रक्षाबंधन पर निबंध | Essay on Raksha Bandhan in Hindi

Essay On Raksha Bandhan In Hindi –हिंदुओं में हर त्यौहार को मानाने के पीछे कुछ न कुछ कारण और मान्यताएं होती हैं। हमारे यहाँ हर महीने कोई न कोई खास त्यौहार तो आता ही है, जो बड़े उत्साह से सभी लोगों द्वारा मनाया जाता है। भारत एक ऐसा देश है, जो अपने त्यौहार और संस्कृति के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। वेद, पुराण, महाभारत, रामायण, उपनिषदों में कई गाथाएं और कहानियां हैं जो हमे यह एहसास दिलाती है की हमारा देश अपने आप में कितना अनोखा है। दीपावली, होली, रक्षाबंधन, गंगा दशहरा, राम नवमी ऐसे ही कई महत्वपूर्ण त्यौहार हैं जो हमारे जीवन में नयी उमंगें भरते हैं। बच्चों को उनके स्कूल या कॉलेज में कई बार इनके ऊपर निबंध लिखने को कहा जाता है जिसके लिए उन्हें जरुरी हो जाता है की वह इन त्योहारों के बारे में पूरी जानकारी रखें तभी वह अच्छे से त्यौहार के बारे में निबंध को लिख सकते हैं।

रक्षाबंधन पर निबंध | Essay on Raksha Bandhan in Hindi
रक्षाबंधन पर निबंध | Essay on Raksha Bandhan in Hindi

आज हम आपको रक्षाबंधन के बारे में जानकारी देंगें। रक्षाबंधन पर निबंध का प्रारूप आपको यहाँ दिया जा रहा है जिसकी मदद से सभी बच्चे अपने स्कूल या कॉलेज में रक्षाबंधन पर निबंध को लिख सकेंगे।

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रक्षाबंधन पर निबंध कैसे लिखें ?

आपको रक्षाबंधन पर निबंध लिखते समय इन बातों को ध्यान में रखना होता है –

  • किसी भी त्यौहार के बारे में यदि आप निबंध लिखा रहे हैं तो आपको सबसे पहले यह पता होना चाहिए की उस त्यौहार को आखिर मनाया क्यों जाता है।
  • त्यौहार को मानाने का कारण क्या है।
  • अपनी भाषा को सरल रखें मतलब यह है कि आप जो भी लिखना चाहते हैं उसे घुमा -फिरा कर नहीं बल्कि साफ़ और सीधे रूप में लिखें।
  • कब, क्यों, कैसे ,कहाँ इन सब सवाल से सम्बंधित जानकारी जरूर लें कि कबसे त्यौहार मनाया जा रहा है? क्यों मनाया जाता है?,कैसे मनाया जाता है ?इसके बारे में निबंध में जानकारी होनी चाहिए।
  • अपनी भाषा में किसी भी प्रकार की त्रुटि को न होने दें।
  • निबंध लिखने के बाद इसे जरूर चेक करें।
  • विराम चिन्हों का खास ध्यान रखें।
  • किसी भी पैराग्राफ को दुबारा न दोहराएं।

रक्षाबंधन पर निबंध | Essay on Raksha Bandhan in Hindi

प्रस्तावना –

”राखी के पवन धागों में ,छिपा हुआ है बहिन का प्यार।
भगिनी की रक्षा का बंधन है ,है यह रक्षा बंधन का त्यौहार।।”

भारत के सभी महत्वपूर्ण त्यौहारों में रक्षाबंधन का पर्व हर भाई -बहिन के लिए काफी महत्त्व रखता है। हर साल सावन माह में पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाता है। यह विशेष तौर पर भाई-बहिन का त्यौहार है जिसमे सभी बहिने अपने भाई की कलाई में रक्षा सूत्र बांधती हैं और अपने भाई की आरती उतारती हैं। इस दिन हर भाई अपनी बहिन को उसकी हर प्रकार से रक्षा करने का वचन देता है। यह हर भाई को उसके बहिन के लिए क्या कर्त्तव्य हैं इसके बारे में याद दिलाता है। भाई -बहिन के प्यार और स्नेह का यह त्यौहार हर हिन्दू बड़े ही उल्लास के साथ मनाता है।

