दिवाली पर निबंध (Essay on Diwali in Hindi)

भारत को त्यौहारों का देश माना जाता है। यहाँ हर दिन देश के किसी ना किसी हिस्से में कोई ना कोई त्यौहार मनाया जाता है परन्तु इनमें कई त्यौहार स्थानीय होते है परन्तु आज हम बात करेंगे हमारे पूरे देश में मनाया जाने वाला त्यौहार जो की भारत के हर हिस्से में समान जोश और उमंग के साथ मनाया जाता है। हम बात कर रहे है दिवाली की जिसे दीपावली भी कहा जाता है। यह पूरे भारत में मनाया जाने वाला त्यौहार है। यह पावन पर्व कार्तिक मास की अमावस्या की रात को मनाया जाता है। इस साल दिवाली 4 नवम्बर गुरुवार को है।

आज हम दिवाली पर निबंध (Essay on Diwali in Hindi) लिखने जा रहे है। आप कैसे Essay on Diwali in Hindi पर एक प्रभावकारी निबंध लिख सकते है यही इस लेख में बताया गया है तो पूरा पढ़िए दिवाली पर निबंध (Essay on Diwali in Hindi)

दिवाली पर निबंध (Essay on Diwali in Hindi)

दिवाली हिन्दू धर्म में मनाया जाने वाला सबसे प्रमुख त्यौहार है। यह पूरे भारतवर्ष में बड़ी उमंग एवं धूम-धाम मनाया जाता है। कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाने वाला यह त्यौहार ना सिर्फ असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है अपितु इस दिन सुख एवं समृद्धि के लिए भगवान गणेश एवं माँ लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। असंख्य दीपों से जगमग पूरा देश ऐसा प्रतीत होता है जैसे आसमान के तारे भूमि पर उतारकर पूरी धरा को प्रज्वलित कर रहे हो। दीपों की जगमग रौशनी मन में एक नया जोश पैदा करती है और जीवन में अँधेरे से लड़ने की प्रेरणा देते है। अलग-अलग धर्मों में इस दिन हेतु अलग-अलग मान्यताएं है साथ ही साथ इस त्यौहार से भी कई पौराणिक कथाएं जुडी हुए है। दिवाली का पूरे देश के लोग बड़ी बेसब्री से पूरे वर्ष इंतज़ार करते रहते है और इसे पूरे उमंग के साथ मनाते है।

क्यों मनाई जाती है दिवाली

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन अयोध्या के राजा भगवान् राम लंका के असुर सम्राट रावण के मारकर 14 वर्षो का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे। उनके वापस लौटने की ख़ुशी में ही अयोध्यावासियों ने दीए जलाकर दिवाली मनाई थी। भगवान् राम के अयोध्या आगमन से शुरू हुइ यह परंपरा आज पूरे भारतवर्ष का एक अभिन्न अंग है। भारत के प्रत्येक घर में दिवाली हर्षोल्लाष के साथ विधिवत तरीके से मनाई जाती है। महाभारत काव्य के अनुसार इस दिन पांडव 12 वर्ष का वनवास एवं एक वर्ष का अज्ञातवास वापस करके लौटे थे इसलिए पांडवो के आगमन की ख़ुशी में यह त्यौहार मनाया जाता है। चाहे इस त्यौहार को मनाने की पीछे कुछ भी पौराणिक मान्यता हो परन्तु यह हमे असत्य पर सत्य की विजय को प्रदर्शित करने और हुए जीवन में सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।

दिवाली हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग

दिवाली भारतीय समाज का एक अभिन्न अंग है। यह हमे जीवन के लिए विभिन सीख देता है। यह असत्य पर सत्य की विजय को प्रदर्शित करता है। इस दिन परिवार के सभी सदस्य एकत्रित होकर पूजा-अर्चना करते है। घर में विविध प्रकार के पकवान बनाये जाते है और लोग अपने मित्रों, रिश्तेदारों और सगे संबंधियों के घर जाते है उनसे मिलते है साथ ही पूजा-अर्चना कर विभिन पकवानों का आनंद भी लेते है। इस प्रकार यह त्यौहार लोगो को मिलने का और खुश होने का मौका देता है। दिवाली के दिन हम विभिन देवी-देवताओं की पूजा करते है जिससे अन्तर्मन की शुद्धि भी होती है एवं जीवन में आध्यात्मिकता का प्रवेश भी होता है। दिवाली का ना सिर्फ आध्यात्मिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक महत्व है अपितु यह भारतीय एकता का भी प्रतीक है क्यूंकि अन्य स्थानीय त्यौहारो की बजाय यह त्यौहार पूरे देश में समान भाव से मनाया जाता है। इसलिए यह देश की सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।

