भारत भूटान और चीन के बीच डोकलाम विवाद | Doklam Issue between India Bhutan and China in hindi

डोकलाम विवाद:- एशिया महाद्वीप की दो महाशक्तियों भारत एवं चीन के मध्य सदैव से ही सीमा को लेकर विवाद की स्थिति रही है। समय- समय पर चीन द्वारा भारत के विभिन क्षेत्रों पर अधिकार जताया जाता रहा है। चीन द्वारा भारत के अतिरिक्त अपने अन्य पड़ोसी देशों के साथ भी सीमा विवाद रहे है जिससे की चीन का अन्य देशों के साथ भी सीमा को लेकर तनाव चलता रहता है। चीन द्वारा वर्ष 2017 में भारत, भूटान एवं चीन के मध्य स्थित डोकलाम क्षेत्र पर अपना अधिकार प्रदर्शित किया गया था जिसके कारण भारत एवं चीन के मध्य गंभीर विवाद उत्पन हो गया था।

आज के इस आर्टिकल के माध्यम से आपको डोकलाम विवाद (Doklam Issue) की सम्पूर्ण जानकारी प्रदान की जाएगी। भारत भूटान और चीन के बीच डोकलाम विवाद (Doklam Issue between India Bhutan and China in hindi) के बारे में जानकारी प्राप्त करने के अतिरिक्त आप इस आर्टिकल के माध्यम से डोकलाम विवाद के इतिहास, इसके कारणों एवं सबसे महत्वपूर्ण इस विवाद में भारत के पक्ष के बारे में भी सभी तथ्यों से परिचित हो सकेंगे।

भारत भूटान और चीन के बीच डोकलाम विवाद
भारत भूटान और चीन के बीच डोकलाम विवाद

क्या है डोकलाम विवाद

वर्ष 2017 में भारत के सिक्किम राज्य के पास स्थिति डोकलाम क्षेत्र में भारत एवं चीन के बीच तब विवाद की स्थिति उत्पन हो गयी थी जब चीन द्वारा भूटान अधिकृत क्षेत्र में रोड बनाने का कार्य शुरू किया गया था। डोकलाम विवाद 16 जून 2017 को शुरू हुआ था जिसमे भारत एवं चीन की सेनाएँ आमने-सामने खड़ी हो गयी थी। चीन द्वारा भारत के सिक्किम राज्य, भूटान एवं चीन के मध्य स्थित डोकलाम क्षेत्र में सड़क निर्माण के कार्य से इस विवाद की शुरुआत हुयी थी जिस पर भारत एवं भूटान द्वारा कड़ा विरोध जताया गया था। भूटान के द्वारा डोकलाम क्षेत्र को अपने देश का अखंड हिस्सा बताते हुए चीन पर अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।

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भारत द्वारा भी डोकलाम विवाद में चीन पर यथास्थिति को बदलने एवं भारत की सुरक्षा को लेकर विभिन प्रकार के आरोप लगाये गए थे जिस कारण से भारत एवं चीन के सैनिको के मध्य डोकलाम क्षेत्र में कई महीनों तक स्टैंड-ऑफ की स्थिति भी बनी रही थी।

डोकलाम का इतिहास 

भारत, भूटान एवं चीन के मध्य सीमा विवादों के इतिहास को देखने से ज्ञात होता है की इतिहास में यह क्षेत्र कभी भी विवाद का बिंदु नहीं रहा है। भारत एवं तिब्बत के मध्य व्यापारिक संबंधो के दौरान भी यह क्षेत्र सदैव से ही शांत रहा है। अगर वर्तमान समय में इस क्षेत्र के इतिहास को खंगाले तो इस क्षेत्र को लेकर सर्वप्रथम ब्रिटिश आयुक्त ए डब्ल्यू एवं चीन की तरफ से नियुक्त चीनी आयुक्त हो चांग जंग के मध्य वर्ष 1890 के समझौता हुआ था जिसमे मुख्यत व्यापार एवं सीमाबंदी के मुद्दों पर ही वार्ता हुयी थी। इसके पश्चात इस क्षेत्र में विभिन स्थानीय निवासियों के द्वारा व्यापार किया जाता रहा है। डोकलाम को चीन द्वारा तिब्बत का हिस्सा माना जाता है और चीन द्वारा इस क्षेत्र को रेशम मार्ग का अहम भाग माना गया है। इस क्षेत्र को चीन की स्थानीय भाषा में डोंगलांग कहा जाता है।

