चीन की सलामी स्लाइसिंग नीति क्या है एवं इसका इतिहास | What is China Salami Slicing Strategy and History in hindi

एशिया महाद्वीप में स्थित चीन का सदैव से ही अपने सीमावर्ती देशों के साथ सीमा विवाद रहा है। चीन द्वारा भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में हाल ही के वर्षो में विभिन विवादों को जन्म दिया गया है जिनमे गलवान घाटी एवं डोकलाम विवाद प्रमुख है। डोकलाम विवाद एवं गलवान घाटी विवादों के मध्य हाल ही के वर्षो में चीन की सलामी स्लाइसिंग नीति की चर्चा केंद्र के बिंदु में रही है।

आज के इस आर्टिकल के माध्यम से आपको चीन की सलामी स्लाइसिंग नीति क्या है एवं इसका इतिहास (What is China Salami Slicing Strategy and History in hindi) सम्बंधित सभी प्रकार की जानकारी प्रदान की जाएगी जिसके माध्यम से आप आसानी से चीन की सलामी स्लाइसिंग नीति के बारे में जान पाएंगे। साथ ही भारत के सन्दर्भ में चीन की सलामी स्लाइसिंग नीति के सम्बन्ध में भी आप इस आर्टिकल के माध्यम से महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

चीन की सलामी स्लाइसिंग नीति

भारत के बारे में आश्चर्यजनक तथ्य | Amazing Facts About India in hindi

चीन की सलामी स्लाइसिंग नीति क्या है ?

चीन द्वारा सलामी स्लाइसिंग नीति का वर्षो से अनुसरण किया जा रहा है। दरअसल चीन की सलामी स्लाइसिंग नीति वह नीति है जिसके तहत चीन द्वारा अपने सीमावर्ती देशो की भूमि का छोटे-छोटे भागों में अवैध अधिग्रहण किया जाता है। चीन द्वारा अपने सीमावर्ती देशो की भूमि पर छोटे-छोटे भागों में कब्ज़ा करके अपने देश का विस्तार करने की नीति को ही सलामी स्लाइसिंग नीति कहा जाता है। इस नीति के अंतर्गत चीन द्वारा इतिहास में अपने सीमावर्ती देशों के विभिन भागो पर कब्ज़ा करके अपने क्षेत्र का विस्तार किया गया है।

कैसे काम करती है सलामी स्लाइसिंग नीति

सलामी स्लाइसिंग नीति का इतिहास देखने पर पता चलता है की इस नीति का उपयोग वर्षों से किया जा रहा है। सलामी स्लाइसिंग नीति के तहत किसी भी कार्य को छोटे-छोटे भागो में पूरा किया जाता है जिससे की लम्बे समय में इसके वृहत परिणाम प्राप्त हो सके। इस नीति के तहत अवैध कार्यों को एक ही बार पूरा करने की जगह छोटे-छोटे भागो में पूरा किया जाता है जिससे की कम से कम प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है। हालांकि सलामी स्लाइसिंग नीति के तहत कार्य को छोटे-छोटे भागो में पूरा किया जाता है परन्तु लम्बे समय में इसके माध्यम से लोगो, संगठनो एवं देशो के द्वारा बड़े-बड़े कार्यो को अंजाम दिया गया है। इस नीति के तहत जहाँ एक बार किसी लक्ष्य को पूर्ण करने में अत्यधिक प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है वही छोटे-छोटे टुकड़ो में कार्य को विभाजित करने से आसानी से मनचाहा परिणाम प्राप्त किया जा सकता है।

सलामी स्लाइसिंग नीति का इतिहास

सलामी स्लाइसिंग नीति का इतिहास वर्षों पुराना है। हालांकि यह याद रखना आवश्यक है इस नीति का उपयोग अवैध कार्यों को गुप्त तरीकों से पूर्ण करने के लिए ही किया जाता है। अगर कोई व्यक्ति, देश या संगठन किसी भी अवैध कार्य को एक ही बार में पूरा करता है तो उसे अन्य लोगो के प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है। परन्तु यदि व्यक्ति, देश या संगठन इस कार्य को गुप्त रूप से छोटे-छोटे भागो में अंजाम दिया जाता है तो लम्बे समय में इसके माध्यम से मनचाहे लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। सरल शब्दो में कहें तो अगर कोई साइबर क्रिमिनल ग्रुप आपके खाते से 10 रुपए निकाल लेता है तो शायद आप इस पर अधिक ध्यान नहीं देंगे वही आपके खाते से हजारों या लाखों रुपए गायब होने पर आप निश्चित रूप से ही इसके सम्बन्ध में चिंतित होंगे। सलामी स्लाइसिंग नीति के तहत इसी प्रकार से कार्य किया जाता है जहाँ कार्य को छोटे-छोटे भागों में पूरा किया करके बड़े लक्ष्यों को प्राप्त किया जाता है।