रक्षाबंधन मनाने के पीछे का इतिहास

वैसे तो रक्षाबंधन के पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं जिसमें से एक कहानी काफी प्रख्यात है। जो की महाभारत काल की है। महाभारत के समय से रक्षाबंधन की शुरुआत हुई थी। पुराने समय में गुरुकुल में इसी दिन नया वर्ष प्रारम्भ होता था। रक्षा बंधन को मनाये जाने के पीछे कई कहानियां हैं जिसमे से एक मुग़ल के समय की है।

रानी कर्णावती और मुग़ल शासक हुमायूं की कथा -एक समय की बात है मुग़ल काल में जब बहादुर शाह ने मेवाड़ पर आक्रमण किया था उस समय चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने हुमायूँ से सहायता मांगी थी और उन्हें रक्षा सूत्र भेजा था। यह रक्षा सूत्र हुमायूँ ने अपनी कलाई में बंधी थी और उनकी रक्षा का वचन दिया और मेवाड़ को हर संभव सहायता दी थी और चित्तौड़ के लिए हुमायूँ में अपनी सेना को रानी कर्णावती की मदद के लिए भेजा था इस तरह से हुमायूँ ने चित्तौड की रानी कर्णावती की रक्षा की थी।

इंद्र की पटरानी का देवताओं को रक्षा सूत्र बांधना –पुराण के अनुसार एक समय जब देवता और राक्षसों के बीच भयानक युद्ध हो रहा था तो देवता इस युद्ध में हार रहे थे। देवताओं के राजा इंद्र की पत्नी ने देवताओं की कलाई पर राखी बाँधी थी और फिर देवताओं ने किसी तरह इस भीषण युद्ध में राक्षसों को हराया था। ऐसे ही माता लक्ष्मी और राजा बलि की कहानी भी काफी प्रसिद्ध है। इसी तरह याम और यमुना की कहानी भी भाई- बहिन के अताह प्रेम की कहानी है।

भगवान् श्री कृष्णा और द्रोपदी की कथा -यह कथा भी भाई-बहिन के प्रेम और रक्षा से जुडी हुई है।एक बार जब पांडवों और कौरवों के बीच चौपड़ खेला गया जिसमें पांडवों की इस खेल में हार हुयी। पांडवों ने इस खेल में द्रोपदी को दावं पर लगाया जिसके बाद कौरवों द्वारा द्वौपदी का अपमान किया गया भरी सभा में उसका चीर हरण किया गया ऐसे में द्रोपदी की लाज भगवान श्री कृष्ण ने बचायी। इसके बाद भगवान् श्री कृष्ण को द्वोपदी ने अपनी रक्षा के लिए धन्यवाद किया और अपनी उसी साड़ी का एक टुकड़ा उनकी कलाई पर बांध दिया। जिसके बाद से यह माना जाता है की हर बहिन अपनी रक्षा के लिए अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा बंधन के दिन राखी बांधती है।

रक्षाबंधन मनाने का कारण

हर साल रक्षाबंधन अगस्त महीने में मनाया जाता है। सभी हिन्दू इस त्यौहार को बड़े ही उत्साह से मानते हैं। यह प्रमुख रूप से भाई -और बहिन का त्यौहार है जो की शब्दों से मिलकर बना है –रक्षा +बंधन जिसका मतलब यह हुआ की ऐसा ऐसा बंधन जो रक्षा के लिए हो। भाई अपनी बहिन की हमेशा रक्षा करता है और इस त्यौहार से सभी भाई-बहन के बीच का स्नेह और सम्मान बना रहता है। हर वर्ष यह भारत में सावन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। हिन्दू धर्म ग्रंथों में भी कई कहानिया और पुराणों में कई ऐसे तथ्य हैं जहाँ हमे पुराने समय से ही रक्षा सूत्र को बनधने के बारे में पता लगता है। यहाँ त्यौहार भाई की लंबी आयु और भाई को बहिन की रक्षा करने का कर्तव्य याद दिलाता है। इसलिए हर साल यह त्यौहार मनाया जाता है।

