अब मिलेगा अच्छा राशन, सरकार करेगी गेहूं और चावल के स्टॉक की ऑनलाइन करेगी निगरानी

दोस्तों आजकल के दौर में ज्यादातर काम ऑनलाइन माध्यम से किये जाते हैं। इसी तरह लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) के तहत खाद्यान्न के भंडारण, संचालन और वितरण में दक्षता लाने के लिए, सरकार जल्द ही एक डिजिटल प्रणाली शुरू करेगी। ऑनलाइन भंडारण प्रबंधन प्रणाली से राशन के वितरण में मदद मिलने और सिस्टम में हुई कमियों को कम करके खाद्यान्न भंडारण की लागत कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे सरकार को अच्छी गुणवत्ता वाली राशन की जानकारी प्रत्येक समय मिलती रहेगी। और सभी लाभार्थियों तक अच्छी राशन पहुंचाई जाएगी। आज हम इस लेख में इसकी सभी जानकारी देंगे। जानकारी हासिल करने के लिए इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

नागरिकों को मिलेगा अच्छा राशन

खाद्यान्न भंडारण को डिजिटल बनाने की यह पहल ऑनलाइन प्रणाली के तहत किसानों से चावल और गेहूं की खरीद के लिए डीएफपीडी के नियमों का पालन करती है। पीडीएस में सुधार लाने के लिए अगले चरण में, खाद्य मंत्रालय राज्यों में एमएसपी संचालन के तहत आने वाले किसानों के लिए एक ऑनलाइन भुगतान प्रणाली की शुरुआत कर रहा है, जिससे कि किसानों को भुगतान वास्तविक समय के आधार पर ट्रैक किया जा सके। और राशन पर भी ऑनलाइन माध्यम से निगरानी रखी जा सके। इससे सभी राशन पात्र नागरिकों को अच्छा राशन प्राप्त होगा।

राशन में होने वाली हेरफेर में लगेगी रोक

OSM प्रणाली के तहत खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD), भारतीय खाद्य निगम, केंद्रीय भंडारण निगम और राज्य भंडारण निगमों के गोदामों में रखे गए राशन स्टॉक की जानकारी प्रदान करेगा। इसमें जानकारी खरीद वर्ष, गुणवत्ता और एक ही ट्रांजिट पर अनाज के बारे में ट्रक डेटा के आधार पर होगी। AFE के मुताबिक, DFPD के सचिव सुधांशु पांडे ने बताया कि OSM खरीद से लेकर PDS वितरण आउटलेट तक अनाज के स्टॉक के प्रत्येक स्टॉक को ट्रैक किया जायेगा। जिससे कि गोदामों और उचित मूल्य की दुकानों के बीच स्टॉक के परिवहन ठेकेदारों द्वारा हेरफेर की किसी भी संभावना को रोका जा सकेगा। साथ DFPD के सचिव सुधांशु पांडे ने कहा कि देश के 16 राज्यों ने मॅनॅग्मेंट एप्लीकेशन को लागू करने के लिए सहमति प्रदान कर दी है। जी हाँ देश के 16 राज्यों -ओडिशा, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने इसके लिए सहमति प्रदान कर दी है।

खाद्यान भण्डारण की लागत होगी कम

खाद्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि OMS से अनाज वितरण के लिए रूट ऑप्टिमाइजेशन में सहायता मिलेगी और खाद्यान्न मैनेजमेंट व्यवस्था में होने वाली कमियों पर रोक लगने से खाद्यान्न भंडारण की लागत कम होने की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार अधिकारीयों ने कहा कि OSM के मार्च 15-31 के बीच ट्रायल होने के बाद 1 अप्रैल से आधिकारिक तौर पर शुरू किया जाएगा। किसी निश्चित समय पर, FCI और राज्य एजेंसियों के पास औसतन 55 मिलियन टन – 65 मिलियन टन की सीमा में अनाज का स्टॉक होता है। अतः OMS के माध्यम से खाद्यान भंडारण की लागत में कमी आ सकती है। हालांकि इसकी अभी पूरी जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। यह केवल एक संभावना जतायी जा रही है।

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