हिटलर के द्वारा जर्मनी में नाजी पार्टी के प्रभुत्व में सलामी स्लाइसिंग नीति का जमकर उपयोग किया गया था जब हिटलर द्वारा अपने सभी विरोधियों को एक साथ ख़त्म ना करके अलग-अलग समय पर समाप्त किया गया था। साथ ही चीन द्वारा भी वर्षो से इस नीति का अनुसरण किया जा रहा है।

चीन की सलामी स्लाइसिंग नीति

चीन द्वारा आजादी के बाद से ही सलामी स्लाइसिंग नीति का जमकर उपयोग किया गया है। चाहे तिब्बत पर कब्ज़ा करना हो या भारत के लद्दाख के अक्साई चीन क्षेत्र पर अवैध कब्ज़ा। इसके अतिरिक्त 1974 में वियतनाम से पैरोसेल द्वीप पर अवैध कब्ज़ा ये सभी चीन की सलामी स्लाइसिंग नीति का ही परिणाम है।

चीन अपनी सलामी स्लाइसिंग नीति के तहत सबसे पहले किसी देश के जिस भी भूभाग को कब्जाना चाहता है उस पर अपना दावा प्रदर्शित करता है:- जैसे तिब्बत पर जो की ऐतिहासिक रूप से सदैव एक स्वायत क्षेत्र रहा है पर चीन द्वारा अपना दावा करना। इसके पश्चात चीन द्वारा अपने इस दावे को बार-बार दोहराकर इस क्षेत्र को विवादित बना दिया जाता है। इसके पश्चात जब वह क्षेत्र विवादित घोषित हो जाता है तो चीन द्वारा इस क्षेत्र पर पूर्ण अधिकार करने के लिए इसे मान्यता प्रदान कर दी जाती है। इसके पश्चात चीन द्वारा अपनी राजनीतिक, कूटनीतिक, वित्तीय एवं सैन्य शक्ति के माध्यम से उस भाग पर पूर्ण अधिकार कर लिया जाता है। इस प्रकार चीन द्वारा विस्तारवाद के इस कार्य को छोटे-छोटे भागो में अंजाम दिया जाता है।

भारत के सन्दर्भ में सलामी स्लाइसिंग नीति

चीन द्वारा भारत के विभिन भूभागों पर अपना अवैध अधिकार करने के लिए वर्षो से इस नीति का अनुसरण किया जा रहा है। इसका पहला उदाहरण हम 1962 के युद्ध में चीन द्वारा भारत के लद्दाख क्षेत्र में कब्जाये गए अक्साई चीन के भाग को देख सकते है। इसके अतिरिक्त डोकलाम विवाद एवं गलवान घाटी विवाद भी चीन की सलामी स्लाइसिंग नीति के प्रत्यक्ष उदाहरण है। साथ ही चीन द्वारा भारत के अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल-प्रदेश एवं लद्दाख के विभिन भू-भागों पर अपना दावा किया जाता रहा है जो की चीन की सलामी स्लाइसिंग नीति का ही हिस्सा है। ऐसे में भारत को चीन की इस नीति को ध्यान में रखते हुए भविष्य में सावधान रहने की आवश्यकता है।

China Salami Slicing Strategy (FAQ)

सलामी स्लाइसिंग नीति क्या है ?

सलामी स्लाइसिंग नीति के तहत किसी भी अवैध कार्य को एक ही बार में पूरा ना करके इसे गुप्त रूप से छोटे-छोटे भागो में किया जाता है जिससे की लम्बे समय में यह बिना किसी विरोध के पूर्ण किया जा सके।

सलामी स्लाइसिंग नीति का प्रयोग किन-किन क्षेत्रों में किया जाता है ?

सलामी स्लाइसिंग नीति का प्रयोग प्रायः सभी क्षेत्रों में किया जाता है। हालांकि मुख्य रूप से राजनीति, कूटनीति एवं वित्तीय क्षेत्र में इस नीति का प्रयोग होता है।

चीन की सलामी स्लाइसिंग नीति क्या है ?

चीन की सलामी स्लाइसिंग नीति के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए ऊपर दिया गया लेख पढ़े। इसके माध्यम से आप चीन की सलामी स्लाइसिंग नीति के बारे में जागरूक हो सकेंगे।

भारत के सन्दर्भ में चीन की सलामी स्लाइसिंग नीति क्या है ?

भारत के सन्दर्भ में चीन की सलामी स्लाइसिंग नीति के तहत भारत के विभिन सीमावर्ती भागों में विवाद उत्पन किये जाते है जैसे की डोकलाम एवं गलवान घाटी विवाद। इसके अतिरिक्त अन्य भागों में भी विवाद के माध्यम से चीन द्वारा भारत की भूमि पर अधिकार के प्रयास किये जाते रहे है।

Leave a Comment