राखी का गौरव

अनादिकाल से जब कोई राजा किसी युद्ध में जाता था तो उसके विजय होने के लिए उसे तिलक और रक्षा सूत्र बंधा जाता था। समय के साथ साथ इसमें बहिनों और पत्नियों द्वारा अपने बही और पति की रक्षा के लिए रक्षा सूत्र बनवा गया। भारत में रक्षाबंधन का काफी महत्त्व है। बहिने इस दिन भाई की लंबी आयु की कामना करती हैं व्रत रखती हैं और अपने भाइयों को तिलक लगाती हैं और उन्हें मीठा खिलाकर अपनी रक्षा का वचन मांगती हैं। और सभी भाई उनकी रक्षा करने का वचन उन्हें देते हैं। आज कल भाई से बहिने राखी पर गिफ्ट मांगती हैं और भाई बहन को गिफ्ट देते हैं। साथ होइ उनकी रक्षा करने का वचन भी देते हैं।

उपसंहार

इस त्यौहार को मानाने का उद्देश्य भाइयों को अपनी बहिनों की रक्षा करने के लिए उनके कर्तव्यों को याद दिलाना है। आधुनिक समय में भाइयों द्वारा अपनी बहिनों को उपहार भी दिए जाते हैं ,और बहिने भी अपने भाइयों से उपहार देने के लिए आग्रह करती है। और आजकल यही चलता है भाई इस दिन अपनी बहिन को गिफ्ट या पैसे दे देता है और इसे ही अपना कर्त्तव्य मान लेता है. जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। बहिने भी महंगी राखी करोड़ कर भाई की कलाई में बांध देती हैं।

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Essay On Raksha Bandhan In Hindi

भारत में पुराने ही समय से कई त्यौहार का अपना महत्त्व और मानाने की वजह रही है। कुछ विशेष कारण से इन त्योहारों को हिन्दुओं द्वारा मनाया जाता है। रक्षाबंधन त्यौहार ऐसा पवित्र त्यौहार है जो की हर वर्ष में श्रवण मास की पूर्णिमा यानी की अगस्त महीने में मनाया जाता है। इस दिन सभी बहिने सुबह उठ कर स्न्नान करती हैं और पूजा कर अपने भाइयों की लम्बी उम्र की कामना करती हैं। और उन्हें रखिओ बांधती है और उनका तिलक लगाती हैं सभी भाई इस दिन अपनी बहिन को उसकी रक्षा करने का वचन देते हैं और साथ ही कई सारे उपहार या पैसे देकर हसी ख़ुशी इस पवित्र त्यौहार को मनाते हैं। घर से दूर रह रहे भाइयों को डाक से या स्पीड पोस्ट से राखी का धागा भेजा जाता है ताकि उनके भाई इस त्यौहार में दूर रह कर भी अपने कर्तव्यों को न भूलें।

Essay On Raksha Bandhan In Hindi FAQs

हर साल राखी का त्यौहार कब मनाया जाता है ?

रक्षाबंधन का त्यौहार हर साल श्रवण माह की पूर्णिमा को अगस्त महीने में मनाया जाता है।

रक्षाबंधन मनाए जाने के पीछे क्या कारण है?

महाभारत काल और पुराणिक कथाओं में कई प्रकार की ऐसी कहानिया हैं जहाँ रक्षा सूत्र को बांध कर रक्षा का वचन दिया जाता था। इनमे से मुख्य कहानी भगवान श्री कृष्ण और द्रोपदी की है। जहाँ पर भगवान् कृष्ण ने द्वौपदी की रक्षा की थी और द्रौपदी ने उनकी कलाई पर अपनी साड़ी का एक टुकड़ा बांधा था तबसे राखी रक्षा सूत्र का काफी महत्त्व है।

रक्षाबंधन में बहिने अपने भाई से क्या वचन लेती हैं ?

इस दिन भाई अपनी बहिनों को उनकी रक्षा का वचन देता है और साथ ही उन्हें उपहार और कुछ पैसे भी देता है।

रक्षाबंधन 2022 में किस दिन है ?

इस बार रक्षाबंधन 11 अगस्त 2022 को है।

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