Work from Home Allowance: इस बजट में ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने वालों को मिलेगी बड़ी खुशखबरी! होगा बड़ा फायदा

Work from Home Allowance: दोस्तों कोरोना के चलते देश के कई राज्यों में कुछ चीजों में पाबन्दी लगा दी गयी। जिससे छत्रों के स्कूल भी बंद करवा दिए गए। इसके साथ साथ कई कार्यालयों में 50 प्रतिशत उपस्थिति पर कार्यालय खोले गए थे। और कुछ कार्यालयों में वर्क फ्रॉम होम भी शुरू किया गया था। वर्क फ्रॉम होम के कारण कई लोगों के खर्चे में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। ऐसे में सरकार ने इन लोगों के लिए एक राहत भरी खबर दी है। जानकारी के मुताबिक वर्क फ्रॉम होम करने वाले कर्मचारियों को अलाउंस दिया जायेगा। यदि आप भी वर्क फ्रॉम होम करने वाले कर्मचरियों की लिस्ट में शामिल हैं तो आपके लिए यह खबर काफी महत्वपूर्ण होने वाली है। आईये आपको इसके विषय में पूरी जानकारी देते हैं।

वर्क फ्रॉम होम अलाउंस देने की मांग

कुछ द‍िनों से टैक्स सर्विसेज और फाइनेंशियल सर्विस देने वाली कंपनी Deloitte India ने कर्मचारी लोगों को वर्क फ्रॉम होम अलाउंस देने की मांग की है। जिसमे उन्होंने कहा है क‍ि यद‍ि सरकार सीधे तौर पर अलाउंस नहीं दे सकती तो आयकर विभाग द्वारा लिया जाने वाले टैक्स में छूट प्रदान करे। डेलॉएट ने ब्रिटेन में वर्क फ्रॉम होम (Work from home) के इस सम्बन्ध में इसकी स्थिति का जिक्र किया है। अर्थात डेलॉइट इंडिया ने कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम अलाउंस की बड़ी मांग की है।

वित्त मंत्री ने किया विचार

Deloitte India की वर्क फ्रॉम होम अलाउंस की मांग पर व‍ित्‍त मंत्री ने व‍िचार क‍िया हैं। जिससे बताया जा रहा है कि घर से काम करने वाले कर्मचार‍ियों को 50 हजार रुपये तक का वर्क फ्रॉम होम अलाउंस म‍िल सकता है। इसके साथ साथ इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने भी बजट को लेकर इसी तरह की सिफारिशे की हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी ने इस विषय पर विचार करने का फैसला लिया है।

स्टैंडर्ड डिडक्शन में इज़ाफ़ा होने की संभावना

दोस्तों आयकर विभाग के द्वारा धारा 10 के तहत करदाता को छूट प्रदान की जाती है। ICAI अर्थात Institute of Chartered Accountants of India की तरफ से वर्क फ्रॉम होम अलाउंस के साथ साथ यह भी मांग की है क‍ि आय का भुगतान करने वालों को स्टैंडर्ड डिडक्शन में रिलीफ देने के लिए सीमा को बढ़ाने की जरूरत है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इनकम टैक्स विभाग के तहत अभी स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट 50 हजार रुपए है। Institute of Chartered Accountants of India ने इसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने की मांग की है।

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