखकों के नजरिये से इस देश के इतिहास को जानने का मौका मिलता है। भारत के इतिहास के सदैव से ही जन (जनता) को प्रमुख स्थान दिया जाता रहा है यही कारण है की इतिहास में सबसे प्रमुख स्थान जन का इतिहास, संस्कृति, जीवन, दृष्टिकोण एवं नजरिया होता है।

प्राचीन भारत का इतिहास जानने का सबसे प्रमुख स्रोत ऐतिहासिक ग्रंथ रहे है। भारत के इतिहास की शुरुआत प्राचीन काल की सभ्यताओं में शुमार हड़प्पा सभ्यता से होती है। हड़प्पा सभ्यता के समय काल को लेकर विद्वानों में मतभेद है हालांकि नवीन वैज्ञानिक अनुसंधानों एवं कार्बन डेटिंग के आधार पर इस सभ्यता का सामान्य समयकाल 2400 ई. पू. से लेकर 1700 ई. पू. माना गया है। हड़प्पा सभ्यता दुनिया की सबसे आधुनिक सभ्यताओं में से एक मानी जाती है जिसका प्रमाण इस नगर के लोगो द्वारा सुनियोजित नगर प्लान एवं स्वछता को दृष्टिगत रखते हुए बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था है। हड़प्पा सभ्यता के आधार पर कहा जा सकता है की हमारा देश प्राचीन काल से ही दुनिया की प्राचीन एवं वैज्ञानिक सभ्यता का निवास रहा है।

हड़प्पा सभ्यता के पश्चात इस देश के उत्तरी-पश्चिमी भागों में ऋग्वेदिक सभ्यता शुरू हुयी जो की मुख्यता ग्रामीण सभ्यता थी। ऋग्वेदिक सभ्यता के निवासियों को आर्य कहा जाता है। कई इतिहासकारों जिनमे की विदेशी इतिहासकार प्रमुख है ने आर्यों के निवास स्थान को भारत के बाहर दर्शाने का प्रयास किया है जो की निराधार साबित होता है। प्राचीन समय में आर्य शब्द का प्रयोग जाति के लिए ना होकर भाषा के लिए प्रयुक्त होता था।

ऋग्वेदिक काल भारत के धार्मिक इतिहास के लेखन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है चूँकि इस काल में ही देश के महान धार्मिक ग्रंथो में अधिकतर ग्रंथ लिखे गए थे। दुनिया के सबसे प्राचीन ग्रंथो में शुमार वेदों की रचना वैदिक काल में की गयी थी। इसके अतिरिक्त भारतीय इतिहास के दार्शनिक ग्रंथों, अरण्यक, ब्राह्मण ग्रन्थ और उपनिषदों की रचना भी इसी काल में की गयी थी। वैदिक काल के पश्चात देश में महाजनपद काल का उदय हुआ। इस दौरान देश में मगध प्रमुख राज्य के रूप में उभरा। महाजनपद काल में भारत में बौद्ध और जैन धर्मो का भी उदय हुआ।

महात्मा-बुद्ध द्वारा शुरू किये गये बौद्ध धर्म का पूरे विश्व की मानस चेतना पर गहरा प्रभाव रहा है यही कारण है की दुनिया में विभिन देशो में यह धर्म तेजी के साथ फैला। भगवान बुद्ध द्वारा दिया गया अहिंसा का सन्देश प्राचीन काल से ही हमारे देश की जड़ों में रहा है और सदैव से ही हमारे देश ने इस नीति का अनुसरण किया है।

269 में मगध की गद्दी पर सम्राट अशोक का राजतिलक हुआ। अशोक द्वारा कलिंग के युद्ध के भीषण रक्तपात को देखकर आत्मगलानि के फलस्वरूप युद्ध ना करने का संकल्प लिया गया एवं पूरे विश्व में अहिंसा का प्रचार-प्रसार किया गया। मौर्य वंश के संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य के काल में मेगस्थनीज द्वारा लिखी गयी पुस्तक इंडिका भारत के इतिहास को जानने का प्रमुख स्रोत रही है जिसके आधार पर भारत के प्राचीन इतिहास के बारे में महत्वपूर्ण सूचनाएँ प्राप्त होती है। मौर्य साम्राज्य के पश्चात देश के इतिहास में गुप्त साम्राज्य के समयकाल को स्वर्णकाल की संज्ञा दी गयी है। वर्धन वंश के शासक हर्षवर्धन के द्वारा भारत में विस्तृत साम्राज्य की स्थापना की गयी थी जिसके पश्चात देश में अन्य छोटे-छोटे शासको का शासन स्थापित हो गया।