डोकलाम में चीन एवं भूटान के मध्य विवाद का कारण यह है की चीन इस क्षेत्र को ऐतिहासिक रूप से तिब्बत का हिस्सा मानता है और इस पर अपना अधिकार जताता है। वही भूटान द्वारा क्षेत्र को ऐतिहासिक रूप से भूटान का हिस्सा माना जाता है। दोनों ही देश इस क्षेत्र पर अपना-अपना दावा करते है ऐसे में डोकलाम को लेकर वर्तमान में लम्बे समय से विवाद की स्थिति बनी हुयी है। पूर्व में दुनिया का बॉर्डर खुला होने के कारण चीन और भूटान के चरवाहे इस क्षेत्र में अपने पशुओं को लेकर आते थे परन्तु वर्तमान में चीन द्वारा इस क्षेत्र पर अपना एकाधिकार जताया जा रहा है।

क्या है विवाद का कारण

भारत एवं चीन के मध्य डोकलाम विवाद को समझने से पूर्व हमे डोकलाम के भूगोल पर ध्यान देना अति आवश्यक है तभी हम इस विवाद के मूल कारणों को जान सकते है। दरअसल डोकलाम विवाद का मुख्य कारण इसकी भौगोलिक स्थित है। डोकलाम भारत, चीन एवं भूटान के मध्य भाग यानी की ट्राई-जंक्शन (जहाँ 3 देशो की सीमाएँ मिलती है) पर स्थिति है। यह क्षेत्र भारत के सिक्किम राज्य, चीन में स्थित चुंबी घाटी एवं भूटान के हा घाटी के मध्य स्थित है। अपनी स्थिति के कारण ही चीन एवं भूटान ऐतिहासिक रूप से इस भाग पर अपना दावा करते है। इस क्षेत्र में सीमा रेखा निर्धारित ना होने के कारण भूटान एवं चीन के द्वारा इस क्षेत्र में यथास्थिति (Status-quo) को बनाये रखने का निर्णय लिया गया था जिससे की यह क्षेत्र वर्षों तक शांत रहा।

वर्ष 2017 में इस क्षेत्र में अशांति होना उत्पन हुयी जब चीन के द्वारा वन-बेल्ट वन रोड (OBOR) परियोजना के तहत इस क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य शुरू किया गया था। वन-बेल्ट वन रोड (OBOR) परियोजना चीन की महत्वाकांक्षी रोड नेटवर्क परियोजना है जिसके तहत चीन द्वारा वर्ष 2017 में डोकलाम क्षेत्र में भी सड़क निर्माण का कार्य शुरू किया गया था जिसके कारण भूटान एवं भारत द्वारा इसका विरोध किया गया। भूटान द्वारा चीन पर अपने क्षेत्र में सड़क निर्माण का आरोप लगाया गया था एवं भारत से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया गया जिसके कारण इस क्षेत्र में भारत एवं चीन के सैनिक आमने सामने थे।