दिवाली का आनंद

दिवाली चार माह की बरसात के मौसम के पश्चात आने वाला त्यौहार है। बरसात के मौसम में धान की फसल को समेटने के पश्चात किसानो के चेहरे पर मुस्कान जाती है साथ ही उनके लिए यह हर्ष का समय होता है। दिवाली से कुछ समय पूर्व ही बाजार भांति-भांति की चीजों से सज जाते है। दिवाली से 3 दिन पहले धनतेरस मनाया जाता है। इस दिन नए बर्तन खरीदना बहुत शुभ माना जाता है अतः इस दिन बाजारों में लोग जमकर बर्तनो की खरीददारी करते है।

इसके अगले दिन नरक चौदसी या छोटी दिवाली के दिन सूर्योदय होने से पूर्व स्नान करने से अच्छा फल मिलता है। दिवाली कार्तिक माह के अमावस्या के दिन मनाई जाती है। इस दिन लोग नए-नए कपड़े पहनते है और घरों में विविध प्रकार के व्यंजन बनाये जाते है। इस दिन भगवान गणेश और समृद्धि व धन-धान्य की देवी माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन पूजा द्वारा घर का वातावरण भी शुद्ध किया जाता है ताकि घर में सकारात्मकता बनी रहे एवं घर में सुख-समृद्धि आये। इस दिन पूरे घर को दीयों से रोशन किया जाता है जो की पूरे वातावरण में एक आनंद का भाव घोल देता है।

अन्य धर्मो में दिवाली का महत्व

दिवाली सिर्फ हिन्दुओं के लिए ही हर्ष का त्यौहार नहीं है अपितु अलग-अलग धर्मों में भी इसका महत्व है। जैन धर्म में मान्यता है की इस दिन महावीर स्वामी को निर्वाण प्राप्त हुआ था इसलिए इस दिन का जैन धर्म के मतावलम्बियों के लिए बड़ा महत्व है। सिख धर्म में भी इस दिन गुरु हरगोविंद सिंह को रिहा किया गया था। इसी प्रकार आर्य समाज वाले लोगो के लिए भी इस दिन का विशेष महत्व है। दिवाली भारत के अलावा नेपाल, इंडोनेशिया, मॉरीशस, फिजी, व दुनिया में जहाँ भी हिन्दू धर्म के मतावलंबी है धूम-धाम से मनाई जाती है।

दिवाली स्वछता का प्रतीक

दिवाली बरसात के महीनो के बाद आने वाला त्यौहार है। दिवाली से पूर्व लोग बरसात के मौसम में आयी सीलन, काई एवं अन्य गंदगी को हटाते है तथा घर पर अच्छे से रंग-रोगन करते है। पूरे घर को इस तरह से साफ़ किया जाता है की जैसे इसका नवनिर्माण हुआ हो। इस प्रकार यह त्यौहार स्वछता का भी प्रतीक है।

दिवाली पर दूर रहे बुराईयों से

दिवाली पर कुछ लोग जुआ खेलते है जो की एक सामाजिक बुराई है। साथ ही कुछ लोग इस दिन मदिरापान भी करते है जिससे की घर-परिवार पर नकारात्मक असर पड़ता है। हमे इस दिन भगवान की पूजा करके एवं अच्छे-अच्छे व्यंजन खाकर अपने परिवार के साथ इस त्यौहार का आनंद लेना चाहिए। साथ ही हमें पटाख़े फोड़ने के बजाये मिट्टी से बने दिये जलाने चाहिए जिससे प्रदूषण भी कम हो एवं हमारे आस-पास के दिये बनाने वाले लोगो को भी रोजगार मिले। साथ ही हमे अधिक से अधिक स्थानीया चीजों का उपयोग करके स्थानीयता को दिवाली में बढ़ावा देना चाहिए।

दिवाली हर्ष का त्यौहार है। हमे दिवाली से जीवन में अज्ञान रुपी अँधेरे को दीयों के प्रकाश रुपी ज्ञान से दूर करने की प्रेरणा मिलती है। साथ ही यह त्यौहार हमे सदैव सत्य के मार्ग पर चलने हेतु प्रेरित करता है।

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