मध्यकाल में भारत पर सबसे पहला विदेशी आक्रमण 712 ई. में हुआ जब मुहम्मद बिन कासिम के द्वारा भारत के पश्चिमी सीमा-प्रान्त पर स्थित सिंध पर आक्रमण किया गया था। अरबो की सिंध विजय का वर्णन चचनामा पुस्तक में लिखित मिलता है। सिंध पर विजय के पश्चात भारत पर विदेशी आक्रमणकारियों का ताँता लग गया और इसके पश्चात 1000 ई. में देश पर महमूद गजनी एवं 1175 में मुल्तान पर मुहम्मद गौरी का आक्रमण हुआ। मुहम्मद गौरी द्वारा तराइन के द्वितीय युद्ध में विजय प्राप्त करके यहाँ अपना गुलाम नियुक्त किया गया जिसे की भारतीय इतिहास में कुतुबद्दीन ऐबक के नाम से जाना जाता है।

कुतुबद्दीन ऐबक के द्वारा दिल्ली में 1206 ई. में गुलाम वंश की नींव डाली गयी थी जिसके पश्चात देश में सल्तनत शासन के अंतर्गत विभिन शासको ने शासन किया। गुलाम वंश में रजिया सुल्तान जो संभवता एक मात्र महिला शासिका थी दिल्ली की गद्दी पर 1236 से 1240 तक शासिका रही। इसके पश्चात दिल्ली की गद्दी पर खिलजी वंश का शासन रहा। सल्तनत शासनकाल के दौरान भारत में विभिन प्रकार के सामाजिक व्यवस्थायें उत्पन हुयी जिससे की देश की अर्थव्यस्था में व्यापक परिवर्तन हुआ।

खिलजी वंश के पश्चात भारत में तुगलक वंश का शासन प्रारम्भ हुआ। तुगलक वंश के शासक मुहम्मद-बिन-तुगलक के शासनकाल में मोरक्को से विदेशी यात्री इबन-बतूता भारत आया जिसके द्वारा रिहला यात्रा वृत्तांत लिखा गया। इबन-बतूता के रिहला में तत्कालीन भारत के इतिहास के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गयी है जिसके माध्यम से हम भारत के मध्यकाल के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है। तुगलक वंश के पश्चात भारत में सैय्यद वंश का शासन एवं तत्पश्चात लोदी वंश का शासन प्रारम्भ हुआ।

लोदी वंश के अंतिम शासक इब्राहिम लोदी को पानीपत की प्रथम लड़ाई में हराकर मुग़ल बादशाह बाबर द्वारा हमारे देश में मुग़ल वंश की नीव रखी गयी। भारत के इतिहास की दृष्टि से मुग़ल वंश का शासन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस काल के दौरान ही हमारे देश में व्यापक परिवर्तन हुए एवं विभिन समुदायों के मध्य वैचारिक आदान प्रदान के माध्यम से भारतीय समाज ने नया रूप लिया।

बाबर मध्य एशिया में स्थित तुर्की देश से आया शासक था जिसने की पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्रहिम लोदी को परास्त करके दिल्ली की गद्दी पर कब्ज़ा किया। मुग़ल काल में हमारे देश में विभिन संस्कृतियों के मध्य सामंजस्य के कारण विभिन नवीन सामाजिक व्यवस्थाएँ एवं चलन हुए। मुग़ल काल में बादशाह अकबर को सबसे महान शासक में शुमार किया जाता है चूँकि अकबर के शासन काल में विभिन समुदायों के लोगो के मध्य आपसी भाईचारा आदर्श स्थिति में था। मुग़ल शासन के दौरान देश में स्थापत्य, कला एवं खानपान में नवीनता प्रकट हुयी एवं इस दौरान कई नयी चीजों का देश में उद्भव हुआ। हालांकि मध्य काल को सिर्फ मुग़ल काल मानना सही दृष्टिकोण नहीं है चूँकि इस काल में देश विभिन भागों में स्वतंत्र रियासतें भी अपना शासन कर रही थी। इसके अतिरिक्त देश के विभिन भागों में भी विभिन संस्कृतियाँ फल-फूल रही थी।

प्राचीन काल से ही भारत विभिन सभ्यताओं एवं समुदायों का निवास स्थान रहा है। भारत का विदेशी सभ्यताओं एवं देशों के साथ हड़प्पा सभ्यता के काल से ही धार्मिक एवं व्यापारिक सम्बन्ध रहे है। प्राचीन काल से भारत अपने मसालों एवं रेशमी वस्त्रो के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध था। खासकर यूरोप के बाजारों में भारत की काली-मिर्च बहुत प्रसिद्ध थी जिसे की प्रायः वहां काला सोना के नाम से सम्बोधित किया जाता था। इसके अतिरिक्त विदेशी बाजारों में भारत में निर्मित होने वाली अन्य वस्तुओ की भी अच्छी खासी मांग थी।

भारत की अर्थव्यवस्था 17वीं शताब्दी में विश्व के अग्रणी देशों में शुमार थी यही कारण रहा की विभिन विदेशी व्यापारी भारत से व्यापार करने को उत्सुक रहते थे। 16वीं शताब्दी में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ-प्रथम के द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत के साथ व्यापार का एकाधिकार प्रदान किया किया गया। इसके पश्चात अंग्रेजो द्वारा भारत के विभिन भागो को एक- एक करके अपना उपनिवेश बनाया गया और इस देश का आर्थिक दोहन करना शुरू कर दिया गया।