डोकलाम विवाद में भारत का पक्ष

अगर भौगोलिक रूप से देखा जाए तो डोकलाम विवाद मुख्यत भूटान एवं चीन के मध्य का मुद्दा प्रतीत होता है ऐसे में अधिकतर लोगो के मन में यह सवाल आ रहा होगा की भारत की इस विवाद में क्या भूमिका है। डोकलाम विवाद में भारत की भूमिका समझने के लिए हमे इस क्षेत्र की भारत के सन्दर्भ में भौगोलिक स्थिति पर गौर करना होगा। दरअसल डोकलाम विवादित क्षेत्र भारत के सिक्किम राज्य के नाथुला दर्रे से मात्र 15 किमी की दूरी पर है। इसके अतिरिक्त यह भारत के सामरिक बिंदु सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास भी स्थिति है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर ही डोकलाम विवाद में भारत की सुरक्षा का मुख्य बिंदु है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के पश्चिम बंगाल के पूर्वी भाग में सिलीगुड़ी जिले में स्थित क्षेत्र है जो की सम्पूर्ण पूर्वोत्तर भारत को शेष भारत के साथ जोड़ता है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर जिसे की इसकी स्थिति के कारण चिकन-नेक (Chicken neck) भी कहा जाता है भारत के पूर्वोत्तर भाग को भारत से जोड़ने के एकमात्र प्रमुख बिंदु है।

chiken neck siliguri corridor

यदि डोकलाम क्षेत्र में चीन के द्वारा अवैध निर्माण कर लिया जाता है तो इसके कारण चीन को भारत पर सामरिक बढ़त प्राप्त होगी एवं भविष्य में विवाद या युद्ध होने की स्थिति में चीन द्वारा सिलीगुड़ी कॉरिडोर या चिकन-नेक (Chicken neck) को चोक करके एवं अपने सैनिको को जल्दी से सड़क मार्ग द्वारा भारत की सीमा पर पहुंचाकर भारत की सुरक्षा को खतरा पैदा किया जा सकता है। यही कारण है की भारत द्वारा इस विवाद में प्रमुख भूमिका निभायी गयी है। साथ ही भारत के भूटान के साथ सामरिक एवं मैत्रीक सम्बन्धो के कारण भी इस विवाद को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी गयी है।

डोकलाम विवाद की वर्तमान स्थिति

वर्ष 2017 में डोकलाम क्षेत्र में चीन के अवैध निर्माण के खिलाफ भारत सरकार द्वारा इसका पुरजोर जबाव दिया गया था जिसके कारण चीन को इस क्षेत्र में मुँह की खानी पड़ी थी। भारत द्वारा इस क्षेत्र में विवाद के मद्धेनजर सैनिको की तैनाती की गयी थी जिसके कारण चीन को भी वार्ता की मेज पर आना पड़ा था। अंतत कई दौर की वार्ताओं के पश्चात सभी पक्षों के द्वारा इस क्षेत्र में यथास्थिति (Status-quo) बनाये रखने पर समझौता हुआ था जो की वर्तमान समय तक जारी है।

डोकलाम विवाद सम्बंधित अकसर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

डोकलाम कहाँ स्थित है ?

डोकलाम भारत, चीन एवं भूटान के मध्य स्थिति ट्राई-जंक्शन पर स्थित है।

डोकलाम की भौगोलिक स्थिति क्या है ?

डोकलाम क्षेत्र भारत के सिक्किम राज्य, चीन में स्थित चुंबी घाटी एवं भूटान के हा घाटी के मध्य स्थित है।

डोकलाम विवाद क्या है ?

डोकलाम विवाद सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी के लिए ऊपर दिया गया लेख पढ़े। इसके माध्यम से आप डोकलाम विवाद सम्बंधित सभी तथ्यों की जानकारी प्राप्त कर सकते है।

डोकलाम भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ?

डोकलाम भारत के सिक्किम राज्य एवं सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास स्थित है। यहाँ चीन द्वारा सड़क निर्माण से भारत की सामरिक स्थिति को खतरा है। चीन द्वारा इस क्षेत्र में सड़क निर्माण से भविष्य में चिकन-नेक को चोक करके भारत के पूर्वोत्तर भागों को देश से अलग-थलग किया जा सकता है। विस्तृत जानकारी के लिए आप ऊपर दिया गया लेख पढ़ सकते है।

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