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी प्रारम्भ में एक कंपनी के रूप में भारत आयी थी जिसका मुख्य उद्देश्य व्यापार करना था। भारत में व्यापार के दौरान ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा देश की कमजोरियों का फायदा उठाकर इस देश को गुलामी की जंजीरो में धकेल दिया गया जिसके फलस्वरूप देश में औपनिवेशिक शासन प्रारम्भ हुआ। भारत के उपनिवेशवाद में पलासी का युद्ध महत्वपूर्ण माना जाता है जिसे देश की पराधीनता के प्रथम चरण के रूप में जाना जाता है। भारत की पराधीनता के दौरान अंग्रेजो द्वारा हमारे देश को सामाजिक, आर्थिक एवं मानसिक रूप से गुलाम बनाये रखने के लिए तरह-तरह के प्रपंच रचे गए।

औपनिवेशिक काल के दौरान देश में अंग्रेजो के अत्याचारों के फलस्वरूप देश की जनता में आक्रोश बढ़ने लगा। इस समयकाल में अनेक महापुरुषों के द्वारा हमारे देश को गुलामी की जंजीरो से मुक्ति दिलाने के लिए कठिन संघर्ष किया गया और देश को विदेशी शासन के चंगुल से छुड़ाने के लिए अपना सर्वश्व दांव पर लगा दिया गया। हमारे आजादी के संग्राम में महात्मा गाँधी द्वारा पूरे देश को आजादी की लड़ाई में एकजुट करने के लिए दिया गया योगदान अतुलनीय है जिसमे की गांधीजी द्वारा सत्य और अहिंसा का व्यापक प्रयोग किया गया। यही कारण रहा की भारत का स्वतंत्रता संग्राम अधिकतर अहिंसक रहा एवं देश की अंतत विदेशी शासन से आजादी मिली। स्वतंत्रता के पश्चात हमारे देश के द्वारा विभिन क्षेत्रों में अभूतपूर्व तरक्की की गयी है जिस कारण से हमारा देश पुनः अपने गौरव को प्राप्त करने की राह पर है।

उपसंहार:- भारत का इतिहास विभिन अनुभवो का निचोड़ रहा है यही कारण है की हमे भारत के इतिहास में विभिन पहलू देखने को मिलते है। भारत के इतिहास में विभिन दृष्टांतो को ध्यान में रखते हुए हमे विभिन अनुभवों से सीख लेकर देश के इतिहास को और भी गौरवशाली बनाने की आवश्यकता है। इतिहास के बारे में कहा जाता है की इतिहास स्वयं को दोहराता है। अगर हम भारत के इतिहास के दृष्टिकोण से इस कहावत को देखें तो यह वास्तव में सत्य प्रतीत होता है। भारत का इतिहास भी प्राचीन काल में हड़प्पा सभ्यता के सुनहरे युग से शुरू होकर पुनः विभिन कालखंड में पतन की कहानी है। औपनिवेशिक गुलामी से आजादी एवं पुनः दुनिया के सम्पन देशों में अपनी पहचान बनाने की ओर अग्रसर भारत का इतिहास हमे सदैव की रोमांचित करता है।

भारत के इतिहास पर निबंध सम्बंधित अकसर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भारत के इतिहास को कितने भागो में बाँटा गया है ?

भारत के इतिहास को 3 भागो में बाँटा गया है :- प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत एवं आधुनिक भारत

प्राचीन भारत के अंतर्गत कौन सी घटनाएँ प्रमुख है ?

प्राचीन भारत के अंतर्गत सिंधु घाटी सभ्यता, ऋग्वेदिक सभ्यता, महाजनपद काल एवं मौर्य शासन का वर्णन प्रमुख रूप से आता है।

भारत के इतिहास पर निबंध कैसे लिखे ?

भारत के इतिहास पर निबंध के लिखने के लिए आपको ऊपर दिए आर्टिकल में विभिन सैंपल दिए गए है। इन सैंपल की सहायता से आप अपना निबंध तैयार कर सकते है।

बेहतर निबंध लिखने के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है ?

बेहतर निबंध लिखने के लिए आपको विषयवस्तु के आस-पास रहकर बिंदुवार सभी आवश्यक तथ्यों को निबंध में शामिल करना आवश्यक है। इस प्रकार आप बेहतर निबंध की रचना कर सकते है।

निबंध के प्रमुख भाग कौन-कौन से होते है ?

निबंध की शुरुआत में आपको प्रस्तावना में निबंध का मूलभूत विषय, मध्य में मुख्य विषय और अंत में उपसंहार में निष्कर्ष की रचना करनी होती है।

भारत के इतिहास पर निबंध के लिए बिंदु कैसे तैयार करें ?

भारत के इतिहास पर निबंध के लिए भारत के इतिहास के सभी प्रमुख बिन्दुओ का ज्ञान होना आवश्यक है। इसके आधार पर आप अपने बिंदु तैयार कर सकते है। इसके लिए इतिहास के प्रमुख बिन्दुओ का अच्छे से अध्ययन कर लें।

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